CJP प्रोटेस्ट में छात्रों से मारपीट के आरोपी सत्यम पंडित पर गुंडा एक्ट की तैयारी, पुलिस ने 8 आपराधिक मामलों मे की समीक्षा
Digital UP News Desk
गाजियाबाद: दिल्ली में हाल ही में आयोजित छात्र आंदोलन के दौरान हुई कथित मारपीट की घटना के बाद गाजियाबाद पुलिस ने आरोपी सत्यम पंडित के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि आरोपी के आपराधिक इतिहास की समीक्षा पूरी कर ली गई है और अब उसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम (Goonda Act) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
यह मामला उस घटना से जुड़ा है जिसमें दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान बरेली से आए दो युवकों के साथ कथित मारपीट का आरोप लगाया गया था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया और पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्रों ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, जिनमें कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मुद्दे शामिल थे, के विरोध में प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र और समर्थक शामिल हुए थे।
इसी दौरान बरेली से आए दो युवकों के साथ कथित मारपीट की घटना सामने आई। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए। इसके बाद संबंधित एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की भी समीक्षा की।
पुलिस ने शुरू की गुंडा एक्ट की प्रक्रिया
गाजियाबाद पुलिस के अनुसार, आरोपी सत्यम पंडित के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों का रिकॉर्ड एकत्र कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर उसके विरुद्ध गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है। हालांकि, अंतिम कार्रवाई नियमानुसार निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही की जाएगी।
आरोपी पर दर्ज हैं आठ आपराधिक मामले
पुलिस के अनुसार, पटेल नगर निवासी सत्यम पंडित के खिलाफ गाजियाबाद के विभिन्न थानों में कुल आठ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
बताया गया है कि नंदग्राम थाने में दो मुकदमे, कोतवाली थाने में तीन मुकदमे, इंदिरापुरम थाने में एक मुकदमा, सिहानी गेट थाने में दो मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ पहला मामला वर्ष 2022 में दर्ज हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि दर्ज मामलों में विवेचना पूरी कर आरोप पत्र संबंधित अदालतों में दाखिल किए जा चुके हैं।
फिलहाल जमानत पर है आरोपी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सत्यम पंडित वर्तमान में दर्ज मामलों में जमानत पर बाहर है। हालांकि, जमानत पर होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं होता। किसी भी आपराधिक मामले में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर दिया जाता है।
इसी कारण यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन माना जाएगा।
सोशल मीडिया वीडियो के बाद बढ़ी जांच
दिल्ली की घटना के बाद आरोपी का एक अन्य वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया। पुलिस के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद उसके पुराने मामलों और आपराधिक रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा की गई।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में उसने कांवड़ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ अधिकारियों के संबंध में टिप्पणी की थी। इसके बाद पुलिस ने उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
संगठन संचालन का भी उल्लेख
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सत्यम पंडित ‘राष्ट्रीय वीर हिंदू सेना’ नाम से एक संगठन संचालित करने का दावा करता है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इससे पहले भी उसके खिलाफ कथित धमकी से जुड़े एक वीडियो के आधार पर मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि, इन मामलों में अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
पुलिस अधिकारियों ने क्या कहा?
नंदग्राम के एसीपी जियाउद्दीन अहमद के अनुसार, आरोपी के सभी दर्ज मामलों का रिकॉर्ड एकत्र कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर उसके खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि कानून के अनुसार आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गुंडा एक्ट क्या है?
उत्तर प्रदेश में गुंडा नियंत्रण अधिनियम का उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करना है जिनके बारे में पुलिस का मानना हो कि उनकी गतिविधियां सार्वजनिक व्यवस्था या शांति के लिए चुनौती बन सकती हैं।
हालांकि, इस कानून के तहत भी संबंधित व्यक्ति को नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया और अपने पक्ष को रखने का अवसर प्राप्त होता है। किसी भी कार्रवाई की वैधता का परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया जा सकता है।
सोशल मीडिया और संवेदनशील मामलों में सावधानी जरूरी
इस प्रकार के मामलों में सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो और दावे सामने आते हैं। इसलिए किसी भी वीडियो या पोस्ट के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय आधिकारिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार करना आवश्यक होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील मामलों में तथ्यों की पुष्टि के बाद ही जानकारी साझा करनी चाहिए, ताकि गलत सूचना फैलने की संभावना कम हो।
आगे क्या होगा?
यदि पुलिस गुंडा एक्ट के तहत प्रस्तावित कार्रवाई को आगे बढ़ाती है, तो निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार संबंधित प्राधिकारी मामले की समीक्षा करेंगे। इसके बाद कानून के प्रावधानों के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।
दूसरी ओर, यदि आरोपी या अन्य संबंधित पक्ष इस कार्रवाई को चुनौती देना चाहते हैं, तो उन्हें भी कानून के तहत उपलब्ध न्यायिक उपायों का अधिकार प्राप्त होगा।

