कानपुर गहराता जा रहा है मंडी परिषद टैगिंग नोटिस विवाद: 451 वाहनों को नोटिस पर व्यापारियों ने किया विरोध, जानिए कब है धरने का ऐलान

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रिपोर्ट – विवेक कृष्ण दीक्षित 

कानपुर: राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा वाहनों की टैगिंग व्यवस्था के तहत 451 वाहनों को नोटिस जारी किए जाने के बाद व्यापारियों में असंतोष बढ़ गया है। इस मुद्दे को लेकर अब व्यापारी संगठन खुलकर विरोध के मैदान में उतर आए हैं। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने मंडी परिषद की नई व्यवस्था और उसके क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए इसे व्यापारियों के हितों के विपरीत बताया है। संगठन का कहना है कि जिस व्यवस्था को पहले परीक्षण (ट्रायल) के तौर पर लागू किया गया था, उसी के आधार पर व्यापारियों पर आर्थिक दंड लगाना उचित नहीं है।

इसी विरोध के क्रम में व्यापारियों ने 30 जुलाई को नौबस्ता गल्ला मंडी, कानपुर में धरना-प्रदर्शन करने तथा प्रतीकात्मक रूप से खून से पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने 1 जुलाई से प्रदेश की मंडियों में आने-जाने वाले उन वाहनों के लिए टैगिंग व्यवस्था लागू की, जो कृषि उपज के लोडिंग और अनलोडिंग कार्य में शामिल हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य वाहनों की आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और मंडी संचालन को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाना बताया गया।

हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि परिषद ने स्वयं इसे शुरुआती चरण में दो महीने के प्रयोग के रूप में लागू करने की बात कही थी। ऐसे में ट्रायल अवधि के दौरान तकनीकी कमियों के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई करना उचित नहीं माना जा सकता।

व्यापार मंडल ने उठाए कई सवाल

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री ज्ञानेश मिश्र ने मंडी परिषद के डायरेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके तकनीकी पहलुओं को पूरी तरह परखा जाना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यवस्था को परीक्षण के लिए लागू किया गया है, तो उसका उद्देश्य कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना होता है, न कि उसी अवधि में व्यापारियों पर आर्थिक दंड लगाना। उनका कहना है कि वर्तमान कार्रवाई से व्यापारियों में असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ी हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में बताई गई तकनीकी दिक्कतें

ज्ञानेश मिश्र के अनुसार, टैगिंग व्यवस्था को लागू करने के दौरान कई स्थानों से तकनीकी समस्याओं की जानकारी मिली। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क, उपकरण और डिजिटल प्रक्रिया से जुड़ी कठिनाइयों के कारण कई वाहन निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके।

व्यापार मंडल का दावा है कि अनेक मंडियों में टैगिंग प्रणाली सुचारु रूप से कार्य नहीं कर रही थी। इसके बावजूद संबंधित वाहनों को नोटिस भेज दिया गया। संगठन का कहना है कि पहले तकनीकी व्यवस्था को पूरी तरह सक्षम बनाया जाना चाहिए था, उसके बाद ही इसे अनिवार्य किया जाना चाहिए था।

451 वाहनों को भेजे गए नोटिस

व्यापार मंडल के अनुसार, टैगिंग प्रक्रिया पूरी न होने के आधार पर 451 वाहनों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों में संबंधित वाहन संचालकों एवं व्यापारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है तथा आर्थिक दंड लगाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

संगठन का कहना है कि यह संख्या व्यापारियों की चिंता बढ़ाने वाली है। उनका मानना है कि यदि तकनीकी कारणों से टैगिंग नहीं हो सकी, तो उसका दायित्व केवल व्यापारियों पर नहीं डाला जा सकता।

अधिकतम 1.32 लाख रुपये तक की पेनाल्टी

व्यापार मंडल का आरोप है कि कुछ मामलों में अधिकतम 1.32 लाख रुपये तक की पेनाल्टी निर्धारित की गई है। संगठन का कहना है कि इतनी बड़ी राशि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

बताया गया कि अब तक चार व्यापारियों ने निर्धारित पेनाल्टी जमा भी कर दी है। हालांकि, संगठन का कहना है कि कई व्यापारी दबाव की स्थिति में भुगतान करने को मजबूर हुए हैं। इसी कारण पूरे मामले की समीक्षा की मांग की जा रही है।

व्यापारियों ने जताई नाराजगी

व्यापारियों का कहना है कि वे मंडी परिषद द्वारा पारदर्शी व्यवस्था लागू किए जाने के विरोध में नहीं हैं। उनका कहना है कि डिजिटल व्यवस्था और आधुनिक तकनीक का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन किसी भी नई प्रणाली को लागू करते समय व्यावहारिक कठिनाइयों और स्थानीय परिस्थितियों का भी ध्यान रखना आवश्यक है।

उनका मानना है कि यदि शुरुआत में ही दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, तो व्यापारियों में नई व्यवस्था के प्रति विश्वास कम होगा। इसलिए पहले प्रशिक्षण, जागरूकता और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

30 जुलाई को धरना-प्रदर्शन का ऐलान

मामले को लेकर भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने 30 जुलाई को नौबस्ता गल्ला मंडी में धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से वे अपनी मांगों को प्रशासन और मंडी परिषद तक पहुंचाएंगे।

इसके साथ ही व्यापारियों ने प्रतीकात्मक रूप से खून से पत्र लिखने का भी निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यह कदम उनकी गंभीर चिंता और विरोध को शांतिपूर्ण ढंग से व्यक्त करने के लिए उठाया जा रहा है।

प्रमुख मांगें क्या हैं?

व्यापारियों की ओर से मुख्य रूप से निम्न मांगें रखी जा रही हैं—

  • ट्रायल अवधि के दौरान जारी किए गए सभी नोटिसों की समीक्षा की जाए।
  • तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद ही व्यवस्था को पूरी तरह लागू किया जाए।
  • जिन मामलों में तकनीकी कारणों से टैगिंग नहीं हो सकी, उनमें दंडात्मक कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए।
  • व्यापारियों और वाहन संचालकों को पर्याप्त प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए।
  • नई व्यवस्था को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से संवाद स्थापित किया जाए।

डिजिटल व्यवस्था और जमीनी चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि मंडियों में डिजिटल तकनीक का उपयोग पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, किसी भी नई प्रणाली की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।

यदि नेटवर्क, तकनीकी उपकरण, प्रशिक्षण और स्थानीय परिस्थितियों का समुचित ध्यान रखा जाए, तो ऐसी व्यवस्थाएं लंबे समय में व्यापार और प्रशासन दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं। वहीं, शुरुआती चरण में आने वाली समस्याओं का समाधान संवाद और सहयोग के माध्यम से किया जाना अधिक उपयुक्त माना जाता है।

प्रशासन और व्यापारियों के बीच संवाद की आवश्यकता

व्यापारिक संगठनों का मानना है कि इस पूरे मामले का समाधान आपसी संवाद के माध्यम से निकाला जा सकता है। यदि मंडी परिषद, व्यापारी संगठन और संबंधित अधिकारी एक साथ बैठकर तकनीकी और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा करें, तो विवाद की स्थिति से बचा जा सकता है।

फिलहाल व्यापारियों की निगाहें 30 जुलाई को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्ष सकारात्मक संवाद की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो इस विवाद का समाधान निकाला जा सकता है और मंडी की डिजिटल व्यवस्था भी सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।

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