10 वर्षों से फरार वारंटी अभियुक्त गिरफ्तार, जीआरपी कानपुर सेंट्रल को मिली बड़ी सफलता

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रिपोर्ट- हरिशंकर शर्मा

कानपुर। रेलवे में अपराध नियंत्रण और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जीआरपी कानपुर सेंट्रल को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। वर्ष 2017 से दर्ज एक मामले में करीब 10 वर्षों से फरार चल रहे वारंटी अभियुक्त को बिहार के मुंगेर जिले से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर आरोपी को कानपुर लाया गया, जहां आवश्यक पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

यह कार्रवाई रेलवे पुलिस द्वारा लगातार चलाए जा रहे अपराध नियंत्रण अभियान का हिस्सा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फरार अभियुक्त की तलाश लंबे समय से की जा रही थी और उसके संबंध में तकनीकी एवं स्थानीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे थे। अंततः पुलिस टीम को सफलता मिली और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

रेलवे पुलिस के विशेष अभियान के तहत हुई कार्रवाई

रेलवे पुलिस महानिदेशक प्रकाश डी. के मार्गदर्शन में तथा पुलिस महानिरीक्षक रेलवे प्रयागराज एन. कोलांची के निर्देशन में रेलवे क्षेत्र में अपराधों की रोकथाम और लंबित मामलों के निस्तारण के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक रेलवे प्रयागराज प्रशांत वर्मा के निर्देशन और सतत मॉनिटरिंग में कार्रवाई को गति दी गई।

इसके अतिरिक्त, पुलिस उपाधीक्षक रेलवे कानपुर शेषमणि उपाध्याय के निकट पर्यवेक्षण में जीआरपी कानपुर सेंट्रल की टीम ने फरार वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष रणनीति तैयार की। प्रभारी निरीक्षक ओम नारायण सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अभियुक्त की तलाश तेज की, जिसके परिणामस्वरूप यह सफलता हासिल हुई।

वर्ष 2017 के मामले में जारी था वारंट

पुलिस के अनुसार, थाना जीआरपी कानपुर सेंट्रल में वर्ष 2017 में मुकदमा अपराध संख्या 617/17 दर्ज किया गया था। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 328 एवं 380 के अंतर्गत पंजीकृत था। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी न्यायालय में लगातार अनुपस्थित रहा।

इसके बाद माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-16), कानपुर नगर द्वारा अभियुक्त के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया गया। साथ ही, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 82 और 83 के अंतर्गत उद्घोषणा एवं अन्य कानूनी कार्रवाई भी की गई। इसके बावजूद अभियुक्त न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ।

तकनीकी और स्थानीय स्तर पर लगातार चल रही थी तलाश

जीआरपी अधिकारियों ने बताया कि अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए कई वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे थे। पुलिस टीम ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, स्थानीय खुफिया सूचना तथा विभिन्न राज्यों में समन्वय स्थापित कर आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी।

लगातार मिल रही सूचनाओं का विश्लेषण करने के बाद पुलिस को आरोपी के बिहार के मुंगेर जिले में होने की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए थाना सफियासराय क्षेत्र के परहम गांव में दबिश दी और आरोपी को 27 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर लिया।

ट्रांजिट रिमांड लेकर कानपुर लाई गई पुलिस टीम

गिरफ्तारी के बाद रेलवे पुलिस ने स्थानीय न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त किया। इसके उपरांत आरोपी को कानपुर लाया गया। यहां उससे आवश्यक पूछताछ की गई तथा सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 29 जुलाई 2026 को संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से लंबे समय से लंबित एक महत्वपूर्ण मामले को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। साथ ही, यह अभियान फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए जारी रहेगा।

गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान मो. जफर पुत्र एनुल अली, निवासी ग्राम परहम, थाना सफियासराय, जिला मुंगेर (बिहार), आयु लगभग 38 वर्ष के रूप में हुई है। अभियुक्त के विरुद्ध न्यायालय द्वारा जारी वारंट के अनुपालन में यह कार्रवाई की गई।

अपराध नियंत्रण के प्रति रेलवे पुलिस की सक्रियता

रेलवे पुलिस का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से चोरी, लूट, धोखाधड़ी तथा अन्य आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, न्यायालय से जारी वारंटों के अनुपालन और लंबे समय से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से न केवल लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आती है, बल्कि कानून व्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। साथ ही, अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई का स्पष्ट संदेश समाज तक पहुंचता है।

जीआरपी कानपुर सेंट्रल द्वारा 10 वर्षों से फरार वारंटी अभियुक्त की गिरफ्तारी रेलवे पुलिस की सतत निगरानी, तकनीकी जांच और समन्वित प्रयासों का परिणाम है। पुलिस का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे अभियान निरंतर जारी रहेंगे ताकि न्यायालय से लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सके और कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जा सके। रेलवे पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराधियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

 

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