जुलाई 2026 में भारत का कोयला उत्पादन 7.51% बढ़ा, आपूर्ति में 17.34% की मजबूत बढ़ोतरी

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारत ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जुलाई 2026 में देश के कोयला उत्पादन और कोयला आपूर्ति (डिस्पैच) दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

कोयला मंत्रालय द्वारा जारी अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में भारत का कुल कोयला उत्पादन 69.75 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष जुलाई 2025 के 64.88 मिलियन टन की तुलना में 7.51 प्रतिशत अधिक है।

इसी प्रकार, कोयले की आपूर्ति में भी शानदार वृद्धि देखने को मिली। जुलाई 2026 के दौरान कुल 86.33 मिलियन टन कोयले का प्रेषण (डिस्पैच) किया गया, जबकि जुलाई 2025 में यह आंकड़ा 73.57 मिलियन टन था। इस प्रकार कोयला आपूर्ति में 17.34 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन और आपूर्ति में यह निरंतर सुधार देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ औद्योगिक विकास और बिजली उत्पादन को भी मजबूती देगा।

कोयला मंत्रालय की रणनीति से मिला सकारात्मक परिणाम

कोयला मंत्रालय का कहना है कि उत्पादन और आपूर्ति में हुई यह वृद्धि सरकार की उन नीतियों का परिणाम है, जिनका उद्देश्य देश में कोयले की उपलब्धता बढ़ाना और ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाना है।

मंत्रालय ने पिछले कुछ वर्षों में खनन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने, परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि देश में कोयले की उपलब्धता लगातार बढ़ रही है और बिजली संयंत्रों सहित विभिन्न उद्योगों को समय पर ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है।

वित्त वर्ष 2026-27 में भी जारी रही वृद्धि

केवल जुलाई माह ही नहीं, बल्कि वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में भी कोयला क्षेत्र का प्रदर्शन सकारात्मक रहा है।

जुलाई 2026 तक देश का संचयी कोयला उत्पादन 302.24 मिलियन टन (अस्थायी) दर्ज किया गया। वहीं, इस अवधि में कुल 354.70 मिलियन टन कोयले का प्रेषण किया गया।

यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.87 प्रतिशत अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि देश में ऊर्जा क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए कोयले की आपूर्ति लगातार बढ़ाई जा रही है।

कोल इंडिया लिमिटेड का शानदार प्रदर्शन

देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited – CIL) ने भी जुलाई 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, सीआईएल ने जुलाई 2026 में 50.35 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया। यह जुलाई 2025 की तुलना में 8.42 प्रतिशत अधिक है।

इसी तरह, कंपनी ने जुलाई 2026 में 63.67 मिलियन टन कोयले का प्रेषण किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 17.43 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

यह प्रदर्शन बताता है कि देश की सबसे बड़ी कोयला कंपनी ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

संचयी प्रेषण में भी सीआईएल की मजबूत बढ़त

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में कोल इंडिया लिमिटेड का संचयी कोयला प्रेषण भी उल्लेखनीय रहा।

जुलाई 2026 तक कंपनी द्वारा किए गए कुल कोयला प्रेषण में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 6.81 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि कंपनी केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

बिजली उत्पादन और उद्योगों को मिलेगा लाभ

भारत में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा अब भी कोयले पर आधारित है। ऐसे में कोयला उत्पादन और आपूर्ति में वृद्धि का सीधा लाभ बिजली क्षेत्र को मिलेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिजली संयंत्रों को पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध होता रहेगा, तो बिजली उत्पादन में बाधा आने की संभावना कम होगी।

इसके अलावा, इस्पात, सीमेंट, एल्यूमिनियम और अन्य भारी उद्योगों को भी समय पर ईंधन मिलने से औद्योगिक उत्पादन में तेजी आएगी।

आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

कोयला मंत्रालय का प्रमुख लक्ष्य देश में घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयातित कोयले पर निर्भरता कम करना है।

पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने वाणिज्यिक कोयला खनन, निजी क्षेत्र की भागीदारी, नई खदानों के विकास और आधुनिक मशीनों के उपयोग को बढ़ावा दिया है।

इसके परिणामस्वरूप घरेलू उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत हो रही है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

सरकार का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता देश की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कोयला उत्पादन में वृद्धि से भारत न केवल अपनी घरेलू मांग पूरी कर सकेगा, बल्कि भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र को अधिक स्थिर और मजबूत भी बना सकेगा।

इसके साथ ही रेलवे, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में सुधार के कारण कोयले की आपूर्ति पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी हुई है।

ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार

ऊर्जा  विश्लेषकों के अनुसार, कोयला उत्पादन और आपूर्ति में लगातार वृद्धि यह दर्शाती है कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रहा है।

हालांकि, विश्लेषकों का यह भी मानते हैं कि स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विकास के साथ-साथ कोयला क्षेत्र में पर्यावरणीय मानकों का पालन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग भी उतना ही आवश्यक है।

जुलाई 2026 में भारत के कोयला उत्पादन में 7.51 प्रतिशत और कोयला आपूर्ति में 17.34 प्रतिशत की वृद्धि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत है। कोल इंडिया लिमिटेड के बेहतर प्रदर्शन और कोयला मंत्रालय की नीतियों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यदि इसी गति से उत्पादन और आपूर्ति बढ़ती रही, तो भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर सकेगा, बल्कि आयात पर निर्भरता घटाकर आत्मनिर्भर ऊर्जा अर्थव्यवस्था की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाएगा।

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