कानपुर के राजकीय पॉलिटेक्निक में बनेगा टाटा टेक्नोलॉजीज का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, तकनीकी शिक्षा को मिलेगी नई उड़ान

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत कानपुर के गुरुदेव चौराहा स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक में टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Centre of Excellence) स्थापित किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता को नई पहचान देगी, बल्कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों, उद्योग आधारित प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुख कौशल से भी जोड़ने का कार्य करेगी।

गुरुवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने निर्माणाधीन परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और समयसीमा की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कार्यदायी संस्था को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित समय के भीतर और उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

तकनीकी शिक्षा में नया अध्याय जोड़ने की तैयारी

राजकीय पॉलिटेक्निक कानपुर लंबे समय से प्रदेश के प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल रहा है। अब टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से बनने वाला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इस संस्थान को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के नए स्तर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस परियोजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक, तकनीकी और उद्योग आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। इसके परिणामस्वरूप छात्र-छात्राओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

706.75 लाख रुपये की लागत से तैयार होगी परियोजना

निरीक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, निर्माण खंड कानपुर-01 के अधिशासी अभियंता फराज़ असलम ने परियोजना की विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण 706.75 लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा है। निर्माण कार्य 21 मई 2026 से प्रारंभ हो चुका है और इसे 20 मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना के लिए पहली किश्त के रूप में 353.37 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से अब तक लगभग 86.38 लाख रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति लगभग पांच प्रतिशत है तथा फाउंडेशन और पेडेस्टल कास्टिंग का कार्य जारी है।

आधुनिक सुविधाओं से होगा सुसज्जित सेंटर

प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को जी प्लस टू प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अनेक आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इनमें शामिल होंगी—

  • अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं
  • आधुनिक तकनीकी वर्कशॉप
  • डिजिटल स्मार्ट प्रशिक्षण कक्ष
  • वीसैट स्टूडियो
  • स्किल डेवलपमेंट लैब
  • उद्योग आधारित प्रैक्टिकल प्रशिक्षण क्षेत्र
  • आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित प्रयोगात्मक शिक्षण व्यवस्था

इन सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण के अनुरूप प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

रोजगारोन्मुख शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

आज के समय में उद्योगों की मांग तेजी से बदल रही है। ऐसे में केवल पारंपरिक तकनीकी शिक्षा पर्याप्त नहीं मानी जाती। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जा रही है।

यहां विद्यार्थियों को नई तकनीकों, ऑटोमेशन, डिजिटलीकरण, आधुनिक मशीनों और उद्योगों में उपयोग होने वाली प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण मिलेगा। इससे उनके कौशल का विकास होगा और रोजगार प्राप्त करने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार होंगे विद्यार्थी

तकनीकी शिक्षा और उद्योगों के बीच समन्वय जितना बेहतर होगा, विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर भी उतने ही अधिक बढ़ेंगे। इसी उद्देश्य से टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से विकसित होने वाला यह सेंटर विद्यार्थियों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करेगा। इससे वे पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे आधुनिक औद्योगिक संस्थानों में कार्य करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे।

जिलाधिकारी ने दिए गुणवत्ता और समयबद्धता के निर्देश

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने और परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना केवल एक भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के युवाओं के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल है।

प्रदेश के अग्रणी संस्थानों में और मजबूत होगी पहचान

राजकीय पॉलिटेक्निक कानपुर पहले से ही प्रदेश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में अपनी पहचान रखता है। हालांकि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने के बाद संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता और भी मजबूत होगी।

आधुनिक प्रयोगशालाओं, उद्योग आधारित प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षण व्यवस्था के कारण यहां अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी शिक्षा के अनुरूप वातावरण मिलेगा।

स्किल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की परियोजनाएं स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को भी मजबूती प्रदान करती हैं। जब विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योग आधारित प्रशिक्षण मिलेगा, तब वे रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार की दिशा में भी बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे।

तकनीकी शिक्षा का भविष्य होगा और मजबूत

नई तकनीकों के दौर में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना समय की आवश्यकता बन चुकी है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी परियोजनाएं विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऑटोमेशन, डिजिटल इंजीनियरिंग और आधुनिक विनिर्माण तकनीकों के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह परियोजना प्रदेश के युवाओं के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।

कानपुर के राजकीय पॉलिटेक्निक में टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से बनने वाला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। लगभग 706.75 लाख रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना विद्यार्थियों को आधुनिक प्रयोगशालाओं, डिजिटल प्रशिक्षण, उद्योग आधारित कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह द्वारा निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता पर दिए गए निर्देश इस परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। आने वाले समय में यह सेंटर प्रदेश के तकनीकी शिक्षा संस्थानों के लिए एक नई मिसाल बन सकता है।

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