कानपुर में विश्व ORS सप्ताह पर आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम, बच्चों में डायरिया के लक्षणों पर डॉक्टरों ने दी जानकारी

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: भारतीय बाल रोग अकादमी की ओर से मनाए जा रहे विश्व ओआरएस सप्ताह के अवसर पर कानपुर के आर्य नगर स्थित प्रखर हॉस्पिटल में पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में डायरिया और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति चिकित्सा कर्मियों को जागरूक करना तथा ओआरएस के महत्व की जानकारी देना था।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमित चावला, डॉ. वी.एन. त्रिपाठी और डॉ. शैलेंद्र गौतम ने किया। इस दौरान डॉक्टरों ने डायरिया के दौरान शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी को गंभीरता से लेने की सलाह दी। साथ ही, ओआरएस घोल और ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।

ओआरएस के महत्व पर डॉक्टरों ने दी जानकारी

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. अमित चावला ने डायरिया से जुड़े वैश्विक स्वास्थ्य आंकड़ों और इसके प्रभाव पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई हिस्सों में आज भी बच्चों को डायरिया का सही और समय पर उपचार नहीं मिल पाता है।

उन्होंने कहा कि डायरिया बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। विशेष रूप से छोटे बच्चों में दस्त के दौरान शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने का खतरा रहता है। इसलिए समय पर सही देखभाल और चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है।

डॉ. चावला ने ओआरएस घोल और ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डायरिया के कारण होने वाली निर्जलीकरण की समस्या को नियंत्रित करने में ओआरएस की महत्वपूर्ण भूमिका है।

1978 से ओआरएस का महत्व बढ़ा

कार्यक्रम में बताया गया कि ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी के क्षेत्र में 1978 के बाद महत्वपूर्ण प्रगति हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से ओआरएस आधारित उपचार को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिए जाने के बाद डायरिया से होने वाली मौतों में कमी लाने में मदद मिली।

डॉक्टरों के अनुसार, ओआरएस को चिकित्सा विज्ञान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी को पूरा करने में मदद करना है।

हालांकि, डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर लक्षण दिखाई देने पर केवल घरेलू देखभाल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

शिशुओं में डायरिया को नजरअंदाज न करने की सलाह

डॉ. वी.एन. त्रिपाठी ने शिशुओं में होने वाले डायरिया को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों में बार-बार दस्त और उल्टी के कारण शरीर में पानी की कमी तेजी से हो सकती है।

उन्होंने बताया कि यदि किसी बच्चे को बार-बार दस्त और उल्टी हो रही हो तथा इसके साथ पेशाब कम हो जाए, मुंह सूखने लगे, अत्यधिक थकान या चिड़चिड़ापन दिखाई दे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

इसके अलावा, धंसी हुई आंखें और बच्चे की सामान्य गतिविधियों में कमी भी चिंता के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

निर्जलीकरण के लक्षणों पर विशेष चर्चा

कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों ने निर्जलीकरण यानी शरीर में पानी की कमी के संभावित संकेतों पर भी चर्चा की। बच्चों में यह समस्या कई बार तेजी से बढ़ सकती है। इसलिए माता-पिता और देखभाल करने वालों को शुरुआती संकेतों की जानकारी होना आवश्यक है।

डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की स्थिति में असामान्य बदलाव, लगातार कमजोरी, पानी पीने में परेशानी या पेशाब की मात्रा में कमी जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

हालांकि, हर बच्चे की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए लक्षणों की गंभीरता के अनुसार चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।

पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण

कार्यक्रम में पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका पर भी चर्चा हुई। डॉक्टरों ने कहा कि अस्पतालों में मरीजों और उनके परिवारों से सबसे पहले संपर्क करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों में नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसलिए उन्हें ओआरएस के सही उपयोग, डायरिया से जुड़ी सावधानियों और गंभीर लक्षणों की पहचान की जानकारी होना जरूरी है।

स्वास्थ्यकर्मी यदि शुरुआती स्तर पर गंभीर लक्षणों की पहचान कर लेते हैं, तो मरीज को समय पर उचित चिकित्सकीय सहायता दिलाने में मदद मिल सकती है।

विश्व ओआरएस सप्ताह के दौरान जागरूकता पर जोर

विश्व ओआरएस सप्ताह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा कर्मियों के बीच जागरूकता बढ़ाना था। डॉक्टरों ने कहा कि डायरिया से बचाव और इसके दौरान सही देखभाल को लेकर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना आवश्यक है।

कई बार जानकारी के अभाव में परिवार बीमारी के दौरान उचित कदम उठाने में देरी कर देते हैं। इसलिए जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।

इसी क्रम में, कार्यक्रम में ओआरएस के महत्व और बच्चों में डायरिया के दौरान सावधानियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस वर्ष की थीम पर डॉ. शैलेंद्र गौतम ने दी जानकारी

कार्यक्रम के सचिव डॉ. शैलेंद्र गौतम ने इस वर्ष की थीम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ओआरएस से जुड़ी जागरूकता का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों और आम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि डायरिया से जुड़ी समस्याओं को लेकर समय पर जागरूकता और उचित स्वास्थ्य सलाह महत्वपूर्ण है। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अहम है।

डॉ. गौतम ने कार्यक्रम में शामिल स्टाफ से भी अपील की कि वे मरीजों और उनके परिवारों को ओआरएस और डायरिया से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं।

नर्सिंग स्टाफ से पूछे गए ओआरएस से जुड़े सवाल

कार्यक्रम के अंत में नर्सिंग स्टाफ से ओआरएस और डायरिया से संबंधित प्रश्न पूछे गए। इस गतिविधि के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों की जानकारी और जागरूकता को परखा गया।

प्रश्नोत्तरी में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इसके बाद विजेता प्रतिभागी को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

इससे कार्यक्रम में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों का उत्साह भी बढ़ा। साथ ही, ओआरएस से जुड़ी जानकारी को दोहराने और व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिला।

डॉक्टरों ने समय पर चिकित्सा सलाह लेने की अपील की

कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों ने लोगों से अपील की कि बच्चों में डायरिया के लक्षणों को हल्के में न लें। विशेष रूप से छोटे बच्चों में यदि लगातार दस्त, उल्टी या निर्जलीकरण के संकेत दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।

डॉक्टरों ने कहा कि ओआरएस का उपयोग स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और निर्धारित निर्देशों के अनुसार किया जाना चाहिए। वहीं, गंभीर लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

कुल मिलाकर, कानपुर के आर्य नगर स्थित प्रखर हॉस्पिटल में आयोजित विश्व ओआरएस सप्ताह कार्यक्रम में बच्चों में डायरिया, निर्जलीकरण और ओआरएस के महत्व पर जागरूकता बढ़ाई गई।

डॉ. अमित चावला ने डायरिया से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों और ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी के महत्व पर जानकारी दी। वहीं, डॉ. वी.एन. त्रिपाठी ने शिशुओं में डायरिया के गंभीर लक्षणों की पहचान पर जोर दिया।

कार्यक्रम के सचिव डॉ. शैलेंद्र गौतम ने इस वर्ष की थीम के बारे में जानकारी दी। इसके बाद नर्सिंग स्टाफ से ओआरएस से संबंधित प्रश्न पूछे गए और विजेता को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

यह कार्यक्रम स्वास्थ्यकर्मियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों में डायरिया के दौरान समय पर देखभाल और चिकित्सकीय सलाह के महत्व को रेखांकित करने वाला रहा।