शादी के 41 साल बाद बुजुर्ग ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार, बोला साहब पत्नी जूतों से पीटती है

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रिपोर्ट-कृष्णा शर्मा 

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों का ध्यान परिवार के भीतर बढ़ते विवादों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों की ओर खींचा है। जिला अधिकारी (डीएम) के साप्ताहिक जनता दर्शन कार्यक्रम में एक बुजुर्ग व्यक्ति अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी उनके साथ मारपीट करती है, गाली-गलौज करती है और कई बार सार्वजनिक रूप से उनका अपमान भी कर चुकी है।

शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वहीं, जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

जनता दर्शन में रखी अपनी पीड़ा

बुधवार को आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंचे बुजुर्ग ने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह को लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि उनका विवाह लगभग 41 वर्ष पहले हुआ था और उन्होंने पूरी जिंदगी मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण किया।

बुजुर्ग के अनुसार उन्होंने अपने परिवार की हर जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने खेत बेचकर मकान बनवाया, अपने तीनों बेटों की शादी कराई और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का हर संभव प्रयास किया। इतना ही नहीं, उन्होंने पत्नी के नाम पर जमीन भी खरीदी ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

हालांकि, उनका आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें परिवार में सम्मान नहीं मिल रहा है और पत्नी उनके साथ लगातार दुर्व्यवहार करती हैं।

पत्नी पर लगाए गंभीर आरोप

प्रार्थना पत्र में बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी अक्सर उनके साथ गाली-गलौज करती हैं और कई बार मारपीट भी कर चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जूतों से मारकर अपमानित किया गया, जिससे वे मानसिक रूप से काफी परेशान हैं।

उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें उचित सुरक्षा और न्याय दिलाया जाए। बुजुर्ग का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें सम्मान और शांति की अपेक्षा थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों ने उन्हें प्रशासन की शरण लेने के लिए मजबूर कर दिया।

डीएम ने दिए जांच के निर्देश

मामले को सुनने के बाद जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों से कहा गया कि दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि निष्पक्ष तरीके से समाधान की दिशा में कदम उठाए जा सकें।

काउंसलिंग के जरिए समाधान की होगी कोशिश

जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद विभाग की ओर से एक टीम गठित की जाएगी। यह टीम शिकायतकर्ता के घर जाकर दोनों पक्षों से बातचीत करेगी और पारिवारिक विवाद के कारणों को समझने का प्रयास करेगी।

उन्होंने कहा कि प्राथमिकता परिवार के भीतर चल रहे विवाद को बातचीत और काउंसलिंग के माध्यम से सुलझाने की होगी। यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो आपसी मतभेद दूर कराने की कोशिश की जाएगी।

इसके अलावा, यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता महसूस होती है तो नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

पारिवारिक विवादों में काउंसलिंग की बढ़ती भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक विवादों में जल्दबाजी में कानूनी कार्रवाई करने के बजाय पहले संवाद और काउंसलिंग का प्रयास कई मामलों में सकारात्मक परिणाम देता है। विशेषकर पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों में प्रशिक्षित काउंसलर दोनों पक्षों की बात सुनकर समाधान निकालने का प्रयास करते हैं।

हालांकि, यदि किसी भी पक्ष की सुरक्षा या सम्मान पर खतरा हो तो प्रशासन और संबंधित विभाग कानून के अनुसार उचित कदम भी उठाते हैं।

वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा भी अहम विषय

भारत में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। परिवार के भीतर होने वाले विवादों का असर बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

ऐसे मामलों में यदि कोई वरिष्ठ नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस करता है तो वह जिला प्रशासन, पुलिस, सामाजिक न्याय विभाग अथवा जिला प्रोबेशन कार्यालय से सहायता मांग सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार के सभी सदस्यों को संवाद बनाए रखना चाहिए ताकि छोटे-छोटे मतभेद बड़े विवाद का रूप न लें।

प्रशासन की भूमिका पर लोगों की नजर

कानपुर का यह मामला सामने आने के बाद लोगों की नजर अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप किस हद तक सही हैं।

फिलहाल जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोनों पक्षों को सुनने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

समाज के लिए क्या है संदेश?

यह घटना केवल एक पारिवारिक विवाद भर नहीं है, बल्कि यह इस बात की भी याद दिलाती है कि परिवार के भीतर सम्मान, संवाद और आपसी विश्वास का बनाए रखना कितना आवश्यक है। किसी भी रिश्ते में यदि लगातार तनाव बना रहे तो समय रहते बातचीत, परिवार के अन्य सदस्यों की मध्यस्थता या पेशेवर काउंसलिंग की मदद लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

साथ ही, किसी भी प्रकार के आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच प्रक्रिया के बाद ही संभव होती है। इसलिए ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों की बात सुनना न्यायसंगत प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

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