हमीरपुर के कुरारा में बाल श्रम के खिलाफ विशेष अभियान, तीन बाल एवं किशोर श्रमिक मुक्त, सेवायोजकों को चेतावनी
रिपोर्ट – मोहम्मद अकरम
हमीरपुर: बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में हमीरपुर प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कस्बा कुरारा में विशेष निरीक्षण एवं जागरूकता अभियान चलाया।
जिलाधिकारी अभिषेक गोयल के निर्देशन में श्रम विभाग, चाइल्ड लाइन, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया।
अभियान के दौरान तीन बाल एवं किशोर श्रमिकों को कार्य से मुक्त कराया गया तथा संबंधित सेवायोजकों को भविष्य में बाल श्रम न कराने की कड़ी चेतावनी दी गई।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बच्चों से श्रम कराना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य के अधिकारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसी उद्देश्य से जनपद में लगातार निरीक्षण और जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
विशेष अभियान के तहत हुई संयुक्त कार्रवाई
श्रम विभाग के अनुसार यह अभियान बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तथा बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के तहत संचालित किया गया।
संयुक्त टीम ने कस्बा कुरारा के विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया, जहां से तीन बाल एवं किशोर श्रमिकों की पहचान की गई। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें श्रम से मुक्त कराया गया।
साथ ही संबंधित तीन सेवायोजकों के विरुद्ध निरीक्षण टिप्पणियां जारी की गईं और भविष्य में बाल श्रम न कराने की सख्त चेतावनी दी गई।
1 जुलाई से 31 अगस्त तक चल रहा विशेष अभियान
प्रशासन ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार 1 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक जनपद में विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है।
इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं—
- बाल एवं किशोर श्रमिकों की पहचान करना।
- उन्हें कार्य से मुक्त कराना।
- संबंधित बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया सुनिश्चित करना।
- असुरक्षित परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों को संरक्षण उपलब्ध कराना।
- समाज में बाल श्रम के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
अधिकारियों का कहना है कि अभियान के दौरान केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि पुनर्वास और शिक्षा से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने दिए नियमित निरीक्षण के निर्देश
जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि जनपद में नियमित रूप से निरीक्षण अभियान चलाए जाएं।
उन्होंने विशेष रूप से निम्न स्थानों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए—
- ढाबे
- रेस्टोरेंट
- कैटरिंग प्रतिष्ठान
- हलवाई की दुकानें
- शादी घर
- डीजे एवं गमला लाइट प्रतिष्ठान
- अन्य व्यावसायिक संस्थान
उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर समय-समय पर निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं भी बाल श्रम नहीं कराया जा रहा हो।
व्यापारिक संगठनों से भी मांगा सहयोग
जिलाधिकारी ने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज और व्यापारिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
उन्होंने व्यापारिक संगठनों से अपील की कि वे अपने सदस्यों को बाल श्रम कानूनों के बारे में जागरूक करें और किसी भी प्रतिष्ठान में नाबालिग बच्चों से कार्य न कराया जाए।
इसके साथ ही आम नागरिकों से भी अनुरोध किया गया कि यदि कहीं बाल श्रम की जानकारी मिले तो संबंधित विभाग को तत्काल सूचित करें।
कानून में सख्त दंड का प्रावधान
श्रम विभाग ने अभियान के दौरान प्रतिष्ठान संचालकों को बाल श्रम कानूनों की जानकारी भी दी।
अधिकारियों ने बताया कि किसी भी नाबालिग बालक अथवा किशोर से प्रतिबंधित कार्य कराना कानूनन दंडनीय अपराध है।
दोषी पाए जाने पर संबंधित सेवायोजक के विरुद्ध—
- ₹20,000 से ₹70,000 तक का जुर्माना
- 6 माह से 2 वर्ष तक का कारावास
का प्रावधान है।
इसलिए सभी प्रतिष्ठान संचालकों से कानून का पालन करने की अपील की गई।
न्यूनतम वेतन नियमों की भी दी गई जानकारी
निरीक्षण अभियान के दौरान केवल बाल श्रम ही नहीं, बल्कि श्रमिकों के न्यूनतम वेतन से संबंधित नियमों की भी जानकारी दी गई।
श्रम विभाग ने बताया कि शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम भुगतान करना भी नियमों का उल्लंघन है।
वर्तमान निर्धारित मासिक न्यूनतम वेतन—
- अकुशल श्रमिक: ₹12,356
- अर्द्धकुशल श्रमिक: ₹13,590
- कुशल श्रमिक: ₹15,224
यदि किसी प्रतिष्ठान में इससे कम वेतन दिया जाता है तो न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के तहत विधिक कार्रवाई की जा सकती है।
पुनर्वास और शिक्षा पर विशेष ध्यान
अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को केवल कार्य से हटाना ही पर्याप्त नहीं है।
उनके पुनर्वास, शिक्षा, परामर्श और आवश्यक सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे दोबारा श्रम में न जाएं और उन्हें शिक्षा एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हो सके।
संयुक्त टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इस अभियान में कई विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने समन्वित रूप से कार्य किया।
संयुक्त टीम में शामिल रहे—
- सीडब्ल्यूसी मजिस्ट्रेट श्रीमती विभा भारती
- श्रम प्रवर्तन अधिकारी विजयपाल सोनकर
- सनद श्रीवास्तव
- ज्ञानेन्द्र सिंह
- चाइल्ड लाइन के सफवान अहमद
- कुलदीप द्विवेदी
- एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना प्रभारी राकेश कुमार
- कांस्टेबल मेघा मिश्रा
- श्रम विभाग के मोहम्मद उबैद उल्लाह
- सूरजभान
- अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी
इन सभी विभागों के समन्वित प्रयास से अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया।
बाल श्रम उन्मूलन में जनभागीदारी की जरूरत
बाल श्रम को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी आवश्यक है।
यदि परिवार, विद्यालय, व्यापारी, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर बच्चों की शिक्षा और अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाएं, तो बाल श्रम जैसी समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हमीरपुर के कुरारा में चलाया गया विशेष अभियान प्रशासन की बाल अधिकारों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है। तीन बाल एवं किशोर श्रमिकों को सुरक्षित रूप से श्रम से मुक्त कराना और संबंधित सेवायोजकों को चेतावनी देना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इसके साथ ही प्रशासन द्वारा नियमित निरीक्षण, जनजागरूकता, पुनर्वास और कानून के प्रभावी अनुपालन पर दिया जा रहा जोर यह संदेश देता है कि बच्चों का स्थान कार्यस्थल नहीं, बल्कि विद्यालय और सुरक्षित वातावरण है।
यदि समाज और प्रशासन मिलकर इसी प्रकार निरंतर प्रयास करते रहें, तो बाल श्रम मुक्त समाज की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति संभव है।

