कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे उद्घाटन के 12वें दिन क्षतिग्रस्त, उन्नाव में मरम्मत कार्य शुरू

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Digital UP News Desk

उन्नावः उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जिस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन बड़े उत्साह के साथ किया गया था, उसी एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा उद्घाटन के महज 12 दिन बाद ही क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि अचलगंज क्षेत्र के कोरारी गांव के पास किलोमीटर संख्या 63-64 के बीच मुख्य सड़क कई मीटर तक टूट गई है। हालांकि, संबंधित कार्यदायी संस्था ने सड़क की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

बताया जा रहा है कि उन्नाव जिले के अचलगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत कोरारी गांव के समीप एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे पर सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त दिखाई दिया। घटना का वीडियो किसी राहगीर द्वारा रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया।

वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने एक्सप्रेसवे की मजबूती और निर्माण प्रक्रिया को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दीं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।

उद्घाटन के समय हुई थी एक्सप्रेसवे की सराहना

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल किया जाता है। इसके उद्घाटन के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को आधुनिक भारत की बेहतर सड़क अवसंरचना का उदाहरण बताया था।

इसके अलावा, विभिन्न मंचों पर इस एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक की चर्चा भी हुई थी। वहीं, कुछ वक्ताओं द्वारा इसकी तुलना अंतरराष्ट्रीय स्तर की सड़कों से भी की गई थी। ऐसे में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क के क्षतिग्रस्त होने का दावा सामने आने से यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।

सड़क टूटने का दावा, जांच की बढ़ी मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का एक हिस्सा कई मीटर तक क्षतिग्रस्त दिखाई दिया, जिससे वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। हालांकि, किसी दुर्घटना या जनहानि की सूचना सामने नहीं आई है।

इसी बीच कई लोगों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा करने की मांग भी उठाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई सड़क परियोजना में यदि शुरुआती दिनों में तकनीकी समस्या सामने आती है तो उसकी विस्तृत जांच आवश्यक होती है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

मरम्मत कार्य में जुटी कार्यदायी संस्था

मामले की जानकारी सार्वजनिक होने और वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित कार्यदायी संस्था ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के लिए मशीनें और तकनीकी कर्मचारी लगाए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, प्रभावित हिस्से को सुरक्षित करते हुए आवश्यक तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं ताकि यातायात सामान्य रूप से संचालित हो सके। हालांकि, संबंधित विभाग की ओर से अभी तक इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है कि सड़क किन कारणों से क्षतिग्रस्त हुई।

गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल

इस घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सड़क विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी एक्सप्रेसवे का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जाता है। इसलिए यदि निर्माण के कुछ ही दिनों के भीतर किसी हिस्से में क्षति दिखाई देती है तो उसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं, जैसे—

  • निर्माण सामग्री की गुणवत्ता,
  • जल निकासी व्यवस्था,
  • मिट्टी का बैठना,
  • भारी वर्षा या अन्य तकनीकी कारण।

हालांकि, इन कारणों की पुष्टि केवल अधिकृत तकनीकी जांच के बाद ही की जा सकती है।

अधिकारियों की रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क क्षतिग्रस्त होने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे।

यदि जांच में किसी प्रकार की तकनीकी कमी या निर्माण में लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं, यदि यह प्राकृतिक या अन्य तकनीकी कारणों से हुआ है तो उसके अनुरूप स्थायी समाधान अपनाया जाएगा।

यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा होती है। इसलिए सड़क पर किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या सामने आने पर उसका तत्काल समाधान आवश्यक होता है।

इसी क्रम में कार्यदायी संस्था द्वारा मरम्मत कार्य शुरू किया जाना सकारात्मक कदम माना जा रहा है। साथ ही, यह भी अपेक्षा की जा रही है कि संबंधित विभाग पूरे मार्ग का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेगा कि अन्य हिस्सों में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या मौजूद न हो।

सोशल मीडिया पर बनी चर्चा

घटना का वीडियो वायरल होने के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। अनेक लोगों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्न उठाए, जबकि कुछ लोगों ने आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की सलाह दी।

डिजिटल युग में वायरल वीडियो तेजी से लोगों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में किसी भी घटना पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी और जांच रिपोर्ट का इंतजार करना आवश्यक माना जाता है।

उन्नाव जिले में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने का मामला फिलहाल चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद संबंधित कार्यदायी संस्था ने सड़क की मरम्मत शुरू कर दी है। हालांकि, सड़क क्षतिग्रस्त होने के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा।

फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार की तकनीकी कमी सामने आती है तो उसके अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाने की संभावना है। वहीं, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मरम्मत कार्य जारी है।

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