विश्व हेपेटाइटिस दिवस: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हुई जागरूकता संगोष्ठी

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रिर्पोट-हरि शंकर शर्मा

कानपुर। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी पीजीआई में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हेपेटाइटिस के प्रति जागरूक करना और वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी बढ़ाना था।

प्रचार्य डाक्टर संजय काला ने की कार्यक्रम की सरहाना

कार्यक्रम का शुभारंभ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला, उप-प्राचार्या डॉ. रिचा गिरी, प्रमुख अधीक्षक डॉ. सौरभ अग्रवाल, पीजीआई के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह तथा गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विनय कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने हेपेटाइटिस की रोकथाम, समय पर जांच और उपचार के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

आधुनिक एंटीवायरल दवाओं से 12 से 24 सप्ताह में है इलाज संभव

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विनय कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस मुख्य रूप से चार प्रकार—ए, बी, सी और ई—का होता है। इनमें हेपेटाइटिस ए और ई सामान्यतः वायरल संक्रमण हैं, जो उचित उपचार और देखभाल से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। वहीं हेपेटाइटिस बी और सी अधिक गंभीर माने जाते हैं। हेपेटाइटिस बी एक दीर्घकालिक बीमारी बन सकती है, जिसका उपचार लंबे समय तक चलता है, जबकि हेपेटाइटिस सी का इलाज आधुनिक एंटीवायरल दवाओं से 12 से 24 सप्ताह में संभव है।

हेपेटाइटिस बी के उपचार को अधिक प्रभावी है बनाना

उन्होंने बताया कि वर्तमान में हेपेटाइटिस बी के बेहतर उपचार के लिए क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है, जिसमें पीजीआई लखनऊ, संजय गांधी पीजीआई, बीएचयू और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज संयुक्त रूप से शोध कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह शोध भविष्य में हेपेटाइटिस बी के उपचार को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

पीजीआई में हेपेटाइटिस की दवाएं मरीजों को निःशुल्क कराई जाती है उपलब्ध

डॉ. विनय कुमार के अनुसार, पीजीआई में हर महीने हेपेटाइटिस बी के लगभग 50 से 60 नए मरीज और हेपेटाइटिस सी के 20 से 30 नए मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। बीते दो वर्षों में लगभग 800 मरीजों को सफल उपचार के बाद स्वस्थ किया जा चुका है, जबकि वर्तमान में करीब 500 मरीजों का नियमित इलाज जारी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पीजीआई में हेपेटाइटिस की दवाएं मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

कई समय तक लोगों को नही हो पाती जानकारी

विशेषज्ञों ने बताया कि हेपेटाइटिस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि कई मरीजों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि वे इस बीमारी से संक्रमित हैं। जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक कई मामलों में लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच चुका होता है। इसलिए समय-समय पर जांच कराना और जोखिम वाले लोगों की स्क्रीनिंग बेहद आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान लोगों से अपील की गई कि वे सुरक्षित जीवनशैली अपनाएं, संक्रमित रक्त या सुई के उपयोग से बचें, स्वच्छ भोजन और पानी का सेवन करें तथा आवश्यकता होने पर हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण अवश्य कराएं। वक्ताओं ने कहा कि यदि समाज जागरूक होगा और समय पर जांच व उपचार कराया जाएगा, तो वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

हेपेटाइटिस ए और सी में क्या अंतर है?

विशेषज्ञों ने बताया कि हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस सी दोनों लिवर को प्रभावित करने वाले संक्रमण हैं, लेकिन इनके फैलने के तरीके और उपचार अलग-अलग हैं।हेपेटाइटिस ए (HAV) दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलता है। यह संक्रमण सामान्यतः कुछ सप्ताह या महीनों में ठीक हो जाता है और अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है।वहीं हेपेटाइटिस सी (HCV) संक्रमित रक्त के संपर्क में आने से फैलता है। यदि समय पर इलाज न मिले तो यह क्रॉनिक बीमारी का रूप लेकर लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। हालांकि अच्छी बात यह है कि आधुनिक एंटीवायरल दवाओं की मदद से हेपेटाइटिस सी का सफल इलाज संभव है, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

जागरुकता फैलाने के साथ ही स्वास्थ जांच का लिया संकल्प

संगोष्ठी में मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. गौतम, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जे.एस. कुशवाहा, डॉ. हरमीत कौर सहित मेडिकल कॉलेज के अनेक चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर, मेडिकल छात्र और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों से हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता फैलाने और नियमित स्वास्थ्य जांच कराने का संकल्प लेने की अपील की गई।

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