E20 फ्यूल विवाद: केजरीवाल ने उठाए सवाल, पेट्रोल पंप पर ग्राहकों को विकल्प देने की मांग

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रिपोर्ट- अमित सिंह यादव

नई दिल्ली। E20 फ्यूल को लेकर देश में चल रही बहस अब राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनती जा रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने 1 अगस्त को E20 ईंधन के मुद्दे पर नेशनल टाउनहॉल का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति पर सवाल उठाए और ग्राहकों को पेट्रोल खरीदने का विकल्प देने की मांग की।

केजरीवाल ने कहा कि देश के वाहन मालिकों को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वे अपनी जरूरत और वाहन की क्षमता के अनुसार E20 या सामान्य पेट्रोल में से किसी एक का चुनाव कर सकें। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब नागरिकों के सामने कई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं, तो E20 फ्यूल को अनिवार्य रूप से क्यों लागू किया जा रहा है।

AAP की तीन प्रमुख मांगें

नेशनल टाउनहॉल के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल ने E20 फ्यूल को लेकर तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल लोगों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर ये मांगें सामने आई हैं।

पहली मांग के तहत उन्होंने कहा कि पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को विकल्प मिलना चाहिए। जो लोग E20 ईंधन खरीदना चाहते हैं, वे इसे खरीद सकें, जबकि जो वाहन मालिक सामान्य पेट्रोल इस्तेमाल करना चाहते हैं, उनके लिए भी विकल्प उपलब्ध होना चाहिए।

दूसरी मांग में उन्होंने कहा कि E20 ईंधन की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम होनी चाहिए, क्योंकि इसमें पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिलाया जाता है।

वहीं, तीसरी मांग के रूप में उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को देखते हुए पेट्रोल की खुदरा कीमत कम होनी चाहिए।

E20 फ्यूल को लेकर वाहन मालिकों की चिंताएं

E20 फ्यूल यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल के मिश्रण को लेकर देश में अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। सरकार जहां इसे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं कुछ वाहन मालिक और विशेषज्ञ इसके प्रभाव को लेकर चिंता जता रहे हैं।

AAP के कार्यक्रम में शामिल कुछ वाहन मालिकों और मैकेनिकों ने दावा किया कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से कुछ पुराने वाहनों में माइलेज कम होने और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

हालांकि, वाहन विशेषज्ञों का कहना है कि E20 का प्रभाव वाहन के मॉडल, इंजन की तकनीक और उसके रखरखाव पर भी निर्भर करता है। इसलिए वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी की क्षमता और निर्माता कंपनी के निर्देशों को ध्यान में रखना चाहिए।

केजरीवाल ने इथेनॉल नीति पर उठाए सवाल

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर इथेनॉल किसी भी स्तर पर लाभकारी नहीं है, तो सरकार इसे बढ़ावा क्यों दे रही है। उन्होंने दावा किया कि इथेनॉल के कारण कई लोगों को परेशानी हो रही है।

उन्होंने कहा कि इथेनॉल से पेट्रोल की तुलना में ज्यादा लागत, कम माइलेज और वाहन संबंधी समस्याओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके अलावा उन्होंने इथेनॉल उत्पादन केंद्रों के आसपास पर्यावरण और भूजल से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।

केजरीवाल ने सरकार से मांग की कि इस नीति को लागू करने से पहले व्यापक स्तर पर अध्ययन और विशेषज्ञों की राय को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

सरकार पर लगाए नीतिगत सवाल

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि E20 नीति को लागू करने से पहले पर्याप्त अध्ययन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार अलग-अलग मंचों पर अलग-अलग आंकड़े पेश कर रही है।

उन्होंने कहा कि लोगों की आशंकाओं को दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी ईंधन नीति को लागू करते समय आम नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

ऑनलाइन याचिका का भी किया जिक्र

आम आदमी पार्टी ने इससे पहले प्रधानमंत्री को संबोधित एक ऑनलाइन याचिका शुरू की थी। पार्टी का दावा है कि इस याचिका पर बड़ी संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं।

AAP के अनुसार, टाउनहॉल कार्यक्रम के बाद यह याचिका प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। पार्टी का कहना है कि इसका उद्देश्य सरकार तक वाहन मालिकों की चिंताओं को पहुंचाना है।

E20 नीति पर सरकार का पक्ष

दूसरी ओर, केंद्र सरकार लगातार E20 फ्यूल को ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और कृषि क्षेत्र से जुड़े अवसरों के रूप में पेश करती रही है। सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, सरकार का तर्क है कि इथेनॉल उत्पादन से किसानों को भी नए बाजार मिल सकते हैं और देश में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा मिलेगा।

आगे बढ़ेगी E20 पर बहस

E20 फ्यूल को लेकर चल रही बहस आने वाले समय में भी जारी रहने की संभावना है। जहां एक तरफ सरकार इसे भविष्य की ऊर्जा नीति का हिस्सा बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और कुछ वाहन मालिक इसके प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

ऐसे में जरूरी है कि इस विषय पर वैज्ञानिक अध्ययन, विशेषज्ञों की राय और आम उपभोक्ताओं के अनुभवों के आधार पर संतुलित चर्चा हो। क्योंकि ईंधन नीति का सीधा असर देश के करोड़ों वाहन मालिकों और आम जनता पर पड़ता है।

E20 फ्यूल विवाद ने एक बार फिर ऊर्जा नीति, पर्यावरण और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर बहस तेज कर दी है। अब देखना होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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