बांदा में 15वें दिन भी जारी रहा चकबंदी विवाद पर किसानों का धरना , अब दे दी है यह चेतावनी – जिले में शुरू हुई चर्चा

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रिपोर्ट – पंकज त्रिपाठी 

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में चकबंदी कार्य को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक कार्रवाई में देरी के आरोपों के बीच किसानों का धरना 15वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि उनकी शिकायतों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वे आमरण अनशन शुरू करने को मजबूर होंगे।

धरना स्थल पर मौजूद किसानों का आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिसके कारण खेती-किसानी का कार्य प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, समाचार लिखे जाने तक जिला प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

चकबंदी कार्य में अनियमितताओं का आरोप

धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों ने चकबंदी का कार्य केवल अभिलेखों में पूरा दिखाया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। किसानों के अनुसार, कई गांवों में खेतों का सीमांकन और भूखंडों का वास्तविक निर्धारण अभी भी स्पष्ट नहीं है। परिणामस्वरूप किसानों के सामने खेती शुरू करने में व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई किसानों को यह स्पष्ट नहीं है कि चकबंदी के बाद उनका वास्तविक खेत कौन-सा है। इससे गांवों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और आपसी विवाद बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो आगामी कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

15 दिनों से जारी है धरना

किसानों के अनुसार, वे पिछले 15 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों और शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला।

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इतने लंबे समय तक धरना जारी रहने के बावजूद कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनने नहीं आया। इसी कारण किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है कि किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

आमरण अनशन की चेतावनी

धरने का नेतृत्व कर रहे किसान नेता बलराम तिवारी ने कहा कि यदि प्रशासन शीघ्र किसानों से वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करता है, तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसान आमरण अनशन शुरू करने पर विचार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि किसानों की प्राथमिक मांग किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और चकबंदी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन संवाद स्थापित करता है, तो समाधान का रास्ता निकल सकता है।

खेती-किसानी पर पड़ रहा असर

धरना दे रहे किसानों का कहना है कि चकबंदी विवाद का सीधा असर कृषि कार्यों पर पड़ रहा है। खेतों की स्पष्ट स्थिति नहीं होने के कारण किसान जुताई, बुवाई और अन्य कृषि गतिविधियों की योजना नहीं बना पा रहे हैं।

विशेषज्ञ भी मानते हैं कि कृषि आधारित क्षेत्रों में भूमि संबंधी विवादों का समय पर समाधान होना आवश्यक है। यदि ऐसे मामलों का शीघ्र निस्तारण नहीं होता, तो इससे किसानों की आय और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

किसानों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

इसके साथ ही किसानों ने मांग की कि चकबंदी कार्य का वास्तविक सत्यापन कराया जाए ताकि सभी किसानों को उनकी भूमि का स्पष्ट निर्धारण मिल सके और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

किसानों ने संवाद की आवश्यकता बताई

धरने में शामिल किसानों ने कहा कि उनकी प्राथमिकता आंदोलन करना नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान कराना है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों की बात सुनें और सकारात्मक संवाद के माध्यम से समाधान निकालें।

किसानों का मानना है कि यदि समय रहते वार्ता होती है, तो स्थिति सामान्य हो सकती है और आंदोलन को आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

सरकार की किसान हितैषी योजनाओं का भी किया उल्लेख

उत्तर प्रदेश सरकार समय-समय पर किसानों के हित में विभिन्न योजनाएं संचालित करने का दावा करती रही है। इनमें कृषि सहायता, सिंचाई, फसल बीमा और भूमि संबंधी सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयास शामिल हैं।

हालांकि, बांदा के प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से लागू नहीं होंगी, तो सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाएगा। उनका कहना है कि योजनाओं के साथ-साथ उनके क्रियान्वयन की निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

आधिकारिक पक्ष का इंतजार

धरना और किसानों के आरोपों के बीच प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। यदि प्रशासन इस मामले में अपना पक्ष या कोई स्पष्टीकरण जारी करता है, तो उससे स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि और चकबंदी से जुड़े मामलों का समाधान बातचीत, पारदर्शी जांच और विधिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है। इससे न केवल किसानों की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि भविष्य में ऐसे विवादों की पुनरावृत्ति भी रोकी जा सकेगी।

बांदा में चकबंदी को लेकर किसानों का धरना अब आंदोलन के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है। किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में आमरण अनशन की चेतावनी दी है, जबकि प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन किसानों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में क्या कदम उठाता है। यदि समय रहते सकारात्मक पहल होती है, तो विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सकता है। वहीं, यदि बातचीत में देरी होती है, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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