कानपुर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव: श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट ने श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया पर्व, स्वामी श्री प्रकाश जी महाराज का मिला आशीर्वाद

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। इसी पावन अवसर पर श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट, कानपुर इकाई द्वारा बंगला नंबर-21, कैंट, कानपुर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और भक्तों ने भाग लेकर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। भक्तों ने परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रकाश जी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर तिलक, आरती एवं विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गुरुजी के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पूजन-अर्चन से हुई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा का स्मरण करते हुए गुरुजी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और आरती उतारी।

आयोजकों ने बताया कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आत्मिक समर्पण का प्रतीक है। इसी भावना को लेकर प्रत्येक वर्ष यह आयोजन किया जाता है, ताकि समाज में आध्यात्मिक मूल्यों और संस्कारों को बढ़ावा मिल सके।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े श्रद्धालु

कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि श्रद्धालुओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रकाश जी महाराज के दर्शन किए। आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूर-दराज़ के भक्त भी कार्यक्रम से जुड़े और गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त कर सके।

इस अवसर पर गुरुजी ने अपने शिष्यों को आध्यात्मिक जीवन, नैतिक मूल्यों और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विस्तृत संदेश दिया।

गुरु का जीवन निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान

कार्यक्रम के दौरान श्री विश्वनाथ कनोडिया ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन निर्माण में गुरु की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता, शिक्षक और आध्यात्मिक गुरु सभी किसी न किसी रूप में जीवन को दिशा देने का कार्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि जिन गुरुओं ने हमें ज्ञान, संस्कार और जीवन के मूल्य सिखाए हैं, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। गुरु पूर्णिमा का पर्व इसी भावना को सशक्त बनाता है।

स्वामी श्री प्रकाश जी महाराज का प्रेरक संदेश

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने संदेश में महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रकाश जी महाराज ने कहा कि गुरु का कार्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर सही मार्ग दिखाना और चरित्र निर्माण करना भी है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता जीवन के प्रथम गुरु होते हैं, जो बच्चों को संस्कार और जीवन के मूलभूत मूल्य प्रदान करते हैं। इसके बाद शिक्षक और आध्यात्मिक गुरु व्यक्ति के व्यक्तित्व को और अधिक विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गीता के श्लोक का किया उल्लेख

अपने प्रवचन के दौरान स्वामी श्री प्रकाश जी महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता के 34वें श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि—

“तत्त्वदर्शी ज्ञानी पुरुषों के पास जाओ, उन्हें साष्टांग प्रणाम करो, विनम्रतापूर्वक प्रश्न पूछो और उनकी सेवा करो। वे तुम्हें सत्य का ज्ञान प्रदान करेंगे।”

उन्होंने कहा कि यह श्लोक गुरु-शिष्य संबंध की गहराई और ज्ञान प्राप्त करने की सही भावना को स्पष्ट करता है।

विश्वास और समर्पण पर आधारित है गुरु-शिष्य संबंध

गुरुजी ने अपने संदेश में आगे कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध अटूट विश्वास, अनुशासन और समर्पण पर आधारित होता है। शिष्य को अपने अहंकार का त्याग कर गुरु के प्रति श्रद्धा और विश्वास बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब शिष्य विनम्रता के साथ ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करता है, तभी वह जीवन में वास्तविक सफलता और आत्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।

समाज में संस्कारों के संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में तकनीकी प्रगति के साथ-साथ नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण भी आवश्यक है। गुरु पूर्णिमा जैसे पर्व नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, गुरु परंपरा और जीवन मूल्यों से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि परिवार और समाज दोनों को मिलकर बच्चों में संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।

बड़ी संख्या में भक्त हुए शामिल

कार्यक्रम का संयोजन सुरेश गुप्ता ने किया। आयोजन में सत्यनारायण नेवटिया, प्रदीप गुप्ता, एडवोकेट नरेश चंद्र त्रिपाठी, राजकुमार कनोडिया, मदन कनोडिया, राजकुमार नेवटिया, अमित अग्रवाल, ऋचा अग्रवाल, अभिषेक कनोडिया, नवीन कुमार, ईश्वर चंद्र वर्मा, सीता कनोडिया, पुष्पा कनोडिया, सरोज नेवटिया, कस्तूरी गुप्ता, गौरव तिवारी, कमलेश कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सभी भक्तों ने गुरुजी के संदेश को ध्यानपूर्वक सुना और कार्यक्रम के समापन पर प्रसाद ग्रहण किया।

प्रसाद वितरण के साथ हुआ समापन

पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। समापन पर सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। उपस्थित लोगों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं।

गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह पर्व महर्षि वेदव्यास को समर्पित माना जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की। इस दिन गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करने, ज्ञान प्राप्त करने और आत्मिक उन्नति का संकल्प लेने की परंपरा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि व्यक्ति को जीवन की सही दिशा भी प्रदान करते हैं। इसलिए गुरु पूर्णिमा समाज में ज्ञान, अनुशासन और संस्कारों के महत्व को पुनः स्मरण कराने का अवसर बनती है।

कानपुर में श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक संदेशों से परिपूर्ण रहा। कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रकाश जी महाराज ने गुरु-शिष्य परंपरा, संस्कार और चरित्र निर्माण के महत्व पर प्रेरक संदेश दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता और शांतिपूर्ण आयोजन ने इस पर्व को विशेष बना दिया।

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