प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना: 5000 MW फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं को मंजूरी, ऊर्जा भंडारण से मजबूत होगा ग्रिड

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) 2026 को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य देश में फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (Floating Solar Photovoltaic – FSPV) परियोजनाओं को बड़े स्तर पर बढ़ावा देना है। इसके तहत ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Energy Storage Systems – ESS) के साथ 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने की योजना बनाई गई है।

वर्तमान समय में भारत तेजी से अक्षय ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में यह योजना सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ बिजली आपूर्ति की स्थिरता और ग्रिड की विश्वसनीयता को भी मजबूत करने में मदद करेगी। इसके अलावा, जलाशयों और औद्योगिक तालाबों जैसे मौजूदा जल संसाधनों का उपयोग करके भूमि की कमी की समस्या को भी कम किया जा सकेगा।

₹5,070 करोड़ के बजट से लागू होगी योजना

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के लिए केंद्र सरकार ने ₹5,070 करोड़ के बजट अनुमान को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू की जाएगी। योजना के तहत फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के साथ आधुनिक ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे जरूरत के समय बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

दरअसल, सौर ऊर्जा उत्पादन दिन के समय अधिक होता है, जबकि बिजली की मांग कई बार शाम और रात के समय बढ़ जाती है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणाली अतिरिक्त बिजली को संग्रहित कर पीक डिमांड के समय उपयोग करने में मदद करेगी। इससे राज्यों को बिजली की चरम मांग को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में सहायता मिलेगी।

10,000 मेगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसमें शामिल ऊर्जा भंडारण प्रणाली है। सरकार का लक्ष्य कम से कम दो घंटे की भंडारण क्षमता वाली 10,000 मेगावाट ESS क्षमता विकसित करना है।

इस व्यवस्था से सौर ऊर्जा उत्पादन में आने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित किया जा सकेगा। साथ ही, बिजली वितरण कंपनियों और राज्यों को स्थिर एवं भरोसेमंद बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, एकीकृत ऊर्जा भंडारण प्रणाली के कारण राष्ट्रीय बिजली ग्रिड की मजबूती भी बढ़ेगी। इससे भविष्य में बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए एक बेहतर आधार तैयार होगा।

भारत में 102.18 GWp फ्लोटिंग सोलर क्षमता की संभावना

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) द्वारा किए गए आकलन के आधार पर तैयार किया गया है। इस आकलन के अनुसार, भारत के जलाशयों और उपयुक्त अंतर्देशीय जल निकायों में लगभग 102.18 गीगावाट पीक (GWp) फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने की संभावना मौजूद है।

फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं जमीन पर स्थापित होने वाले सोलर प्लांट की तुलना में कई मायनों में लाभदायक मानी जाती हैं। क्योंकि इनमें भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होती है और जल निकायों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाता है।

इसके साथ ही, जल सतह पर सोलर पैनल लगाने से पानी के वाष्पीकरण में भी कमी आ सकती है। इससे जल संरक्षण को भी अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिलता है।

10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में आएगी कमी

पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार के अनुमान के अनुसार, इस योजना के माध्यम से हर साल लगभग 10 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है।

यह पहल भारत के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

इसके अलावा, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।

हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार का अवसर

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अनुमान के मुताबिक, इस योजना से लगभग 16,000 से 17,000 पूर्णकालिक समतुल्य रोजगार सृजित होंगे।

फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए कुशल तकनीकी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही सोलर पैनल, फ्लोटेशन सिस्टम और ऊर्जा भंडारण उपकरणों के निर्माण क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

इस योजना से घरेलू विनिर्माण को भी प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का उद्देश्य फ्लोटेशन सिस्टम, फोटोवोल्टिक सेल, सोलर मॉड्यूल और ऊर्जा भंडारण उपकरणों के उत्पादन को देश में बढ़ावा देना है।

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना का लाभ देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिल सकेगा। राज्य सरकारें और संबंधित संस्थाएं अपने जलाशयों एवं उपयुक्त जल निकायों का उपयोग करके फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं विकसित कर सकेंगी।

इससे उन क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जहां बड़े स्तर पर भूमि उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से बिजली आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

भारत की फ्लोटिंग सोलर क्षमता में होगा बड़ा विस्तार

वर्तमान में भारत की फ्लोटिंग सोलर क्षमता लगभग 700 मेगावाट है। प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के लागू होने के बाद इसे बढ़ाकर 5,000 मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

यह विस्तार भारत को वैश्विक स्तर पर फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में एक मजबूत स्थान दिलाने में मदद कर सकता है। साथ ही, यह योजना देश के हरित ऊर्जा अभियान को नई गति देगी।

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना 2026 भारत के ऊर्जा भविष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन जैसे कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

इसके माध्यम से भारत न केवल अपनी बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगा, बल्कि स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की ओर भी तेजी से कदम बढ़ाएगा। आने वाले वर्षों में यह योजना देश के अक्षय ऊर्जा मिशन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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