सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बिना पर्यावरण मंजूरी शुरू नहीं हो सकेगा कोई प्रोजेक्ट, 2021 का केंद्र का आदेश रद्द

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: देश में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पूर्व पर्यावरण मंजूरी (Prior Environmental Clearance) के बिना किसी भी परियोजना की शुरुआत करना कानून के विरुद्ध है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि सरकार भविष्य में ऐसे मामलों में बाद में पर्यावरण मंजूरी (Post Facto Environmental Clearance) देने की व्यवस्था लागू करना चाहती है, तो इसके लिए विधिवत कानूनी अधिसूचना जारी करनी होगी। केवल ऑफिस मेमोरेंडम (Office Memorandum) के माध्यम से ऐसा नियम लागू नहीं किया जा सकता।

इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2021 में केंद्र सरकार द्वारा जारी ऑफिस मेमोरेंडम को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने कहा कि यह आदेश पर्यावरण कानूनों और वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। अदालत के इस निर्णय को पर्यावरण संरक्षण, कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या था पूरा मामला?

वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने एक ऑफिस मेमोरेंडम (OM) जारी किया था। इस आदेश के तहत उन परियोजनाओं को भी बाद में पर्यावरण मंजूरी देने की व्यवस्था की गई थी, जिन्होंने आवश्यक पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना ही निर्माण या अन्य गतिविधियां शुरू कर दी थीं।

इस व्यवस्था को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इससे पहले अनुमति लेने की अनिवार्यता कमजोर हो जाएगी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों का उद्देश्य प्रभावित होगा।

इसी मुद्दे को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम Court ने अपने निर्णय में कहा कि पर्यावरण मंजूरी प्राप्त करना केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कानून द्वारा निर्धारित एक अनिवार्य शर्त है। इसलिए किसी भी परियोजना को पहले पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन कर आवश्यक अनुमति प्राप्त करनी होगी।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव करना चाहती है, तो उसे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत विधिवत अधिसूचना जारी करनी होगी। केवल प्रशासनिक आदेश या ऑफिस मेमोरेंडम के माध्यम से ऐसे महत्वपूर्ण कानूनी बदलाव नहीं किए जा सकते।

2021 का ऑफिस मेमोरेंडम क्यों हुआ रद्द?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2021 का ऑफिस मेमोरेंडम वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना जारी किया गया था। न्यायालय के अनुसार, पर्यावरण मंजूरी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर नियमों में बदलाव केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही संभव है।

अदालत ने माना कि प्रशासनिक आदेश किसी अधिनियम या अधिसूचना का स्थान नहीं ले सकता। इसलिए यह ऑफिस मेमोरेंडम कानून के अनुरूप नहीं था और इसे निरस्त किया जाना उचित है।

पर्यावरण संरक्षण पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से पर्यावरण संरक्षण संबंधी नियमों को और मजबूती मिलेगी। अब परियोजनाओं को पहले पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होगा और उसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा।

इससे पर्यावरणीय जोखिमों का पहले ही मूल्यांकन किया जा सकेगा तथा प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता और स्थानीय समुदायों पर संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।

परियोजना कंपनियों के लिए क्या संदेश?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद परियोजना विकसित करने वाली कंपनियों और एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे किसी भी निर्माण कार्य या औद्योगिक गतिविधि की शुरुआत से पहले सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां प्राप्त करें।

विशेषज्ञों के अनुसार, इससे परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में कानूनी विवादों की संभावना भी कम होगी।

कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी

अदालत ने अपने फैसले में यह भी दोहराया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। यदि सरकार किसी नीति या नियम में बदलाव करना चाहती है, तो उसे निर्धारित विधायी प्रक्रिया अपनानी होगी।

इस निर्णय को प्रशासनिक आदेशों और वैधानिक अधिसूचनाओं के बीच अंतर स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण फैसला भी माना जा रहा है।

पर्यावरण मंजूरी क्यों होती है आवश्यक?

पर्यावरण मंजूरी का उद्देश्य किसी भी परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का पहले से आकलन करना होता है। इसके तहत वायु, जल, वन, वन्यजीव, जैव विविधता और स्थानीय आबादी पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा की जाती है।

यदि किसी परियोजना से पर्यावरण को गंभीर नुकसान की आशंका होती है, तो आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुझाए जाते हैं। यही कारण है कि पूर्व पर्यावरण मंजूरी को विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

फैसले का व्यापक महत्व

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला केवल एक ऑफिस मेमोरेंडम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निर्णयों की वैधानिक सीमा को भी स्पष्ट करता है।

इसके साथ ही यह निर्णय भविष्य में सरकारों और संबंधित विभागों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होगा कि महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव केवल विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत ही किए जा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना पूर्व पर्यावरण मंजूरी किसी भी परियोजना की शुरुआत कानून के अनुरूप नहीं है। अदालत ने 2021 में जारी केंद्र सरकार के उस ऑफिस मेमोरेंडम को भी रद्द कर दिया, जिसमें बिना पहले मंजूरी लिए शुरू हुई परियोजनाओं को बाद में पर्यावरण स्वीकृति देने की व्यवस्था की गई थी। न्यायालय ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण बदलाव केवल विधिवत अधिसूचना के माध्यम से ही किए जा सकते हैं, न कि केवल प्रशासनिक आदेश से। यह फैसला पर्यावरण संरक्षण और कानूनी प्रक्रिया दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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