बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में चंद्रशेखर आजाद और लोकमान्य तिलक जयंती पर राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम का किया आयोजन

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी

कानपुर: राष्ट्रनिर्माताओं के विचारों और आदर्शों से नई पीढ़ी को प्रेरित करने के उद्देश्य से बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज, बेनाझाबर में शुक्रवार को अमर क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद एवं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाई गई।

इस अवसर पर विद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में सराबोर दिखाई दिया। विद्यार्थियों ने भाषण, कविता, संस्कृत उद्बोधन और नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से दोनों महान विभूतियों के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके अमूल्य योगदान को याद किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जयंती मनाना नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, समय के महत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी था। कार्यक्रम में विद्यालय प्रशासन, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं तथा अतिथि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि के आगमन के बाद दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्पण और मंगलाचरण के साथ हुआ। विद्यालय के औदार्य निकेतन के प्रभारी श्री अनिल कुमार तिवारी ने मुख्य अतिथि का परिचय कराया और उनका आत्मीय स्वागत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत से ही विद्यालय का वातावरण देशभक्ति और प्रेरणादायक विचारों से परिपूर्ण रहा। मंच को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भागीदारी निभाई।

विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए अपने विचार

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों ने अपने-अपने अंदाज में दोनों महान राष्ट्रनायकों के जीवन और उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला।

कक्षा VII-A के छात्र नितिन पाल ने संस्कृत भाषा में प्रभावशाली उद्बोधन प्रस्तुत किया। उनके भाषण ने उपस्थित सभी लोगों का ध्यान आकर्षित किया और भारतीय संस्कृति तथा राष्ट्रभक्ति के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

इसके बाद कक्षा XI-A की छात्रा वर्तिका शुक्ला ने अंग्रेज़ी भाषा में अपने विचार व्यक्त करते हुए चंद्रशेखर आजाद और लोकमान्य तिलक के योगदान को वैश्विक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और भाषा कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया।

कविता ने जगाया राष्ट्रप्रेम का भाव

कक्षा XII के छात्र मनिमय अवस्थी ने ओजपूर्ण कविता का पाठ किया। कविता में देशप्रेम, त्याग, साहस और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का भाव प्रमुखता से उभरा। उनकी प्रस्तुति ने सभागार में उपस्थित सभी लोगों को भावुक और प्रेरित किया।

कविता के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि राष्ट्र के प्रति समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा ही एक सशक्त समाज और मजबूत राष्ट्र की पहचान है।

लघु नाटिका बनी कार्यक्रम का आकर्षण

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा कक्षा VI के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत चंद्रशेखर आजाद के जीवन पर आधारित लघु नाटिका रही।

विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से आजाद के साहस, देशभक्ति और संघर्षपूर्ण जीवन को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। नाटिका में उनके जीवन के प्रमुख प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया, जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।

इस प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को इतिहास से जोड़ने के साथ-साथ यह संदेश भी दिया कि महान व्यक्तित्वों का जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्य अतिथि ने दिया प्रेरणादायी संदेश

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. उपेन्द्र ‘अयोध्या’, निदेशक, जागरण इंस्टीट्यूट, ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का संपूर्ण जीवन देश, समाज और स्वराज के लिए समर्पित रहा।

उन्होंने कहा कि तिलक का प्रसिद्ध विचार “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा” आज भी प्रत्येक भारतीय को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है।

डॉ. उपेन्द्र ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने जीवन का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए अनुशासन, परिश्रम तथा समय का सदुपयोग करें।

समय और अनुशासन के महत्व पर दिया जोर

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि विद्यार्थी जीवन किसी भी व्यक्ति के भविष्य की मजबूत नींव होता है। इसलिए इस अवधि में समय का सदुपयोग, अनुशासित जीवनशैली और सकारात्मक सोच अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आजादी केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्वों का ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन करे।

उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी कहा कि वे देश के संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का सम्मान करते हुए अपने व्यक्तित्व का विकास करें।

राष्ट्रभक्ति और संस्कारों का मिला संदेश

समारोह के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करना नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार, जागरूक और संवेदनशील नागरिक का निर्माण करना भी है।

चंद्रशेखर आजाद के साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम तथा लोकमान्य तिलक के नेतृत्व, विचारों और सामाजिक चेतना से विद्यार्थियों को प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यालय ने यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी यदि महान स्वतंत्रता सेनानियों और समाज सुधारकों के आदर्शों को अपनाती है, तो वह देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

आभार और राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत मेंदिव्य दीक्षित, कैप्टन, औदार्य निकेतन ने मुख्य अतिथि, विद्यालय परिवार, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इसके पश्चात सभी ने एक साथ राष्ट्रगान गाया और पूरे कार्यक्रम का गरिमामय समापन हुआ। राष्ट्रगान के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्र के प्रति सम्मान और एकता का परिचय दिया।

विद्यालय परिवार की रही सक्रिय सहभागिता

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री बृजमोहन कुमार सिंह, उपप्रधानाचार्या श्रीमती मंजूबाला श्रीवास्तव, समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

विद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के प्रेरणादायी आयोजनों को जारी रखने की बात कही।

बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज, कानपुर में आयोजित चंद्रशेखर आजाद एवं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, समय के महत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम बना। भाषण, कविता, संस्कृत उद्बोधन और लघु नाटिका जैसी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. उपेन्द्र ‘अयोध्या’ के प्रेरणादायी विचारों ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि सफलता का मार्ग अनुशासन, परिश्रम, समय के सदुपयोग और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने से होकर गुजरता है।

ऐसे आयोजन न केवल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक होते हैं, बल्कि उन्हें अपने इतिहास, संस्कृति और महान राष्ट्रनायकों के आदर्शों से भी जोड़ते हैं।

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