ऑटो-लोडर चालकों ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी, मांगें पूरी न होने पर सरकार के खिलाफ होगा बड़ा प्रदर्शन
रिपोर्ट – विवेक कृष्ण दीक्षित
कानपुर: उत्तर प्रदेश में ऑटो-लोडर, पिकअप और डाला वाहन चालकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर उत्तर प्रदेश ऑटो-लोडर संयुक्त कल्याण समिति ने सरकार और परिवहन विभाग को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन का कहना है कि लंबे समय से वाहन चालक और मालिक कई प्रशासनिक एवं व्यावहारिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनका स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
इसी क्रम में संगठन ने प्रदेश के विभिन्न मंडलों में अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने का अभियान शुरू किया है। समिति का कहना है कि ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक वाहन चालकों की वास्तविक समस्याएं पहुंचाई जा रही हैं, ताकि समय रहते उनका समाधान किया जा सके। हालांकि यदि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन प्रदेशभर में आंदोलन की रणनीति लागू करेगा।
गोंडा मंडल से शुरू हुआ ज्ञापन अभियान
उत्तर प्रदेश ऑटो-लोडर संयुक्त कल्याण समिति के संस्थापक राजीव जायसवाल ‘विक्की’ के नेतृत्व में 24 जुलाई को एक प्रतिनिधिमंडल गोंडा मंडल पहुंचा। वहां संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में ऑटो-लोडर, पिकअप और डाला वाहन चालकों एवं वाहन मालिकों से जुड़ी समस्याओं का विस्तार से उल्लेख किया गया। साथ ही परिवहन विभाग से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर शासन तक उनकी मांगें पहुंचाने का अनुरोध किया गया।
संगठन का कहना है कि यह अभियान केवल गोंडा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के सभी मंडलों में इसी प्रकार ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
कानपुर लौटकर मीडिया से साझा की रणनीति
गोंडा दौरे से लौटने के बाद कानपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए समिति के संस्थापक राजीव जायसवाल ‘विक्की’ ने कहा कि संगठन प्रदेशभर के वाहन चालकों की समस्याओं को एकजुट होकर उठा रहा है।
उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग और शासन के समक्ष लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान होना आवश्यक है। यदि समय रहते इन पर निर्णय नहीं लिया गया तो हजारों वाहन चालक प्रदेशव्यापी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
क्या हैं ऑटो-लोडर चालकों की प्रमुख मांगें?
संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के समक्ष रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- एंट्री सिस्टम के नाम पर होने वाली कथित अवैध वसूली पर रोक लगाई जाए।
- 35 से 40 हजार रुपये तक के भारी-भरकम चालानों की समीक्षा की जाए।
- वाहन चालकों के उत्पीड़न की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।
- जांच के दौरान मोबाइल फोन जब्त करने जैसी कार्रवाई बंद की जाए।
- हल्के मालवाहक वाहनों के लिए नियमों में व्यावहारिक राहत दी जाए।
- परिवहन विभाग और वाहन संगठनों के बीच नियमित संवाद स्थापित कर स्थायी समाधान निकाला जाए।
संगठन का कहना है कि इन मांगों का उद्देश्य नियमों का विरोध करना नहीं, बल्कि वाहन चालकों के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान सुनिश्चित करना है।
वाहन चालकों की समस्याओं पर सरकार से हस्तक्षेप की मांग
राजीव जायसवाल ‘विक्की’ ने कहा कि ऑटो-लोडर और हल्के मालवाहक वाहन प्रदेश की परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हजारों परिवारों की आजीविका इन वाहनों पर निर्भर है। ऐसे में यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा तो इसका असर न केवल वाहन चालकों बल्कि छोटे व्यापारियों और आम लोगों पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि वाहन संगठनों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का व्यावहारिक और स्थायी समाधान निकाला जाए।
प्रदेशभर में जारी रहेगा ज्ञापन अभियान
संगठन के अनुसार, गोंडा मंडल के बाद अब अगला चरण प्रयागराज मंडल में शुरू होगा। वहां भी प्रतिनिधिमंडल आरटीओ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेगा और वाहन चालकों की समस्याओं से अवगत कराएगा।
इसके बाद क्रमवार प्रदेश के अन्य मंडलों में भी इसी प्रकार ज्ञापन दिए जाएंगे। संगठन का उद्देश्य पहले प्रशासनिक स्तर पर समाधान निकालना है, ताकि आंदोलन की स्थिति न बने।
मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी
संगठन ने कहा कि यदि ज्ञापन देने के बाद भी सरकार और परिवहन विभाग ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो प्रदेशभर के हजारों ऑटो-लोडर, पिकअप और डाला वाहन चालक संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन करेंगे।
हालांकि संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी पहली प्राथमिकता बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना है। आंदोलन का निर्णय केवल तभी लिया जाएगा, जब सभी प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आएगा।
संवाद से समाधान की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद और आपसी सहयोग से अधिक प्रभावी ढंग से निकाला जा सकता है। यदि वाहन संगठनों और परिवहन विभाग के बीच नियमित बैठकें हों, तो कई व्यावहारिक समस्याओं का समाधान समय रहते किया जा सकता है।
इसी दिशा में संगठन भी विभागीय अधिकारियों के साथ वार्ता की मांग कर रहा है, ताकि नियमों का पालन भी हो और वाहन चालकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना भी न करना पड़े।
व्यापार और परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ता है प्रभाव
ऑटो-लोडर और हल्के मालवाहक वाहन शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सामान की आपूर्ति की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और स्थानीय बाजारों की आपूर्ति व्यवस्था काफी हद तक इन्हीं वाहनों पर निर्भर रहती है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का समय पर समाधान होता है तो परिवहन व्यवस्था अधिक सुचारु बनी रह सकती है और छोटे कारोबारियों को भी राहत मिल सकती है।
उत्तर प्रदेश ऑटो-लोडर संयुक्त कल्याण समिति ने वाहन चालकों और मालिकों की समस्याओं को लेकर प्रदेशव्यापी अभियान शुरू किया है। संगठन फिलहाल विभिन्न मंडलों में ज्ञापन सौंपकर सरकार और परिवहन विभाग से संवाद के माध्यम से समाधान की मांग कर रहा है। हालांकि, यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो संगठन ने प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और परिवहन विभाग इन मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं।

