कानपुर: बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई गुरु पूर्णिमा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जीता सभी का मन

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रिपोर्टः विक्की रघुवंशी 

कानपुरः भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च माना गया है। गुरु केवल ज्ञान देने वाले शिक्षक ही नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। वे अपने शिष्यों के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, नैतिक मूल्यों का संस्कार देते हैं और जीवन की चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। इसी महान गुरु-शिष्य परंपरा को सजीव बनाए रखने के उद्देश्य से बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज, बेनाझाबर, कानपुर में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। पूरे विद्यालय परिसर में आध्यात्मिक वातावरण, अनुशासन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना देखने को मिली।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों द्वारा अपने गुरुजनों का माल्यार्पण कर सम्मान करने से हुआ। छात्र-छात्राओं ने अपने शिक्षकों के प्रति आदर और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को जीवंत किया। इसके बाद भैया प्रखर त्रिपाठी ने देववाणी में गुरुजनों का अभिनंदन किया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को श्रद्धा और भक्ति से भर दिया।

इसके उपरांत दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन के बाद मां सरस्वती वंदना और गुरु वंदना प्रस्तुत की गई। इन प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति, शिक्षा और आध्यात्मिक मूल्यों का संदेश प्रभावशाली ढंग से उपस्थित किया। विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ प्रस्तुतियों का उत्साहवर्धन किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम बने समारोह का मुख्य आकर्षण

गुरु पूर्णिमा समारोह में विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। कक्षा 12 की छात्राओं ने “गुरु प्रवर आपका अभिनंदन” शीर्षक से भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। गीत के माध्यम से छात्राओं ने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की। उनकी मधुर प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भावविभोर कर दिया।

इसके बाद कक्षा 11 की छात्रा गौरी जायसवाल ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है, क्योंकि गुरु ही ज्ञान का प्रकाश देकर जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने महर्षि वेदव्यास के योगदान का उल्लेख करते हुए गुरु पूर्णिमा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। उनके विचारों ने विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा दी।

इसी क्रम में कक्षा 12 के छात्र श्रेयांस ने अपनी स्वरचित कविता प्रस्तुत की। कविता में गुरु के प्रति समर्पण, सम्मान और कृतज्ञता का भाव स्पष्ट रूप से झलक रहा था। उनकी प्रत्येक पंक्ति ने गुरु-शिष्य संबंधों की पवित्रता को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। उपस्थित सभी लोगों ने उनकी प्रस्तुति की सराहना करते हुए जोरदार तालियां बजाईं।

वहीं, कक्षा 11 के छात्र क्षितिज ने अंग्रेजी भाषा में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता भी प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक सफल व्यक्ति के पीछे उसके गुरु का महत्वपूर्ण योगदान होता है। उनके प्रेरणादायक विचारों ने विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों का महत्व समझाया।

गीत और अभिनय ने बांधा समां

कार्यक्रम के दौरान कक्षा 12 के विद्यार्थियों ने अभिनय के साथ “गुरुवर तेरा सिर पर हाथ रहे” गीत प्रस्तुत किया। संगीत, अभिनय और भावपूर्ण अभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया। प्रस्तुति समाप्त होने के बाद सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा।

समारोह की अंतिम सांस्कृतिक प्रस्तुति के रूप में भैया प्रखर त्रिपाठी ने “हे मेरे गुरुदेव” गीत प्रस्तुत किया। उनकी मधुर आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस प्रस्तुति ने गुरु के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण की भावना को और अधिक सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया।

प्रधानाचार्य ने बताया गुरु का महत्व

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य बृजमोहन कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे जीवन के सच्चे मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता जहां हमें जन्म देते हैं, वहीं गुरु हमें संस्कार, ज्ञान और जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करते हैं। इसलिए भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि एक सच्चा गुरु प्रत्येक विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने का प्रयास करता है। विद्यार्थियों को सदैव अपने गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए तथा उनके बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाना चाहिए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें निरंतर अध्ययन, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।

भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का मिला संदेश

पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय में अनुशासन, संस्कार और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है।

विद्यालय की उपप्रधानाचार्या श्रीमती मंजूबाला श्रीवास्तव सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया तथा उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की। कार्यक्रम के सफल संचालन और व्यवस्थाओं में विद्यालय परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

स्वल्पाहार के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

समारोह के अंत में विद्यालय परिवार की ओर से सभी छात्र-छात्राओं के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई। इस दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने एक-दूसरे को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं तथा आपसी संवाद के माध्यम से गुरु-शिष्य संबंधों की आत्मीयता को और अधिक मजबूत किया।

आज के आधुनिक युग में ऐसे आयोजन केवल धार्मिक या सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन भर नहीं हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और गुरु के महत्व से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी हैं। बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज द्वारा आयोजित यह गुरु पूर्णिमा समारोह इसी उद्देश्य की सफल अभिव्यक्ति साबित हुआ।

विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी, प्रेरणादायक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, अनुशासित आयोजन और गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना ने इस कार्यक्रम को यादगार बना दिया। निस्संदेह, भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के भीतर संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और उत्कृष्ट शिक्षा के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करेंगे तथा भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की अमूल्य विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

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