विश्व ORS सप्ताह: भारतीय बाल रोग अकादमी की जागरूकता मुहिम, कानपुर में माताओं और मेडिकल छात्रों को दिया स्वास्थ्य संदेश

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रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा 

कानपुर: दस्त (डायरिया) जैसी सामान्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विश्व ORS सप्ताह के अंतर्गत कानपुर में भारतीय बाल रोग अकादमी (Indian Academy of Pediatrics – IAP) की ओर से विभिन्न संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य आमजन, विशेषकर माताओं और मेडिकल विद्यार्थियों को ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) तथा जिंक के सही उपयोग के बारे में जानकारी देना था, ताकि दस्त से होने वाली जटिलताओं और मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सके।

विश्व ORS सप्ताह के तहत आयोजित इन कार्यक्रमों में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि समय पर ORS और जिंक का उपयोग करने से अधिकांश मामलों में दस्त के कारण होने वाले निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) से बचाव संभव है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि दस्त होने पर घबराने के बजाय वैज्ञानिक और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार शुरू करें।

भारतीय मेडिकेयर में आयोजित हुआ जागरूकता शिविर

विश्व ORS सप्ताह के अवसर पर डॉ. अनुराग भारती की भारतीय मेडिकेयर में विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र की माताओं, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

शिविर के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सरल भाषा में बताया कि छोटे बच्चों में दस्त होने पर शरीर से पानी और आवश्यक लवण तेजी से निकल जाते हैं। यदि समय पर ORS नहीं दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए प्रत्येक परिवार को ORS के सही उपयोग की जानकारी होना आवश्यक है।

प्रश्नोत्तरी के माध्यम से बढ़ाई जागरूकता

कार्यक्रम को रोचक और सहभागितापूर्ण बनाने के लिए उपस्थित माताओं और अन्य प्रतिभागियों के बीच ORS से संबंधित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई।

प्रतिभागियों से पूछा गया कि ORS कब देना चाहिए, इसे कैसे तैयार किया जाता है और जिंक की क्या भूमिका होती है। सही उत्तर देने वालों को आकर्षक उपहार प्रदान किए गए। इससे लोगों ने न केवल जानकारी प्राप्त की बल्कि स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण तथ्यों को भी बेहतर तरीके से समझा।

निःशुल्क वितरित किए गए ORS पैकेट

कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित लोगों को निःशुल्क ORS के पैकेट वितरित किए गए। साथ ही चिकित्सकों ने ORS घोल बनाने की सही विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया।

विशेषज्ञों ने बताया कि दस्त शुरू होते ही ORS देना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जिंक की पूरी खुराक भी पूरी करनी चाहिए। इससे बच्चे जल्दी स्वस्थ होते हैं और जटिलताओं की संभावना कम होती है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

इस अवसर पर डॉ. अनुराग भारती, भारतीय बाल रोग अकादमी के अध्यक्ष डॉ. जे. के. गुप्ता तथा डॉ. रूपम श्रीवास्तव ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया।

चिकित्सकों ने बताया कि भारत सहित कई देशों में डायरिया अब भी बच्चों में बीमारी का प्रमुख कारण है। हालांकि समय पर ORS और जिंक का उपयोग कर अधिकांश मामलों में गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में दस्त होने पर घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।

सेविका संस्था ने प्रस्तुत किया जागरूकता गीत

कार्यक्रम में सेविका संस्था के सदस्यों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने ORS जागरूकता पर आधारित प्रेरक गीत प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

इस सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी संदेश को सरल और प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना की।

रामा मेडिकल कॉलेज में हुई संगोष्ठी

विश्व ORS सप्ताह के अंतर्गत रामा मेडिकल कॉलेज में मेडिकल विद्यार्थियों के लिए विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई।

इस कार्यक्रम में डॉ. वी. के. टंडन और डॉ. राज तिलक ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने दस्त के वैज्ञानिक प्रबंधन, ORS की उपयोगिता और जिंक की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने भविष्य के चिकित्सकों से कहा कि वे समुदाय स्तर पर भी ORS के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

नारायणा मेडिकल कॉलेज में भी हुआ कार्यक्रम

इसी क्रम में नारायणा मेडिकल कॉलेज में भी ORS विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।

यहां डॉ. मोहसिन खान और डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने मेडिकल विद्यार्थियों को ORS के वैज्ञानिक उपयोग, सही घोल तैयार करने की विधि तथा दस्त से होने वाली मृत्यु की रोकथाम में इसकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों और मेडिकल विद्यार्थियों की जिम्मेदारी केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक है।

दस्त होने पर क्या करें?

विशेषज्ञ चिकित्सकों ने लोगों को सलाह दी कि यदि किसी बच्चे या वयस्क को दस्त हो जाए तो सबसे पहले ORS देना शुरू करें। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ दें और चिकित्सीय सलाह के अनुसार जिंक की पूरी खुराक लें।

यदि मरीज में अत्यधिक कमजोरी, लगातार उल्टी, तेज बुखार, खून वाले दस्त या गंभीर निर्जलीकरण के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

भारतीय बाल रोग अकादमी की अपील

भारतीय बाल रोग अकादमी ने आम नागरिकों से अपील की कि वे दस्त को सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर ORS और जिंक का उपयोग करने से अधिकांश मामलों में गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

साथ ही साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल, हाथ धोने की आदत और पौष्टिक भोजन को भी दस्त की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में सकारात्मक पहल

मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम केवल चिकित्सा जानकारी देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लोगों के व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करते हैं। स्कूलों, मेडिकल कॉलेजों और सामुदायिक संस्थानों में इस प्रकार के अभियान भविष्य में भी स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होंगे।

विश्व ORS सप्ताह के अंतर्गत कानपुर में भारतीय बाल रोग अकादमी द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों ने ORS और जिंक के महत्व को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाया। भारतीय मेडिकेयर में आयोजित शिविर, रामा मेडिकल कॉलेज और नारायणा मेडिकल कॉलेज की संगोष्ठियों के माध्यम से आमजन, माताओं और मेडिकल विद्यार्थियों को दस्त से बचाव और वैज्ञानिक उपचार की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट रहा कि समय पर ORS, जिंक और चिकित्सीय सलाह बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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