देश में तेजी से बढे साइबर ठगी के मामले, सरकार ने संसद में साझा किए आंकड़े; जानिए बचाव के लिए क्या हैं नई व्यवस्थाएं
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: देश में डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ साइबर अपराध के मामलों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। सरकार ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2020 की तुलना में 2024 में साइबर ठगी के मामलों की संख्या लगभग तीन गुना हो गई है। सरकार के अनुसार, इस अवधि में सबसे अधिक साइबर अपराध के मामले तेलंगाना में दर्ज किए गए हैं। हालांकि, बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने कई नई व्यवस्थाएं भी विकसित की हैं, जिनका उद्देश्य नागरिकों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराना और वित्तीय नुकसान को कम करना है।
सरकार ने सदन में यह भी स्पष्ट किया कि साइबर अपराध केवल तकनीकी चुनौती नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस दिशा में लगातार काम कर रही हैं।
चार वर्षों में तेजी से बढ़े साइबर अपराध
राज्यसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 की तुलना में वर्ष 2024 तक साइबर ठगी के मामलों में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के व्यापक उपयोग के कारण साइबर अपराधियों को नए अवसर मिल रहे हैं।
हालांकि, सरकार का कहना है कि बढ़ती जागरूकता के कारण अब पहले की तुलना में अधिक लोग साइबर अपराध की शिकायत भी दर्ज करा रहे हैं, जिससे मामलों की संख्या में वृद्धि दिखाई दे रही है।
तेलंगाना में सबसे अधिक मामले दर्ज
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में सबसे अधिक साइबर ठगी के मामले तेलंगाना राज्य में दर्ज किए गए। इसके अलावा अन्य राज्यों में भी ऑनलाइन धोखाधड़ी, बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाएं, सोशल मीडिया ठगी और डिजिटल भुगतान से जुड़े अपराधों में वृद्धि देखी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महानगरों और तेजी से डिजिटल हो रहे क्षेत्रों में साइबर अपराध की संभावना अधिक रहती है। इसलिए नागरिकों को ऑनलाइन लेनदेन के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
I4C की स्थापना से मिली नई ताकत
साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए गृह मंत्रालय ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की स्थापना की है। यह केंद्र देशभर में साइबर अपराध से जुड़ी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने, जांच को मजबूत बनाने और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का कार्य करता है।
इसके अलावा I4C साइबर अपराध के नए तरीकों का विश्लेषण कर राज्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी उपलब्ध कराता है।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल
सरकार ने नागरिकों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल भी विकसित किया है। इस पोर्टल के माध्यम से कोई भी नागरिक ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया अपराध, पहचान चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी या अन्य साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज करा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को सरल बनाना और पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना है।
फाइनेंशियल फ्रॉड रोकने के लिए विशेष सिस्टम
वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System शुरू किया। इस प्रणाली का उद्देश्य वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की सूचना मिलते ही संबंधित बैंक और वित्तीय संस्थानों को तुरंत अलर्ट भेजना है।
यदि पीड़ित समय पर शिकायत दर्ज कर देता है, तो कई मामलों में संदिग्ध खाते में पहुंची राशि को आगे ट्रांसफर होने से रोकने का प्रयास किया जाता है। इससे आर्थिक नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।
साइबर अपराध कैसे होते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते हैं। इनमें फर्जी बैंक कॉल, OTP साझा कराने की कोशिश, नकली निवेश योजनाएं, सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल, QR कोड फ्रॉड, फर्जी नौकरी के ऑफर, डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी और फिशिंग लिंक प्रमुख हैं।
इसके अलावा साइबर अपराधी मोबाइल ऐप, ईमेल और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास भी करते हैं।
नागरिक कैसे रहें सुरक्षित?
साइबर विशेषज्ञ नागरिकों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं—
- किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, PIN, CVV या बैंक पासवर्ड साझा न करें।
- अनजान लिंक या QR कोड पर क्लिक करने से बचें।
- केवल आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें।
- सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी सीमित रखें।
- संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर तुरंत सतर्क रहें।
- साइबर ठगी होने पर बिना देरी किए राष्ट्रीय हेल्पलाइन या ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
इन उपायों से साइबर अपराध का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जागरूकता सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ नागरिकों की जागरूकता भी साइबर अपराध रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि लोग समय रहते सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें, तो कई मामलों में नुकसान को रोका जा सकता है।
इसी उद्देश्य से सरकार समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाती है ताकि नागरिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग कर सकें।
देश में साइबर ठगी के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि डिजिटल सुरक्षा की चुनौती को दर्शाती है। हालांकि, केंद्र सरकार ने I4C, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System जैसी व्यवस्थाएं विकसित कर इस चुनौती से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों की सतर्कता और जागरूकता भी साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए समान रूप से आवश्यक है।

