मुजफ्फरनगर में मुस्लिम कांवड़िया शाकिर की चर्चा, सिर पर टोपी और लबों पर बम-बम भोले

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मुस्लिम कांवड़िया शाकिर ने पेश की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

Digital UP News Desk

मुजफ्फरनगरः उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से कांवड़ यात्रा की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। यहां आस्था, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का अनोखा संगम देखने को मिला है। मेरठ के रहने वाले तीन दोस्तों ने हरिद्वार से 201 लीटर गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा शुरू की है। खास बात यह है कि इन तीन दोस्तों में मुस्लिम युवक शाकिर भी शामिल हैं, जो सिर पर टोपी पहनकर और जुबां पर “बम-बम भोले” का जयकारा लगाते हुए भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं।

श्रावण मास शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार पहुंचकर गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर निकल रहे हैं। इसी कड़ी में शाकिर और उनके दोस्तों की यह यात्रा धार्मिक एकता और आपसी भाईचारे का संदेश देती नजर आ रही है।


हरिद्वार से लेकर निकले 201 लीटर गंगाजल

जानकारी के मुताबिक, मेरठ निवासी तीन दोस्तों ने हरिद्वार पहुंचकर पवित्र गंगाजल लिया और उसे कांवड़ के रूप में लेकर यात्रा शुरू की। इस कांवड़ में 201 लीटर गंगाजल रखा गया है। यात्रा के दौरान मुस्लिम युवक शाकिर भी अपने दोस्तों के साथ पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ शामिल हैं।

शाकिर का कहना है कि भगवान के प्रति आस्था किसी एक धर्म तक सीमित नहीं होती। उन्होंने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर हर साल धार्मिक यात्राओं और सामाजिक आयोजनों में हिस्सा लेते हैं। उनके लिए यह यात्रा प्रेम, विश्वास और एकता का प्रतीक है।


सिर पर टोपी और मुंह से “बम-बम भोले” का जयकारा

मुजफ्फरनगर में जब यह कांवड़ यात्रा पहुंची तो लोगों की नजर शाकिर पर टिक गई। सिर पर टोपी लगाए और कांवड़ लेकर चलते शाकिर ने “बम-बम भोले” के जयकारे लगाए। यह दृश्य लोगों को गंगा-जमुनी तहजीब की याद दिला रहा है।

दरअसल, भारत की संस्कृति हमेशा से ही आपसी सम्मान और भाईचारे की मिसाल रही है। अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए कई मौकों पर एकता का संदेश देते रहे हैं। शाकिर की कांवड़ यात्रा भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाती दिखाई दे रही है।


कांवड़ यात्रा में दिखा सामाजिक सद्भाव का संदेश

कांवड़ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। हर साल लाखों शिवभक्त हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य धार्मिक स्थलों से गंगाजल लेकर अपने शिवालयों तक पहुंचते हैं।

वहीं, इस बार मुजफ्फरनगर में शाकिर की कांवड़ यात्रा ने लोगों के बीच एक सकारात्मक संदेश दिया है। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि समाज में आपसी प्रेम और सौहार्द बनाए रखने का संदेश भी देती है।

इसके अलावा, सोशल मीडिया पर भी शाकिर की तस्वीरें और वीडियो चर्चा का विषय बने हुए हैं। लोग उनके इस कदम की सराहना करते हुए इसे भाईचारे और एकता की मिसाल बता रहे हैं।


आस्था और इंसानियत का खूबसूरत मेल

भारत में धार्मिक विविधता के बावजूद एकता की भावना हमेशा मजबूत रही है। यहां अलग-अलग समुदायों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों और परंपराओं में शामिल होते रहे हैं।

शाकिर की कांवड़ यात्रा इसी भावना को दर्शाती है। उनका कहना है कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और सम्मान उनके दिल में है। उन्होंने यह भी संदेश दिया कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है और सभी लोगों को मिल-जुलकर रहना चाहिए।

इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है और लोगों को आपसी प्रेम व सम्मान के साथ रहने की प्रेरणा देती है।


मुजफ्फरनगर में बनी चर्चा का विषय

मुजफ्फरनगर में जैसे ही लोगों को मुस्लिम युवक शाकिर के कांवड़ यात्रा में शामिल होने की जानकारी मिली, वह चर्चा का विषय बन गया। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बताया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी तस्वीरें समाज को जोड़ने का काम करती हैं। जहां एक ओर कई बार धर्म के नाम पर दूरी बढ़ाने की कोशिश की जाती है, वहीं दूसरी ओर शाकिर जैसे लोग अपने कार्यों से प्रेम और एकता का संदेश देते हैं।


कांवड़ यात्रा में बढ़ता भाईचारे का संदेश

कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ी परंपरा है। इस यात्रा में शामिल हर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान शिव का स्मरण करता है।

ऐसे में मुस्लिम युवक शाकिर का कांवड़ यात्रा में शामिल होना यह दिखाता है कि धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता साथ-साथ चल सकती है। यह घटना उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव और आपसी सम्मान की भावना को बढ़ावा देना चाहते हैं।


मुजफ्फरनगर में मुस्लिम कांवड़िया शाकिर की यात्रा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत की असली पहचान उसकी विविधता में छिपी एकता है। सिर पर टोपी और लबों पर “बम-बम भोले” का जयकारा लगाते हुए शाकिर ने भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया है।

हरिद्वार से 201 लीटर गंगाजल लेकर निकली यह कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रेम, विश्वास और इंसानियत की खूबसूरत मिसाल भी है। ऐसी तस्वीरें समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और लोगों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने की प्रेरणा देती हैं।

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