कानपुर IIT में प्रोफेसर पति-पत्नी विवाद: असिस्टेंट प्रोफेसर ने पति पर मारपीट-यतनाएं देने का लगाया आरोप, पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज जांच शुरू की
रिपोर्ट- कृष्णा शर्मा
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) से जुड़ा एक पारिवारिक विवाद इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। संस्थान में कार्यरत एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने अपने प्रोफेसर पति के खिलाफ कल्याणपुर थाने में गंभीर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न, मारपीट, धमकी और वैवाहिक जीवन से जुड़े कई अन्य आरोप लगाए हैं।
वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता के अनुसार, वह कानपुर IIT के डिपार्टमेंट ऑफ कॉग्निटिव साइंस में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पति संस्थान के डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग तथा कॉग्निटिव साइंस विभाग में प्रोफेसर हैं।
महिला प्रोफेसर का कहना है कि उनकी शादी 14 दिसंबर 2012 को हुई थी और उनके दो नाबालिग बेटे हैं। उनका आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में वैवाहिक संबंधों में लगातार तनाव बढ़ता गया और उन्हें मानसिक तथा शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
वैवाहिक संबंधों में तनाव बढ़ने का आरोप
शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि उनके पति के अन्य महिलाओं के साथ निजी संबंधों को लेकर दोनों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ। उनका कहना है कि जब उन्होंने इस विषय पर आपत्ति जताई तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
महिला का यह भी आरोप है कि जनवरी 2026 में पति के मोबाइल फोन में कुछ निजी चैट देखने के बाद विवाद बढ़ गया। उनके अनुसार, इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई तथा उन्हें धमकाया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और पुलिस इन्हीं बिंदुओं की जांच कर रही है।
घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न के आरोप
एफआईआर में दर्ज शिकायत के अनुसार, महिला ने कई ऐसी घटनाओं का उल्लेख किया है जिन्हें उन्होंने घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न का हिस्सा बताया है। शिकायत में कहा गया है कि घर में तोड़फोड़ की गई, पारिवारिक सामान को नुकसान पहुंचाया गया और कई बार उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि एक विवाद के दौरान उन्हें धक्का देकर गिराया गया, जिससे उन्हें चोटें आईं। उनका कहना है कि इन घटनाओं का उनके बच्चों पर भी मानसिक प्रभाव पड़ा।
हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार का भी आरोप
महिला प्रोफेसर ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि जुलाई 2026 में उनके घर आए रिश्तेदारों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। उनका कहना है कि विवाद के दौरान सुरक्षा कर्मियों को बुलाया गया और उनके परिजनों को घर से बाहर जाने के लिए कहा गया।
शिकायत के अनुसार, इसके बाद उन्हें भी कई परिस्थितियों में मानसिक रूप से परेशान किया गया। इन आरोपों की भी जांच पुलिस कर रही है।
अलग रहने का लिया फैसला
शिकायतकर्ता का कहना है कि लगातार विवाद और तनावपूर्ण माहौल के कारण उन्होंने अपने बच्चों के साथ अलग आवास में रहना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि यह निर्णय बच्चों की सुरक्षा और मानसिक शांति को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके निजी जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप किया गया तथा उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखने का प्रयास किया गया। इन दावों की भी पुलिस जांच के दौरान पड़ताल करेगी।
पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
मामले में कल्याणपुर पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
एसीपी कल्याणपुर दिलीप सिंह ने बताया कि यह पति-पत्नी के बीच का विवाद है। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। यदि जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच पूरी होने के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। इसलिए किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं होगा। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध डिजिटल, मेडिकल तथा अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है ताकि तथ्य सामने आ सकें और न्यायसंगत निर्णय लिया जा सके।
सोशल मीडिया पर भी हो रही चर्चा
मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वायरल जानकारी या एकपक्षीय दावों पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना चाहिए।
इस तरह के मामलों में अदालत और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया पूरी होने तक सभी पक्षों के अधिकारों का सम्मान करना आवश्यक होता है।

