यूपी में थोक दवा लाइसेंस पर अस्थायी रोक, नए लाइसेंस से पहले विक्रेताओं का होगा सत्यापन

cfbe1444-27ae-4c40-b449-ead5e5cd5bdf

Digital UP News Desk

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता और दवा बिक्री व्यवस्था को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश में थोक दवा लाइसेंस जारी करने से पहले दवा विक्रेताओं के सत्यापन की प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है। इसके तहत थोक और फुटकर दवा विक्रेताओं का सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने तक नए थोक दवा लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे।

यह निर्णय दवाओं की बिक्री व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। विभाग का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि दवा कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों की वास्तविक स्थिति, संचालकों और लाइसेंस से संबंधित जानकारी विभागीय रिकॉर्ड से मेल खाती हो।

FSDA आयुक्त ने जिलों को जारी किए निर्देश

इस संबंध में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त की ओर से प्रदेश के सभी जिलों को निर्देश जारी किए गए हैं। निर्देशों के अनुसार, जिलों में थोक और फुटकर दवा विक्रेताओं का सत्यापन कराया जाएगा।

विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि दवा कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों की उपलब्ध जानकारी और वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाए। इसके अलावा, लाइसेंसधारक प्रतिष्ठानों की गतिविधियों, पते और अन्य आवश्यक विवरणों की भी जांच की जाएगी।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य दवा वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि दवा बिक्री का काम निर्धारित नियमों के अनुसार ही संचालित हो।

सत्यापन तक नया थोक लाइसेंस जारी नहीं होगा

FSDA के निर्देशों के बाद सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने तक नए थोक दवा लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे। इसका अर्थ यह है कि जो लोग नया थोक दवा कारोबार शुरू करने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन करेंगे, उनके आवेदन पर सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, यह प्रक्रिया मौजूदा दवा कारोबार को सीधे बंद करने से संबंधित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य नए लाइसेंस जारी करने से पहले संबंधित आवेदक और प्रतिष्ठान का आवश्यक सत्यापन करना है।

विभाग की ओर से जिलों में अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सत्यापन कार्य को आगे बढ़ाएं। इसके बाद ही नए लाइसेंस से संबंधित आवेदनों पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।

थोक और फुटकर दवा विक्रेताओं का होगा सत्यापन

दवा कारोबार में थोक और फुटकर दोनों प्रकार के विक्रेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। थोक विक्रेताओं के माध्यम से दवाएं विभिन्न मेडिकल स्टोर और अन्य अधिकृत विक्रेताओं तक पहुंचती हैं। वहीं, फुटकर विक्रेता सीधे उपभोक्ताओं को दवाएं उपलब्ध कराते हैं।

ऐसे में विभाग ने दोनों श्रेणियों के दवा विक्रेताओं के सत्यापन पर जोर दिया है। सत्यापन के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान की जानकारी, लाइसेंस से जुड़े विवरण और कारोबारी गतिविधियों की जांच की जा सकती है।

इसके साथ ही, विभागीय रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच किसी तरह का अंतर पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य दवा कारोबार की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना है।

नकली दवाओं की बिक्री पर नियंत्रण की दिशा में कदम

दवा बाजार में नकली या मानकों के अनुरूप न होने वाली दवाओं की बिक्री की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों को देखते हुए दवा विक्रेताओं के सत्यापन की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विभाग का प्रयास है कि दवा आपूर्ति श्रृंखला में शामिल प्रतिष्ठानों की पहचान और रिकॉर्ड व्यवस्थित रहे। इसके लिए लाइसेंस प्रक्रिया में सत्यापन को अधिक महत्व दिया जा रहा है।

हालांकि, किसी भी दवा की गुणवत्ता की जांच के लिए निर्धारित कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। इसलिए, सत्यापन अभियान को दवा कारोबार की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा सकता है।

दवा कारोबारियों को नियमों का पालन करने की अपील

दवा कारोबार से जुड़े लोगों से विभागीय नियमों का पालन करने की अपेक्षा की गई है। कारोबारियों को अपने लाइसेंस, प्रतिष्ठान और अन्य आवश्यक दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने की सलाह दी जा सकती है, ताकि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।

इसके अलावा, दवाओं की खरीद और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड को भी नियमानुसार बनाए रखना जरूरी है। दवा कारोबार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अधिकृत स्रोतों से दवाओं की खरीद और निर्धारित नियमों के अनुसार बिक्री महत्वपूर्ण है।

विभागीय अधिकारियों का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि दवा बिक्री व्यवस्था में नियमों का पालन हो और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध हों।

जिलों में अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण

FSDA आयुक्त के निर्देशों के बाद अब जिलास्तर पर विभागीय अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। उन्हें दवा विक्रेताओं से संबंधित जानकारी जुटाने और सत्यापन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।

जिलों में अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड और दवा प्रतिष्ठानों की वास्तविक स्थिति का मिलान करना होगा। इसके बाद संबंधित रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस प्रक्रिया में विभागीय समन्वय भी महत्वपूर्ण रहेगा। क्योंकि दवा कारोबार से जुड़े रिकॉर्ड कई स्तरों पर उपलब्ध होते हैं, इसलिए अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करना होगा।

दवा लाइसेंस व्यवस्था में बढ़ेगी पारदर्शिता

नए थोक दवा लाइसेंस जारी करने से पहले सत्यापन अनिवार्य किए जाने से लाइसेंस व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। इससे विभाग को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति और संबंधित प्रतिष्ठान वास्तविक रूप से दवा कारोबार के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करता है या नहीं।

इसके अलावा, मौजूदा दवा विक्रेताओं का सत्यापन भी विभागीय रिकॉर्ड को अपडेट करने में सहायक हो सकता है। इससे भविष्य में निरीक्षण और निगरानी की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

हालांकि, सत्यापन की प्रक्रिया में समय लग सकता है। इसलिए, दवा कारोबारियों को विभागीय निर्देशों और प्रक्रिया का पालन करते हुए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।

उपभोक्ताओं के हित में उठाया गया कदम

दवा से जुड़ा कारोबार सीधे लोगों के स्वास्थ्य से संबंधित होता है। इसलिए, दवाओं की बिक्री और वितरण व्यवस्था में नियमों का पालन बेहद जरूरी है। विभाग की ओर से उठाया गया यह कदम उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एक ओर जहां नए थोक लाइसेंस जारी करने से पहले सत्यापन किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर दवा विक्रेताओं के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने पर भी जोर रहेगा। इससे दवा कारोबार की निगरानी बेहतर हो सकती है।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में FSDA द्वारा थोक और फुटकर दवा विक्रेताओं के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू किए जाने से दवा लाइसेंस व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सत्यापन पूरा होने तक नए थोक दवा लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य दवा कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाना और नियमों के अनुरूप बिक्री व्यवस्था को मजबूत करना है।

You may have missed