डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर मथुरा में कांग्रेसजनों ने अर्पित की श्रद्धांजलि – कहा उनका मार्ग दर्शन आज भी है सबके साथ
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: भारत के पूर्व राष्ट्रपति और देश के महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मथुरा में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम सेठबाड़ा स्थित जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में आयोजित हुआ, जहां कांग्रेसजनों ने डॉ. कलाम के छवि चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया।
इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन, वैज्ञानिक योगदान और देश के विकास में उनकी भूमिका को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन संघर्ष, मेहनत, अनुशासन और देशसेवा की प्रेरणादायक मिसाल है। उन्होंने अपने कार्यों से भारत के वैज्ञानिक और रक्षा क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वैज्ञानिक के रूप में डॉ. कलाम का महत्वपूर्ण योगदान
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश धनगर ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के वैज्ञानिक जीवन और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम ने लगभग चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
इस दौरान उन्होंने भारत के अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रमों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके योगदान के कारण भारत की वैज्ञानिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली।
मुकेश धनगर ने कहा कि डॉ. कलाम ने वैज्ञानिक के रूप में देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए निरंतर काम किया। विशेष रूप से बैलिस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
पोखरण परमाणु परीक्षण में भी निभाई अहम भूमिका
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 1998 में हुए पोखरण परमाणु परीक्षण में भी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की महत्वपूर्ण संगठनात्मक और तकनीकी भूमिका रही। उन्होंने देश के वैज्ञानिक और रक्षा कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया।
डॉ. कलाम का वैज्ञानिक जीवन केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भारत को तकनीकी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास किया। उनके नेतृत्व और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने देश के युवाओं में विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि पैदा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देश के 11वें राष्ट्रपति बने डॉ. कलाम
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम वर्ष 2002 में भारत के 11वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। उन्हें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन मिला था।
राष्ट्रपति के रूप में भी डॉ. कलाम ने अपनी सरलता, सहज व्यवहार और युवाओं से जुड़ाव के कारण देशभर में विशेष पहचान बनाई। वे विद्यार्थियों और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय रहे।
राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने देश के युवाओं से लगातार संवाद किया और उन्हें बड़े सपने देखने तथा उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत करने की प्रेरणा दी। यही कारण है कि आज भी उन्हें देश की युवा पीढ़ी का प्रेरणास्रोत माना जाता है।
भारत रत्न समेत कई सम्मान मिले
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनके वैज्ञानिक योगदान और देशसेवा को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सम्मान मिला।
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन कभी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटे। इसलिए उनका जीवन आज भी विद्यार्थियों, युवाओं और देश के हर नागरिक के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
युवाओं के लिए प्रेरणा हैं डॉ. कलाम
जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश धनगर ने कहा कि डॉ. कलाम ने देश के युवाओं को सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करने की प्रेरणा दी। उनका मानना था कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम के विचार आज भी युवाओं को आगे बढ़ने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी जीवन यात्रा इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और प्रतिभा के बल पर व्यक्ति देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा, डॉ. कलाम ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और देश के विकास में युवाओं की भूमिका को लेकर भी लगातार जोर दिया।
कांग्रेसजनों ने अर्पित की पुष्पांजलि
श्रद्धांजलि सभा के दौरान कांग्रेसजनों ने डॉ. कलाम के छवि चित्र पर माल्यार्पण किया और पुष्पांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने उनके जीवन और योगदान को याद करते हुए देश के लिए उनके समर्पण को नमन किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. कलाम का व्यक्तित्व राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रसेवा, विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणा देता है। उन्होंने अपने जीवन में सादगी और ईमानदारी को विशेष महत्व दिया।
कार्यक्रम का संचालन जिला महासचिव वैद्य मनोज गौड़ ने किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी कांग्रेसजनों का आभार व्यक्त किया।
बड़ी संख्या में कांग्रेसजन रहे मौजूद
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पूर्व महानगर अध्यक्ष विक्रम वाल्मीकि, महेश चौबे, धर्मेंद्र सिंह प्रधान, अमित दीक्षित, पुरन सिंह, कमल शर्मा, रवि वाल्मीकि, गौरांग अग्रवाल, राकेश शर्मा, मनीष शर्मा, महेश पाठक, अनिल खरे, बॉबी ठाकुर, राजीव सक्सेना, सोनू वर्मा, खुदा बख्श, बलवीर प्रधान, दिलशाद खान, राजेश कुमार सहित कई कांग्रेसजन मौजूद रहे।
सभी ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के छवि चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
डॉ. कलाम का जीवन हमेशा देता रहेगा प्रेरणा
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन देश के लिए समर्पण और निरंतर मेहनत की मिसाल है। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने विज्ञान, रक्षा, अंतरिक्ष और राजनीति के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्होंने देश को वैज्ञानिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना था कि देश का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के हाथों में है।
इसीलिए उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भी उनके विचारों और योगदान को याद किया गया। कांग्रेसजनों ने कहा कि डॉ. कलाम की शिक्षाएं और उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करता रहेगा।
कुल मिलाकर, मथुरा में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 11वीं पुण्यतिथि पर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान कांग्रेसजनों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हुए उनके छवि चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में डॉ. कलाम के वैज्ञानिक योगदान, राष्ट्रपति के रूप में उनकी भूमिका और युवाओं को दी गई प्रेरणा पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि देश के अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रमों को मजबूत बनाने में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा।
वहीं, उनके विचार आज भी युवाओं को मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देते हैं। इसलिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन और उनका योगदान देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

