कानपुर में पेड़ की छांव तले लगी पोषण पंचायत, डीएम ने कुपोषण मुक्त पंचायत का दिया संदेश
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: जिले के विकासखंड सरसौल की ग्राम पंचायत हाथीपुर में शनिवार को एक अनोखे वातावरण में पोषण पंचायत का आयोजन किया गया। प्राथमिक विद्यालय परिसर में पेड़ की छांव तले आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को कुपोषण से बचाव, संतुलित आहार, स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
संभव अभियान-6 के अंतर्गत आयोजित इस पोषण पंचायत की अध्यक्षता जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने की। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों और बच्चों के अभिभावकों को पोषण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य गांव को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में लोगों को जागरूक करना रहा।
कुपोषण जागरूकता की कमी का परिणाम: डीएम
पोषण पंचायत के दौरान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने कहा कि कुपोषण केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि कई बार यह सही जानकारी और जागरूकता के अभाव का परिणाम होता है।
उन्होंने कहा कि यदि लोग अपने दैनिक भोजन में स्थानीय फल, हरी सब्जियां, मोटे अनाज और पारंपरिक पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें तो कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
डीएम ने कहा कि प्रकृति और स्वास्थ्य का गहरा संबंध है। जब हमारा खान-पान बेहतर होगा और पर्यावरण स्वस्थ रहेगा, तभी समाज भी स्वस्थ दिशा में आगे बढ़ सकेगा।
महिलाओं को बनाया जाएगा पोषण अभियान का नेतृत्वकर्ता
जिलाधिकारी ने कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं से विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार के स्वास्थ्य की मुख्य आधार होती हैं, इसलिए उन्हें पोषण संबंधी जानकारी का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक महिला पोषण अभियान की संदेशवाहक बन सकती है। वह अपने परिवार के साथ-साथ गांव के अन्य लोगों को भी संतुलित भोजन, स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर सकती है।
इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं से शासन की पोषण और स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लेने की अपील की।
स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने की अपील
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण और पोषण संबंधी सलाह अपनाकर एनीमिया और कुपोषण की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध सभी सेवाओं का लाभ उठाएं और किसी भी स्वास्थ्य समस्या को नजरअंदाज न करें।
स्तनपान के महत्व पर भी दी गई जानकारी
जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रीति सिन्हा ने कहा कि स्वच्छता, संतुलित आहार और सही खान-पान की आदतें कुपोषण से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं।
उन्होंने बताया कि 1 से 8 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को स्तनपान के महत्व और नवजात शिशुओं के बेहतर पोषण को लेकर जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जन्म के बाद शुरुआती समय में शिशु के लिए मां का दूध बेहद महत्वपूर्ण होता है और इससे बच्चे के बेहतर विकास में सहायता मिलती है।
बच्चों और किशोरियों के पोषण पर जोर
बाल विकास परियोजना अधिकारी सुरजीत सिंह ने कहा कि कुपोषण कोई बीमारी नहीं, बल्कि जागरूकता और सही पोषण की कमी से उत्पन्न होने वाली स्थिति है।
उन्होंने कहा कि जन्म से पांच वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के पोषण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी बताया कि कुपोषण का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह देश के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी प्रभावित कर सकता है।
आधुनिक तकनीक से हुई हीमोग्लोबिन जांच
पोषण पंचायत के दौरान विटामिन एंजेल्स संस्था की ओर से विशेष तकनीक के माध्यम से हीमोग्लोबिन जांच की गई। इस आधुनिक मशीन की मदद से बिना रक्त का नमूना लिए लोगों की एनीमिया स्थिति का प्रारंभिक आकलन किया गया।
वहीं, आंगनबाड़ी कार्यकत्री सुमन यादव ने पोषण भावगीत प्रस्तुत कर लोगों को जागरूक किया। गीत के माध्यम से संतुलित आहार और स्वास्थ्य के महत्व का संदेश दिया गया।
सवायजपुर में भी आयोजित हुई पोषण पंचायत
इसी क्रम में विकासखंड सरसौल की ग्राम पंचायत सवायजपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में भी पोषण पंचायत आयोजित की गई। यहां मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन की मौजूदगी में कार्यक्रम हुआ।
इस दौरान उन्होंने गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और छह माह पूर्ण कर चुके शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार कराया। उन्होंने कहा कि पोषण पंचायत का मुख्य उद्देश्य लोगों में कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़े व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना है।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे से ही मजबूत समाज का निर्माण संभव है।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
हाथीपुर में आयोजित पोषण पंचायत कार्यक्रम में मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, एडीओ पंचायत, ग्राम प्रधान मोहन सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
कानपुर प्रशासन की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को सही खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी आदतों के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे कुपोषण मुक्त समाज के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

