सीएसजेएमयू कानपुर में समाज कार्य विभाग की विशेषज्ञ व्याख्यान श्रृंखला हुई शुरू, दिव्यांग समावेशन पर हुई सार्थक चर्चा

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रिपोर्ट – अतुल त्रिपाठी 

कानपुर: विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें सामाजिक जीवन की वास्तविक चुनौतियों और व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने की दिशा में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर के समाज कार्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विभाग ने विशेषज्ञ व्याख्यान एवं कार्यशाला श्रृंखला की शुरुआत की है, जिसके माध्यम से समाज कार्य के विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों की गहरी समझ विकसित कराना है।

समाज कार्य विभाग की इस नई श्रृंखला के अंतर्गत उद्योग जगत, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), सामुदायिक आधारित संगठन (सीबीओ) तथा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) से जुड़े विशेषज्ञों को समय-समय पर आमंत्रित किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि समाज कार्य केवल एक शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रभावी माध्यम भी है।

पहले व्याख्यान में सामाजिक विकास और दिव्यांग समावेशन पर हुई चर्चा

इस व्याख्यान श्रृंखला का पहला कार्यक्रम “सामाजिक विकास में एकरूपता का मिथक” विषय पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता देहरादून स्थित साहस फाउंडेशन के संस्थापक एवं सामाजिक उद्यमी श्री शहाब नक़्वी रहे। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर समाज में दिव्यांगता को लेकर प्रचलित धारणाओं, चुनौतियों और समावेशी विकास की आवश्यकता पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।

उन्होंने कहा कि समाज में आज भी दिव्यांग व्यक्तियों को अलग दृष्टि से देखा जाता है, जबकि वे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। यदि समाज वास्तव में समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है, तो सबसे पहले उसे अपनी सोच और व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा।

विशेष विद्यालयों की अवधारणा पर उठाए महत्वपूर्ण सवाल

अपने व्याख्यान के दौरान श्री शहाब नक़्वी ने विशेष विद्यालयों (स्पेशल स्कूल) की व्यवस्था पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब किसी दिव्यांग बच्चे को सामान्य सामाजिक वातावरण से अलग विशेष विद्यालय में भेजा जाता है, तब अनजाने में उसे समाज से अलग-थलग कर दिया जाता है।

उनके अनुसार, ऐसा बच्चा उसी वातावरण को अपनी पूरी दुनिया मान लेता है। परिणामस्वरूप जब वह आगे चलकर सामान्य समाज के बीच आता है, तब उसे सामाजिक समायोजन में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए उन्होंने समावेशी शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 का किया उल्लेख

व्याख्यान के दौरान श्री नक़्वी ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस कानून का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना तथा उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि अधिनियम के अनुसार बिना जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति के किसी भी बच्चे को परिवार से अलग नहीं रखा जा सकता। इसके बावजूद कई संपन्न परिवार अपने दिव्यांग बच्चों को बोर्डिंग स्कूलों में भेज देते हैं। उन्होंने इस विषय पर व्यापक सामाजिक संवाद की आवश्यकता बताते हुए कहा कि कानून की जानकारी और जागरूकता बढ़ाना समय की मांग है।

आधुनिक कौशल प्रशिक्षण पर दिया विशेष जोर

श्री नक़्वी ने अपने संबोधन में दिव्यांगजनों के कौशल विकास पर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से दिव्यांग व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर लिफाफा निर्माण, मोमबत्ती निर्माण जैसे पारंपरिक प्रशिक्षण दिए जाते रहे हैं। हालांकि वर्तमान समय में इन कौशलों से स्थायी आजीविका प्राप्त करना काफी कठिन हो चुका है।

उन्होंने सुझाव दिया कि अब समय की आवश्यकता के अनुसार दिव्यांगजनों को डिजिटल तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी, संचार, डिज़ाइन, ऑनलाइन सेवाओं तथा अन्य समसामयिक रोजगारोन्मुख कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इससे वे प्रतिस्पर्धी वातावरण में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

विद्यार्थियों को मिलेगा व्यावहारिक अनुभव

कार्यक्रम के दौरान समाज कार्य विभाग के डॉ. सत्येन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि विशेषज्ञ व्याख्यान श्रृंखला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी। उन्होंने बताया कि कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान तभी प्रभावी बनता है, जब उसे वास्तविक परिस्थितियों और सामाजिक अनुभवों से जोड़ा जाए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से विद्यार्थियों में सामाजिक समस्याओं को समझने की क्षमता विकसित होगी तथा वे समाज के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बनेंगे।

डीन ने बताया समय की आवश्यकता

इस अवसर पर डीन प्रो. संदीप कुमार सिंह ने कहा कि दिव्यांगता के संबंध में समाज में कई प्रकार के मिथक और पूर्वाग्रह आज भी मौजूद हैं। इन्हें दूर करने के लिए निरंतर संवाद और जागरूकता आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि श्री शहाब नक़्वी जैसे अनुभवी सामाजिक उद्यमियों के विचार विद्यार्थियों को नई सोच प्रदान करेंगे तथा उन्हें समावेशी समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेंगे।

स्कूल ऑफ आर्ट्स के निदेशक ने की पहल की सराहना

स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के निदेशक डॉ. अमित कुमार ने समाज कार्य विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों का क्षेत्र विशेषज्ञों से सीधा संवाद उनके समग्र व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें सामाजिक चुनौतियों, समाधान और व्यवहारिक अनुभवों से भी परिचित कराते हैं। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी स्कूल की ओर से ऐसे शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रमों को पूरा सहयोग दिया जाएगा।

आगे भी जारी रहेगी विशेषज्ञ व्याख्यान श्रृंखला

समाज कार्य विभाग ने स्पष्ट किया कि यह व्याख्यान श्रृंखला भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को आमंत्रित कर विद्यार्थियों को सामाजिक विकास, सामुदायिक सहभागिता, नीति निर्माण, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व तथा अन्य समकालीन विषयों की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

कार्यक्रम में विभाग के डॉ. अजय प्रताप, डॉ. सत्य प्रकाश, डॉ. उर्वशी, सुश्री बुशरा सहित अनेक शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।

सीएसजेएमयू का यह प्रयास उच्च शिक्षा को व्यवहारिक अनुभवों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि विद्यार्थी शिक्षा के साथ समाज की वास्तविक परिस्थितियों को भी समझेंगे, तो वे भविष्य में अधिक संवेदनशील, जिम्मेदार और प्रभावी समाज कार्यकर्ता बन सकेंगे। साथ ही, दिव्यांग समावेशन और समान अवसर जैसे विषयों पर ऐसे संवाद समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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