पद्म विभूषण कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल के निर्वाण दिवस पर कानपुर में गोष्ठी, जीवन संघर्ष को किया याद
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था, विवेक शक्ति और टीम तालमेल के संयुक्त तत्वावधान में पद्म विभूषण कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल के निर्वाण दिवस पर विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम, आजाद हिंद फौज, चिकित्सा सेवा और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में डॉ. लक्ष्मी सहगल के योगदान को याद करते हुए उनके जीवन और विचारों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग महासंघ के अध्यक्ष श्री सुरेश गुप्ता ने की, जबकि संचालन श्री दिनेश अग्निहोत्री ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, राजनीतिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
आजाद हिंद फौज में निभाई ऐतिहासिक भूमिका
गोष्ठी के मुख्य वक्ता वरिष्ठ समाजवादी श्री कुलदीप सक्सेना ने कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल के जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. लक्ष्मी सहगल का जीवन संघर्ष, सेवा और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रेरणादायक उदाहरण है।
उन्होंने बताया कि उनके जीवन का प्रारंभिक चरण शिक्षा और चिकित्सा की पढ़ाई से जुड़ा रहा। इसके बाद उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब उन्होंने सिंगापुर में आजाद हिंद फौज की रानी झांसी रेजिमेंट का नेतृत्व किया। इस भूमिका में उन्होंने महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व क्षमता का ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया।
कुलदीप सक्सेना ने कहा कि कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल केवल एक चिकित्सक ही नहीं थीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण योद्धा भी थीं। आजाद हिंद फौज में उनकी भूमिका ने उस दौर में महिलाओं के प्रति समाज की पारंपरिक धारणाओं को चुनौती दी। इसके साथ ही वे आरजी हुकूमत-ए-हिंद के प्रथम महिला मंत्रिमंडल की सदस्य भी रहीं।
कानपुर में शुरू की गरीबों की सेवा
भारत लौटने के बाद कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा कानपुर में जनसेवा को समर्पित किया। विवाह के बाद उन्होंने वर्ष 1949 में कानपुर के नवाबगंज अस्पताल में चिकित्सा सेवा शुरू की। इसके बाद उनका जुड़ाव शहर के कामगारों, गरीबों, महिलाओं और वंचित वर्गों से लगातार मजबूत होता गया।
वक्ताओं ने बताया कि डॉ. लक्ष्मी सहगल ने चिकित्सा को केवल पेशा नहीं माना, बल्कि इसे समाजसेवा का माध्यम बनाया। आर्य नगर क्षेत्र में उन्होंने कामगार महिला समिति की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने डॉ. शोभा बिज और डॉ. देवेंद्र कौर जैसी सहयोगियों के साथ मिलकर अस्पताल का संचालन किया और जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई।
उनकी पहचान धीरे-धीरे एक ऐसी चिकित्सक के रूप में बनी, जो आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए हमेशा उपलब्ध रहती थीं। यही कारण था कि उन्हें आम लोगों के बीच प्यार और सम्मान से ‘गरीबों की डॉक्टर’ कहा जाता था। वक्ताओं के अनुसार, उस दौर में भी उनकी फीस बेहद कम रही और उन्होंने चिकित्सा सेवा को मुनाफे का माध्यम नहीं बनने दिया।
महिलाओं, मजदूरों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष
गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल का सामाजिक संघर्ष केवल चिकित्सा सेवा तक सीमित नहीं था। उन्होंने महिलाओं, मजदूरों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए भी लगातार आवाज उठाई।
श्री कुलदीप सक्सेना ने कहा कि डॉ. सहगल सामाजिक असमानता और सांप्रदायिकता के खिलाफ स्पष्ट और मुखर विचार रखती थीं। उन्होंने अपने जीवन में कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। इसलिए उनका जीवन आज भी सामाजिक न्याय और मानवता के लिए काम करने वाले लोगों को प्रेरणा देता है।
वक्ताओं ने कहा कि आज जब समाज में आर्थिक असमानता और सामाजिक चुनौतियां मौजूद हैं, ऐसे समय में डॉ. लक्ष्मी सहगल के विचार और कार्य और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। उन्होंने सेवा, समानता और मानवीय संवेदना को अपने जीवन का आधार बनाया।
एयरपोर्ट का नाम डॉ. लक्ष्मी सहगल के नाम पर रखने की मांग
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल के योगदान को देखते हुए किसी प्रमुख सार्वजनिक संस्थान या एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखा जाए। वक्ताओं का कहना था कि यह उनके योगदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि डॉ. लक्ष्मी सहगल का संबंध कानपुर से गहराई से जुड़ा रहा। उन्होंने दशकों तक शहर के गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा की। इसलिए कानपुर में उनके नाम से किसी प्रमुख सार्वजनिक स्थल या संस्थान का नामकरण किया जाना उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है।
सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों ने दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल के चित्र पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका, चिकित्सा सेवा और सामाजिक संघर्ष देश के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री सुरेश गुप्ता ने कहा कि डॉ. लक्ष्मी सहगल का जीवन समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणादायक है। वहीं, कार्यक्रम के संचालक श्री दिनेश अग्निहोत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को ऐसे महान व्यक्तित्वों के जीवन और संघर्ष से परिचित कराया जाना आवश्यक है।
इस अवसर पर श्री राजकुमार अग्निहोत्री, पवन मिश्रा, राजीव अग्रवाल, हरीश बाजपेई, शाकिर अली उस्मानी, नरेंद्र निषाद, अतुल कटियार, प्रखर त्रिपाठी, देव कुमार, प्रताप साहनी, हीराल जायसवाल, रतिराम यादव, प्रखर श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कैप्टन डॉ. लक्ष्मी सहगल के आदर्शों और सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी समाजसेवा, समानता और मानवता के लिए काम करने वालों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

