कानपुर देहात मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को किया गया निलंबित, नोटों की गड्डियों वाली फोटो पर हुई कार्रवाई

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रिपोर्ट – बलराम चतुर्वेदी 

कानपुर देहात: कानपुर देहात मेडिकल कॉलेज से जुड़ी नोटों की गड्डियों वाली वायरल फोटो के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने कार्रवाई की है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल हरप्रीत सिंह को निलंबित कर दिया गया है। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।

वहीं, इस पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) वंदना सिंह, डॉ. विमल यादव और फार्मासिस्ट चंद्रकांत की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वायरल फोटो के बाद शुरू हुई जांच

कानपुर देहात मेडिकल कॉलेज से जुड़ी एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इस तस्वीर में नोटों की गड्डियां दिखाई दे रही थीं। फोटो वायरल होने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में चर्चा तेज हो गई।

मामला सामने आने के बाद शासन स्तर पर भी संज्ञान लिया गया। इसके बाद पूरे प्रकरण की जांच शुरू की गई। प्रारंभिक स्तर पर सामने आए तथ्यों के आधार पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल हरप्रीत सिंह के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।

हालांकि, वायरल फोटो में दिखाई दे रही रकम का वास्तविक संदर्भ क्या है और यह धनराशि किससे संबंधित है, इसकी पूरी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल, विभागीय स्तर पर मामले की जांच जारी है।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दिए कार्रवाई के आदेश

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। सरकार की ओर से यह संदेश दिया गया है कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता या लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

वायरल फोटो के सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू की। इसके बाद प्रिंसिपल के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।

सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

CMS समेत तीन अन्य लोगों की भूमिका जांच के घेरे में

इस पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज की CMS वंदना सिंह, डॉ. विमल यादव और फार्मासिस्ट चंद्रकांत की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

जांच अधिकारियों की ओर से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वायरल फोटो से जुड़े घटनाक्रम में इन लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं। इसके अलावा, फोटो में दिखाई दे रही नोटों की गड्डियों के संबंध में भी आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।

फिलहाल, इन अधिकारियों और कर्मचारियों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। इसलिए, किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।

विभागीय जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के निलंबन के बाद अब विभागीय जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच के दौरान वायरल फोटो की सत्यता, उसके संदर्भ और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।

इसके अलावा, यह भी देखा जाएगा कि फोटो कब और किस परिस्थिति में ली गई थी। नोटों की गड्डियों से जुड़े मामले में यदि कोई वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

विभागीय जांच में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं। साथ ही, मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।

स्वास्थ्य विभाग में कार्रवाई से बढ़ी हलचल

कानपुर देहात मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के निलंबन के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को लेकर सरकार लगातार सख्त रुख अपनाती रही है।

ऐसे में वायरल फोटो के मामले में हुई कार्रवाई को सरकार की गंभीरता के तौर पर देखा जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी यह स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि किसी भी मामले में नियमों की अनदेखी पाए जाने पर कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, अभी जांच पूरी नहीं हुई है। इसलिए, पूरे मामले से जुड़े सभी तथ्यों के सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल फोटो से उठे सवाल

सोशल मीडिया पर किसी भी तस्वीर के वायरल होने के बाद उसके संदर्भ और सत्यता की जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में भी नोटों की गड्डियों वाली फोटो सामने आने के बाद कई सवाल उठे।

अब जांच एजेंसियां और विभागीय अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि फोटो किस परिस्थिति में ली गई और इसमें दिखाई दे रही रकम का संबंध किस मामले से है।

जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल फोटो के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं। फिलहाल, सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया है।

आगे और कार्रवाई की संभावना

विभागीय जांच के परिणाम के आधार पर आगे और कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। यदि जांच में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी विभागीय नियमों के तहत कदम उठाया जा सकता है।

वहीं, यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या किसी अन्य प्रकार की गंभीर गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।

सरकार की ओर से इस मामले में पारदर्शी जांच पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वायरल फोटो से जुड़े सभी सवालों का जवाब सामने आ सके।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल, कानपुर देहात मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल हरप्रीत सिंह के निलंबन के बाद मामले की जांच आगे बढ़ रही है। CMS वंदना सिंह, डॉ. विमल यादव और फार्मासिस्ट चंद्रकांत की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल फोटो में दिखाई दे रही नोटों की गड्डियों का पूरा मामला क्या है और इसमें किन लोगों की भूमिका रही है।

कुल मिलाकर, कानपुर देहात मेडिकल कॉलेज की वायरल नोटों की गड्डियों वाली फोटो के मामले में सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रिंसिपल हरप्रीत सिंह के निलंबन के बाद अब विभागीय जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा।

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