यूपी विधानमंडल मानसून सत्र 2026: राम मंदिर चढ़ावा मुद्दे पर हंगामा, सपा ने किया विरोध तो सरकार का पलटवार
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र 2026 का पहला दिन राजनीतिक बयानबाजी, विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और सत्ता पक्ष के जवाबी हमलों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया। विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखी राजनीतिक नोकझोंक देखने को मिली। विशेष रूप से राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे, नीट पेपर लीक, किसानों के सवाल और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने पहले दिन की कार्यवाही को सुर्खियों में ला दिया।
सत्र शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। वहीं विधान परिषद के भीतर डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की टिप्पणी के बाद विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध जताया और नारेबाजी की। बाद में विधानसभा में दिवंगत वरिष्ठ विधायक आलमबदी को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
विधानसभा के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन
मानसून सत्र शुरू होने से पहले सोमवार सुबह करीब साढ़े दस बजे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के विधायक विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी और नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
प्रदर्शन में शामिल कुछ विधायक प्रतीकात्मक रूप से दानपेटी लेकर पहुंचे। उनके हाथों में विभिन्न पोस्टर भी थे, जिन पर सरकार से जवाब मांगने वाले नारे लिखे हुए थे। विपक्ष का कहना था कि इन मुद्दों पर सदन में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए और सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सत्र की शुरुआत विपक्ष के मजबूत रुख के साथ हुई है।
विधान परिषद में हुआ हंगामा
सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद विधान परिषद में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। कार्यवाही के दौरान डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर टिप्पणी करते हुए एक कहावत का उल्लेख किया। इसके बाद उन्होंने अपने राजनीतिक आरोप भी दोहराए।
उनकी टिप्पणी पर समाजवादी पार्टी के सदस्य नाराज हो गए और विरोध दर्ज कराने के लिए वेल में पहुंच गए। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी भी की, जिसके कारण सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।
हालांकि सदन की कार्यवाही संसदीय नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया, लेकिन कुछ समय तक राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी रहा।
सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
मानसून सत्र के पहले दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। विपक्ष ने जनहित के विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा, जबकि सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में भी सदन के भीतर कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने तर्कों के साथ सदन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान
सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले किसानों के हितों के खिलाफ काम करते थे, वे अब किसानों की चिंता जताने की बात कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता सभी राजनीतिक दलों के कार्यों और बयानों को देख रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक चर्चा का मंच है और यहां प्रदेश के विकास तथा जनहित से जुड़े विषयों पर गंभीर बहस होनी चाहिए।
सदन में दिवंगत विधायक को श्रद्धांजलि
राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच विधानसभा में सबसे पहले वरिष्ठ समाजवादी नेता और विधायक आलमबदी के निधन पर शोक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय तथा विभिन्न दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सदन में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता को सम्मान दिया गया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आलमबदी के निधन से उत्तर प्रदेश ने एक अनुभवी जनप्रतिनिधि और समाजसेवी को खो दिया है। श्रद्धांजलि के बाद विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
चार दिनों तक चलेगा मानसून सत्र
उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र 3 अगस्त से 6 अगस्त 2026 तक प्रस्तावित है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्य होने हैं।
मंगलवार को प्रश्नकाल के बाद संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री सुरेश खन्ना वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत करेंगे। इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों से जुड़े कई विधायी प्रस्तावों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
नौ अध्यादेशों पर भी हो सकती है चर्चा
सरकारी कार्यक्रम के अनुसार इस मानसून सत्र के दौरान कई विधेयकों और अध्यादेशों पर विचार किया जा सकता है। जानकारी के अनुसार नौ अध्यादेशों को सदन की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।
यदि ऐसा होता है तो इन प्रस्तावों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत चर्चा देखने को मिल सकती है। विपक्ष इन अध्यादेशों को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांग सकता है, जबकि सरकार इनके उद्देश्य और आवश्यकता को सदन के सामने रखेगी।
संभल न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट भी संभावित
इस सत्र के दौरान संभल घटनाक्रम की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट भी सदन में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टि से यह भी महत्वपूर्ण विषय माना जा रहा है।
यदि रिपोर्ट पेश होती है, तो विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा सकते हैं। रिपोर्ट पर होने वाली चर्चा भी मानसून सत्र का प्रमुख आकर्षण बन सकती है।
जनहित के मुद्दों पर रहेगी नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून सत्र केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा। बिजली, कृषि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचा और वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
जनता की अपेक्षा है कि सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों पर रचनात्मक बहस हो और प्रदेश के विकास से जुड़े विषयों पर सार्थक निर्णय लिए जाएं।
सरकार को घेरने की तैयारी
उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र का पहला दिन राजनीतिक गतिविधियों से भरपूर रहा। एक ओर विपक्ष ने राम मंदिर चढ़ावा मुद्दे और नीट पेपर लीक को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया, वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। इसके साथ ही सदन ने दिवंगत विधायक आलमबदी को श्रद्धांजलि देकर लोकतांत्रिक परंपरा का निर्वहन किया।
अब सभी की नजर आगामी दिनों की कार्यवाही पर है, जहां अनुपूरक बजट, संभावित अध्यादेश, न्यायिक आयोग की रिपोर्ट और जनहित से जुड़े अनेक विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।

