Indian Railways की नई पहल: TTE के Body Worn Camera से होगी टिकट जांच, विवादों पर लगेगी लगाम
रिपोर्ट-हरिशंकर शर्मा
कानपुर। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और टिकट चेकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। अब ट्रेन में टिकट जांच करने वाले टीटीई (Traveling Ticket Examiner) बॉडी वॉर्न कैमरे से लैस होंगे। इस तकनीक के माध्यम से टिकट चेकिंग के दौरान होने वाली हर गतिविधि कैमरे में रिकॉर्ड होगी, जिससे यात्रियों और टीटीई के बीच होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।
रेलवे की यह पहल खास तौर पर उन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है, जब टिकट जांच के दौरान यात्रियों और टीटीई के बीच किसी तरह का विवाद खड़ा हो जाता है। ऐसे मामलों में अक्सर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जाते हैं, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के कारण सही स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती। अब बॉडी वॉर्न कैमरे में रिकॉर्ड होने वाली वीडियो फुटेज किसी भी जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य का काम करेगी।
प्रयागराज एक्सप्रेस और श्रमशक्ति एक्सप्रेस में शुरू हुआ ट्रायल
उत्तर मध्य रेलवे ने इस व्यवस्था की शुरुआत फिलहाल दो प्रमुख ट्रेनों से की है। इनमें प्रयागराज एक्सप्रेस और श्रमशक्ति एक्सप्रेस शामिल हैं। इन ट्रेनों में तैनात टीटीई अब टिकट चेकिंग के दौरान बॉडी वॉर्न कैमरे पहनकर अपनी ड्यूटी करेंगे।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, शुरुआत में दोनों ट्रेनों के लिए टीटीई की विशेष टीम बनाई गई है। प्रत्येक ट्रेन में 6-6 टीटीई की टीम बॉडी वॉर्न कैमरे के साथ यात्रियों के टिकटों की जांच करेगी। इसके बाद इस व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी और सफलता मिलने पर इसे अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जा सकता है।
टिकट जांच प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता
ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के बीच कई बार टिकट चेकिंग को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ यात्री टीटीई पर अतिरिक्त पैसे मांगने या गलत व्यवहार करने का आरोप लगाते हैं। वहीं दूसरी ओर टीटीई भी कई बार यात्रियों के व्यवहार को लेकर शिकायत करते हैं।
ऐसी स्थिति में बॉडी वॉर्न कैमरा दोनों पक्षों के लिए सुरक्षा का काम करेगा। कैमरे में रिकॉर्ड होने वाली पूरी बातचीत और गतिविधियां जांच के दौरान वास्तविक स्थिति सामने लाने में मदद करेंगी। इससे गलत आरोपों से बचाव होगा और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई भी की जा सकेगी।
आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति में रिकॉर्डिंग बनेगी सबूत
रेलवे की इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी भी विवाद की स्थिति में केवल मौखिक शिकायतों के आधार पर निर्णय नहीं लेना पड़ेगा। बल्कि कैमरे में कैद रिकॉर्डिंग को जांच प्रक्रिया में शामिल किया जा सकेगा।
इसके अलावा, यह व्यवस्था टीटीई को भी ड्यूटी के दौरान अधिक जिम्मेदारी और सावधानी के साथ काम करने के लिए प्रेरित करेगी। वहीं यात्रियों को भी यह भरोसा मिलेगा कि टिकट जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से हो रही है।
डिप्टी सीटीएम ने दी जानकारी
उत्तर मध्य रेलवे के डिप्टी सीटीएम आकांशु गोविल ने बताया कि फिलहाल दो ट्रेनों में बॉडी वॉर्न कैमरे की व्यवस्था शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य टिकट चेकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और बेहतर बनाना है।
उन्होंने बताया कि आने वाले समय में इस व्यवस्था को अन्य ट्रेनों में भी लागू करने की योजना है। रेलवे लगातार ऐसी तकनीकों को बढ़ावा दे रहा है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और रेलवे सेवाओं में विश्वास बढ़े।
डिजिटल तकनीक से बदल रही रेलवे की कार्यप्रणाली
भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर लगातार जोर दे रहा है। टिकट बुकिंग से लेकर स्टेशन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था तक कई क्षेत्रों में नई तकनीकों को शामिल किया जा रहा है।
इसी क्रम में टीटीई को बॉडी वॉर्न कैमरे उपलब्ध कराना भी रेलवे की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे न केवल टिकट जांच व्यवस्था में सुधार आएगा, बल्कि यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल भी स्थापित होगा।
भविष्य में अन्य ट्रेनों में भी लागू हो सकती है व्यवस्था
फिलहाल यह योजना शुरुआती चरण में है और दो ट्रेनों में इसका परीक्षण किया जा रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो रेलवे आने वाले समय में अधिक से अधिक ट्रेनों में टीटीई को बॉडी वॉर्न कैमरे उपलब्ध करा सकता है।
हालांकि, इस व्यवस्था का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में सामने आएगा। लेकिन शुरुआती तौर पर रेलवे की यह पहल यात्रियों और कर्मचारियों दोनों के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
भारतीय रेलवे द्वारा टीटीई को बॉडी वॉर्न कैमरे से लैस करना टिकट चेकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रयागराज एक्सप्रेस और श्रमशक्ति एक्सप्रेस से शुरू हुई यह व्यवस्था यदि सफल रहती है, तो भविष्य में पूरे रेलवे नेटवर्क में इसे लागू किया जा सकता है। इससे यात्रियों का विश्वास बढ़ेगा और टिकट जांच से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है।

