असम बाढ़ 2026: 68 मौतों के बाद भी जारी संकट, 5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
Digital UP News Desk
गुवाहाटीः असम में इस साल आई भीषण बाढ़ ने एक बार फिर राज्य के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है। वहीं, लाखों लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं और कई परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि अब कई इलाकों में बाढ़ के पानी का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है। इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज गति से संचालित कर रहा है।
पांच जिलों में अब भी लाखों लोग प्रभावित
डिजास्टर रिपोर्टिंग एंड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (DRIMS) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, असम के पांच जिलों में अभी भी 5.24 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें चराइदेव जिला सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है, जहां करीब 1.9 लाख लोग अभी भी बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं।
इसके अलावा शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट और नागांव जैसे जिलों में भी बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों में कई गांव जलभराव की स्थिति से प्रभावित हैं और लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, ऊपरी असम के कुछ हिस्सों में हालात में सुधार के संकेत मिले हैं। प्रशासन के अनुसार, पानी घटने के साथ ही प्रभावित इलाकों में सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक सुविधाओं की बहाली का काम शुरू किया जा रहा है।
राहत शिविरों में हजारों लोगों को मिल रही मदद
बाढ़ प्रभावित जिलों में प्रशासन ने राहत शिविरों और वितरण केंद्रों की व्यवस्था की है। वर्तमान में चार जिलों में 354 राहत शिविर और सहायता केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में 37,724 से अधिक विस्थापित लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
इसके साथ ही राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन प्रभावित परिवारों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त राहत व्यवस्था भी की जा रही है।
सेना और बचाव दल राहत कार्यों में जुटे
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत अभियान बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है। भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज और असम पुलिस की टीमें लगातार लोगों की मदद में जुटी हैं।
इन टीमों द्वारा प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। साथ ही, जरूरतमंद परिवारों को राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।
हालांकि, बाढ़ के कारण कई स्थानों पर तटबंध, सड़कें, पुल और अन्य सार्वजनिक ढांचे प्रभावित हुए हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने राहत कार्यों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने की भी बड़ी जिम्मेदारी है।
बिजली व्यवस्था बहाल करने के प्रयास तेज
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से बिजली आपूर्ति बंद की गई थी, वहां बिजली व्यवस्था दोबारा शुरू करने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सरकार का पूरा ध्यान प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने और सामान्य जनजीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लाने पर है। इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को लगातार दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
कांग्रेस ने उठाया स्थायी समाधान का मुद्दा
असम बाढ़ को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस ने राज्य में बार-बार आने वाली बाढ़ को लेकर केंद्र और असम सरकार पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार से राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने की अपील की है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को बचाव, राहत और पुनर्वास के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को उचित सहायता और मुआवजा देने की मांग भी उठाई।
इसके साथ ही उन्होंने असम में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत पर जोर दिया। खड़गे ने भारतीय जनता पार्टी के वर्ष 2016 के असम विजन डॉक्यूमेंट का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद बाढ़ नियंत्रण के वादे पूरी तरह क्यों लागू नहीं हो सके।
बार-बार आने वाली बाढ़ बनी बड़ी चुनौती
असम में हर साल आने वाली बाढ़ राज्य के लिए एक गंभीर समस्या रही है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण कई बार बड़े क्षेत्र प्रभावित होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल राहत कार्यों से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए नदी प्रबंधन, तटबंधों की मजबूती, जल निकासी व्यवस्था और दीर्घकालिक योजनाओं पर लगातार काम करने की जरूरत है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाना और हालात को सामान्य बनाना है। वहीं, भविष्य में ऐसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए स्थायी उपायों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
असम में आई बाढ़ ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया है। 68 लोगों की मौत और लाखों लोगों के प्रभावित होने के बाद सरकार, प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं।
हालांकि स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और बाढ़ के स्थायी समाधान की चुनौती अभी भी बनी हुई है। आने वाले समय में बेहतर योजना और मजबूत आपदा प्रबंधन के जरिए ऐसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

