कानपुर में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन, संशोधन विधेयक 2026 की प्रतियां फाड़कर रखी वापसी की मांग

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: अधिवक्ताओं से जुड़े प्रस्तावित संशोधन विधेयक 2026 को लेकर कानपुर में अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने विधेयक के प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए इसकी प्रतियां फाड़ीं और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने सुरक्षा, बीमा, चिकित्सा सुविधा, पेंशन और युवा अधिवक्ताओं के हितों से जुड़े मुद्दे उठाए। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि प्रस्तावित विधेयक में उनके कल्याण और सुरक्षा से संबंधित ठोस प्रावधान नहीं हैं, तो यह विधेयक उनके हितों की पूर्ति नहीं करता।

प्रदर्शनकारी नारे लगाते हुए शताब्दी गेट पहुंचे। इस दौरान उन्होंने संशोधन विधेयक 2026 को वापस लेने की मांग की और कहा कि अधिवक्ताओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को विधेयक में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

संशोधन विधेयक की प्रतियां फाड़कर जताया विरोध

कानपुर के अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन के दौरान संशोधन विधेयक 2026 की प्रतियां फाड़कर अपना विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अधिवक्ताओं के लिए सुरक्षा और कल्याण से जुड़े विषयों को नजरअंदाज कर किसी भी नए संशोधन को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान विधेयक की वापसी की मांग करते हुए नारे लगाए। उनका कहना था कि अधिवक्ता समुदाय लंबे समय से सुरक्षा, चिकित्सा, बीमा और पेंशन जैसी सुविधाओं की मांग करता रहा है।

इसके बावजूद, उनके अनुसार, प्रस्तावित संशोधन विधेयक में इन मुद्दों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है।

पंजीकरण शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव पर आपत्ति

प्रदर्शन के दौरान पं. रवीन्द्र शर्मा, पूर्व अध्यक्ष लॉयर्स एसोसिएशन, ने प्रस्तावित पंजीकरण शुल्क को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान शुल्क 750 रुपये से बढ़ाकर 22,500 रुपये किए जाने का प्रस्ताव आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए वकालत के पेशे में प्रवेश कठिन हो सकता है। उनके अनुसार, इससे वकालत का क्षेत्र सीमित वर्ग तक सिमटने का खतरा पैदा हो सकता है।

अधिवक्ताओं ने मांग की कि पंजीकरण शुल्क बढ़ाने से पहले इस निर्णय के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाए।

अधिवक्ता सुरक्षा कानून की मांग

अधिवक्ताओं ने कहा कि उनके लिए सुरक्षा से जुड़ा कानून बेहद जरूरी है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट जैसे प्रावधानों की आवश्यकता है।

पं. रवीन्द्र शर्मा ने कहा कि यदि अधिवक्ताओं की सुरक्षा से संबंधित प्रभावी कानून का प्रावधान नहीं किया जाता, तो केवल संशोधन विधेयक लाना पर्याप्त नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि अधिवक्ता अपने पेशे के दौरान विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों में काम करते हैं। इसलिए, उनके लिए कानूनी सुरक्षा और संरक्षण की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।

अधिवक्ताओं ने मांग की कि अधिवक्ता सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को विधेयक में शामिल किया जाए।

बीमा और कल्याण निधि को लेकर भी सवाल

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता कल्याण निधि और बीमा योजना को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि अधिवक्ताओं के लिए कल्याण योजनाओं की स्पष्ट जानकारी और प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।

अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि किसी योजना में बीमा या कल्याण निधि का प्रावधान है, तो उसके तहत मिलने वाली सुविधाओं, पात्रता और प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि अधिवक्ता समुदाय के कल्याण के लिए बनाई जाने वाली योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका लाभ वास्तविक रूप से अधिवक्ताओं तक पहुंचना चाहिए।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं की पेंशन योजना पर भी उठे सवाल

अधिवक्ताओं ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उनका कहना था कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना की राशि कितनी होगी और इसे कब लागू किया जाएगा, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, लंबे समय तक न्यायिक व्यवस्था और समाज की सेवा करने वाले अधिवक्ताओं के लिए सम्मानजनक सामाजिक सुरक्षा आवश्यक है।

उन्होंने मांग की कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं की पेंशन योजना को स्पष्ट और प्रभावी बनाया जाए।

युवा अधिवक्ताओं के लिए ठोस प्रावधान की मांग

प्रदर्शन में युवा अधिवक्ताओं के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया। अधिवक्ताओं ने कहा कि नए अधिवक्ताओं को शुरुआती वर्षों में आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में, उनके लिए सहायता, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक सहयोग से जुड़े प्रावधान किए जाने चाहिए।

अधिवक्ताओं का कहना है कि युवा अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध न होने से कई प्रतिभाशाली युवा इस पेशे से दूर हो सकते हैं।

इसलिए, संशोधन विधेयक में युवा अधिवक्ताओं के हितों को भी स्पष्ट रूप से शामिल करने की मांग की गई।

परिवार सहित कैशलेस इलाज की मांग

प्रदर्शनकारियों ने अधिवक्ताओं और उनके परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की भी मांग की। उनका कहना था कि अधिवक्ताओं को सपरिवार स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध होनी चाहिए।

अधिवक्ताओं ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में इलाज का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इसलिए, अधिवक्ता कल्याण योजनाओं के तहत अधिवक्ताओं और उनके परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

उनके अनुसार, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े इन मुद्दों को नजरअंदाज कर कोई भी संशोधन अधूरा रहेगा।

विधेयक वापस लेने की मांग

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने संशोधन विधेयक 2026 को वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि विधेयक में अधिवक्ता समुदाय की प्रमुख मांगों को पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया है।

अधिवक्ताओं ने कहा कि सरकार को विधेयक पर अधिवक्ता संगठनों के साथ व्यापक चर्चा करनी चाहिए। इसके बाद ही ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए, जो अधिवक्ताओं के हितों और उनकी वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखे।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपने मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाते रहेंगे।

बड़ी संख्या में अधिवक्ता रहे मौजूद

प्रदर्शन में कई अधिवक्ताओं ने भाग लिया। इनमें कुलदीप आनंद, विजय कुमार, ईशू सोनकर, भगवत प्रसाद, कुलदीप यादव, संजीव कपूर, आयुष शुक्ला, अंसार, बृजेंद्र सिंह, जितेंद्र कुमार, शिवम गंगवार, इंद्रेश मिश्रा, वीर जोशी सहित अन्य अधिवक्ता शामिल रहे।

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई और संशोधन विधेयक 2026 की वापसी की मांग दोहराई।

कुल मिलाकर, कानपुर में अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में प्रदर्शन करते हुए इसकी प्रतियां फाड़ीं। अधिवक्ताओं ने पंजीकरण शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव, अधिवक्ता सुरक्षा कानून की अनुपस्थिति, बीमा, कल्याण निधि, वरिष्ठ अधिवक्ता पेंशन, युवा अधिवक्ताओं के हितों और परिवार सहित कैशलेस इलाज जैसे मुद्दे उठाए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से विधेयक को वापस लेने और अधिवक्ता संगठनों के साथ व्यापक चर्चा के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।

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