हरिद्वार से 50 किलो के घंटे वाली अनोखी कांवड़ लेकर संभल के लिए निकले शिवभक्त, हसनपुर में बना आकर्षण का केंद्र
रिपोर्ट – इकबाल अंसारी
अमरोहा: श्रावण मास में भगवान शिव की भक्ति और आस्था का अनूठा स्वरूप उस समय देखने को मिला, जब हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर 50 किलो के विशाल घंटे से सजी विशेष कांवड़ के साथ श्रद्धालुओं का 20 सदस्यीय जत्था संभल के लिए रवाना हुआ। यात्रा के दौरान जब यह दल अमरोहा जनपद के हसनपुर पहुंचा, तो स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस अनोखी कांवड़ को देखने के लिए उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ कांवड़ियों का स्वागत किया और “बोल बम” तथा “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया।
श्रावण मास में निकलने वाली कांवड़ यात्राएं हर वर्ष आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बनती हैं। हालांकि इस बार 50 किलो के विशाल घंटे वाली कांवड़ लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। रास्ते में जहां-जहां यह कांवड़ पहुंच रही है, वहां श्रद्धालु इसकी एक झलक पाने के लिए रुक रहे हैं।
हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकला 20 सदस्यीय जत्था
कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि उनका 20 सदस्यीय दल हरिद्वार स्थित गंगा धाम से पवित्र गंगाजल भरकर भगवान शिव को अर्पित करने के लिए संभल जा रहा है। यात्रा पूरी तरह धार्मिक आस्था, अनुशासन और सेवा भावना के साथ की जा रही है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि हर वर्ष वे कांवड़ यात्रा करते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी कांवड़ को विशेष स्वरूप देने के लिए 50 किलो का विशाल घंटा साथ रखा है, जिसे भगवान भोलेनाथ को समर्पित किया जाएगा।
50 किलो का घंटा बना यात्रा का मुख्य आकर्षण
इस कांवड़ यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण 50 किलो वजनी विशाल घंटा है। श्रद्धालुओं के अनुसार यह घंटा विशेष रूप से भगवान शिव को अर्पित करने के लिए तैयार कराया गया है। यात्रा के दौरान यह घंटा लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
रास्ते में कई स्थानों पर लोग कांवड़ के साथ तस्वीरें लेते नजर आए, वहीं अनेक श्रद्धालुओं ने कांवड़ियों का फूल-मालाओं से स्वागत भी किया।
हसनपुर में श्रद्धालुओं ने किया भव्य स्वागत
अमरोहा के हसनपुर पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने कांवड़ियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। जगह-जगह जलपान, विश्राम और सेवा की व्यवस्था भी देखने को मिली।
श्रद्धालुओं ने बताया कि श्रावण मास में कांवड़ियों की सेवा करना भी भगवान शिव की पूजा का ही एक स्वरूप माना जाता है। यही कारण है कि मार्ग में कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं लगातार सेवा कार्य कर रही हैं।
सोमवार को होगा भगवान शिव का जलाभिषेक
कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालु हरीश ने बताया कि पूरा दल सोमवार को संभल पहुंचेगा। वहां विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा।
इसके साथ ही 50 किलो का विशाल घंटा भी भगवान भोलेनाथ को अर्पित किया जाएगा। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और सामूहिक भक्ति का प्रतीक भी है।
रास्ते भर गूंजते रहे भोलेनाथ के जयकारे
पूरी यात्रा के दौरान “बोल बम”, “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष लगातार सुनाई देते रहे। श्रद्धालु भक्ति गीतों के साथ आगे बढ़ते रहे, जिससे पूरे मार्ग का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों ने भी कांवड़ियों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें शुभकामनाएं दीं। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं को फल, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
श्रावण मास में बढ़ता है कांवड़ यात्रा का महत्व
हिंदू धर्म में श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस महीने में लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, सुल्तानगंज और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमों के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अनोखी कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र
हर वर्ष कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु अपनी आस्था को अलग-अलग स्वरूप में प्रस्तुत करते हैं। कोई आकर्षक सजावट वाली कांवड़ लेकर निकलता है तो कोई सामाजिक संदेश देने वाली कांवड़ तैयार करता है। इसी क्रम में इस बार 50 किलो के घंटे वाली कांवड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
विशेष रूप से युवाओं और बच्चों में इस अनोखी कांवड़ को लेकर उत्साह देखने को मिला। कई लोगों ने इसे अपनी आस्था और भक्ति की अनूठी अभिव्यक्ति बताया।
आस्था और सेवा का अद्भुत संगम
कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सहयोग, अनुशासन और सेवा भावना का भी संदेश देती है। यात्रा मार्ग पर हजारों स्वयंसेवक और सामाजिक संगठन कांवड़ियों की सेवा में जुटे रहते हैं।
यह परंपरा समाज में सहयोग, सद्भाव और धार्मिक आस्था को मजबूत करने का कार्य भी करती है।
हरिद्वार से संभल के लिए निकला 20 सदस्यीय कांवड़ियों का जत्था अपनी 50 किलो के घंटे वाली अनोखी कांवड़ के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अमरोहा के हसनपुर में श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया गया। सोमवार को संभल पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने और 50 किलो का विशाल घंटा अर्पित करने की तैयारी है। श्रावण मास में यह अनूठी कांवड़ यात्रा श्रद्धा, भक्ति और भारतीय धार्मिक परंपराओं की जीवंत मिसाल बनकर सामने आई है।

