वृंदावन प्रियाकांत जू मंदिर में 1.71 लाख पार्थिव शिवलिंगों का अभिषेक, देवकीनंदन महाराज ने दिया संदेश

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

वृंदावन: ठा. श्री प्रियाकान्तजु मंदिर में आयोजित पार्थिव शिवलिंग महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हो रहा है। महोत्सव के दूसरे दिन शिवभक्तों ने बड़ी संख्या में पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का पंचामृत अभिषेक किया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शिव आराधना का विशेष आयोजन हुआ।

महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने कुल 1 लाख 71 हजार पार्थिव शिवलिंग बनाए। इसके बाद विधि-विधान से भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया गया और पार्थिव शिवलिंगों का धार्मिक परंपराओं के अनुसार विसर्जन संपन्न हुआ। पूरे आयोजन में भक्तों ने श्रद्धा और आस्था के साथ भाग लिया।

वैदिक मंत्रों के साथ हुआ शिव पूजन

प्रियाकान्त जू मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वातावरण शिव भक्ति से ओतप्रोत नजर आया। विद्वान आचार्यों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए पूजा-अर्चना कराई। पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल सहित अन्य पूजन सामग्री का प्रयोग किया गया।

इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से सुख, शांति और लोक कल्याण की कामना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पार्थिव शिवलिंग पूजन को भगवान शिव की विशेष आराधना माना जाता है। इसी भावना के साथ भक्तों ने इस आयोजन में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

शिव प्रेम, करुणा और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं: देवकीनंदन महाराज

इस अवसर पर कथा व्यास देवकीनंदन महाराज ने महाशिवपुराण कथा का श्रवण कराते हुए भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव केवल आराधना के देवता ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को प्रेम, करुणा, क्षमा और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष को संसार की रक्षा के लिए ग्रहण किया था। इसी कारण उन्हें नीलकंठ महादेव कहा जाता है। देवकीनंदन महाराज ने कहा कि शिव का संदेश त्याग, सेवा और मानव कल्याण का है। इसलिए भगवान शिव के नाम पर किसी भी प्रकार के नशे या गलत प्रवृत्तियों का समर्थन करना उचित नहीं है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान शिव के आदर्शों को जीवन में अपनाने की अपील की। साथ ही कहा कि शिव भक्ति का वास्तविक अर्थ मानवता, सदाचार और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाना है।

सनातनी समाज की शक्ति है एकता और संस्कृति

देवकीनंदन महाराज ने समाज में एकता और आपसी सहयोग का संदेश देते हुए कहा कि सनातनी समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत है।

उन्होंने कहा कि सभी लोगों को आपसी मतभेद, जाति, भाषा, क्षेत्र और छोटे-छोटे विवादों से ऊपर उठकर समाज की मजबूती के लिए कार्य करना चाहिए। जब समाज संगठित रहता है, तभी वह अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण बेहतर तरीके से कर सकता है।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक परंपराएं समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं। ऐसे धार्मिक आयोजन लोगों में आपसी प्रेम, सहयोग और सद्भाव की भावना को मजबूत करते हैं।

श्रद्धालुओं ने लिया धार्मिक आयोजन में भाग

पार्थिव शिवलिंग महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। भक्तों ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर परिवार और समाज के कल्याण की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहा।

इससे पहले मुख्य यजमान सूरज देवी, सोनी मलिक, कायरा, डॉ. अनुराग शर्मा और कुमुदनी-सुधीर कुमार वर्मा ने व्यासपीठ पूजन किया। इसके बाद आरती कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

कार्यक्रम में मंदिर प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारी और अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। इनमें मंदिर प्रबंधक रवि रावत, गिरीश चंद्र जायसवाल, गजेंद्र सिंह, राजेंद्र शर्मा और रविंद्र शाह सहित कई लोग शामिल रहे।

धार्मिक आयोजनों से मजबूत होती है आध्यात्मिक परंपरा

प्रियाकान्त जू मंदिर में आयोजित पार्थिव शिवलिंग महोत्सव ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की आराधना और सनातन परंपराओं से जुड़ने का अवसर दिया। ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आपसी सद्भाव का संदेश भी देते हैं।

वहीं, देवकीनंदन महाराज के संदेश ने श्रद्धालुओं को शिव के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का मार्ग मानव सेवा, प्रेम और कल्याण का मार्ग है, जिसे अपनाकर समाज को बेहतर दिशा दी जा सकती है।

प्रियाकान्त जू मंदिर में चल रहे इस धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। भक्तों का मानना है कि ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रम समाज में धर्म, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं।