कानपुर में आवास योजना की जांच पर सवाल, जर्जर मकान में रह रहा मजदूर परिवार योजना से वंचित

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रिपोर्ट – अमन सिंह

कानपुर: सरकार की ओर से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य ऐसे परिवारों को आवास उपलब्ध कराना है, जिनके पास रहने के लिए सुरक्षित और पक्का घर नहीं है। हालांकि, कानपुर के बिधनू विकासखंड से सामने आया एक मामला आवास योजना की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है।

दलेलपुर गांव में रहने वाले एक मजदूर परिवार का आरोप है कि जर्जर मकान में रहने के बावजूद आवास योजना के लिए उसका आवेदन कथित तौर पर गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर निरस्त कर दिया गया। परिवार का कहना है कि जांच के दौरान उसके वास्तविक मकान के बजाय परिवार के दूसरे सदस्य के पक्के मकान को दिखाकर रिपोर्ट तैयार की गई। इसके बाद आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका।

मामले को लेकर परिवार ने अधिकारियों से जांच और पात्रता के आधार पर आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। वहीं, खंड विकास अधिकारी ने बताया कि सचिव की जांच में परिवार को अपात्र पाया गया था। साथ ही, उन्होंने ऐसे व्यक्ति द्वारा जांच किए जाने के मामले में कार्रवाई की बात कही है, जिसे जांच का अधिकार नहीं था।

दलेलपुर गांव के मजदूर परिवार ने उठाए सवाल

दलेलपुर गांव निवासी धर्मेंद्र पुत्र संतू अपनी पत्नी राधा और तीन बच्चों के साथ रहते हैं। परिवार में 16 वर्षीय बेटी रिया, 12 वर्षीय प्रिया और 5 वर्षीय बेटा ईशु शामिल हैं।

परिवार के अनुसार, वे करीब 12 बिस्वा पट्टे की जमीन पर खेती और मजदूरी करके किसी तरह अपना जीवन यापन करते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार के लिए मकान का निर्माण कराना आसान नहीं है।

धर्मेंद्र का कहना है कि उनका मकान करीब 80 वर्ष पुराना है। मकान में केवल एक कमरा और बरामदा है। इसके अलावा, छत लकड़ी की धन्नियों पर टिकी हुई है। परिवार के अनुसार, बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है और घर में रहने में काफी परेशानी होती है।

परिवार का आरोप है कि ऐसी स्थिति के बावजूद उसे आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका।

जर्जर मकान में रहने का दावा

धर्मेंद्र और उनकी पत्नी राधा का कहना है कि परिवार लंबे समय से जर्जर मकान में रहने को मजबूर है। राधा के अनुसार, बारिश के मौसम में छत से पानी टपकता है और परिवार को काफी परेशानी होती है।

उन्होंने बताया कि घर की स्थिति ऐसी है कि परिवार के सभी सदस्यों को एक ही कमरे और बरामदे में रहना पड़ता है। सीमित संसाधनों के कारण मकान की मरम्मत भी नहीं कराई जा सकी है।

राधा का कहना है कि परिवार को अब तक गैस कनेक्शन भी नहीं मिला है। इसके चलते बारिश के दिनों में चूल्हा जलाकर खाना बनाना भी मुश्किल हो जाता है।

परिवार का कहना है कि यदि उसे आवास योजना का लाभ मिल जाए, तो बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था हो सकेगी।

जांच रिपोर्ट को लेकर परिवार ने लगाए आरोप

धर्मेंद्र के अनुसार, उन्होंने आवास योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था। इसके बाद जांच के लिए गांव में सर्वे किया गया।

परिवार का आरोप है कि जांच के दौरान उनके वास्तविक जर्जर मकान को देखने के बजाय परिवार के दूसरे सदस्य के पक्के मकान को दिखाकर रिपोर्ट तैयार कर दी गई। इसके परिणामस्वरूप उनके आवेदन को निरस्त कर दिया गया।

धर्मेंद्र का कहना है कि जांच प्रक्रिया में यदि उनके वास्तविक मकान की स्थिति को देखा जाता, तो उन्हें आवास योजना के लिए पात्र माना जा सकता था।

हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की शिकायत

धर्मेंद्र ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि शिकायत के निस्तारण के दौरान भी पहले से तैयार कथित गलत रिपोर्ट को ही आधार माना गया।

परिवार का कहना है कि उसकी वास्तविक स्थिति का स्वतंत्र रूप से दोबारा सत्यापन नहीं किया गया। ऐसे में अब परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

धर्मेंद्र का कहना है कि यदि जांच दोबारा मौके पर जाकर की जाए और उनके वास्तविक मकान की स्थिति का निरीक्षण किया जाए, तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

पंचायत स्तर पर सूची तैयार होने की बात

वहीं, प्रधानपति छेद्दन साहू ने बताया कि पंचायत स्तर पर करीब 80 आवासों की सूची तैयार की गई थी। बाद में इस सूची में संशोधन किया गया।

उन्होंने कहा कि ग्राम विकास अधिकारी की ओर से धर्मेंद्र को पात्र मानते हुए आवास दिलाने की बात कही गई थी। हालांकि, जांच और पात्रता को लेकर बाद में स्थिति अलग रही।

प्रधानपति के बयान में जांच से जुड़े एक व्यक्ति की भूमिका को लेकर भी चर्चा सामने आई। उन्होंने पहले अभिषेक पाल को रोजगार सेवक बताया, जबकि उपलब्ध अभिलेखों में उसका नाम रोजगार सेवक के रूप में दर्ज नहीं होने की बात कही गई है।

इससे आवास योजना की जांच प्रक्रिया और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

बीडीओ ने जांच अधिकार को लेकर कही कार्रवाई की बात

बिधनू के खंड विकास अधिकारी आशीष मिश्रा ने मामले पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सचिव की जांच में परिवार को अपात्र पाए जाने के कारण आवास योजना का लाभ नहीं मिला।

हालांकि, अभिषेक पाल द्वारा जांच किए जाने के मामले में उन्होंने कार्रवाई की बात कही है। बीडीओ के अनुसार, यदि संबंधित व्यक्ति को जांच करने का अधिकार नहीं था और फिर भी उसके द्वारा जांच की गई है, तो इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सचिव की ओर से किसी ऐसे व्यक्ति से जांच कराई गई, जिसे जांच का अधिकार नहीं था, तो सचिव के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल आवास योजना की जांच प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। यदि किसी पात्र परिवार के वास्तविक मकान के बजाय किसी अन्य मकान को आधार बनाकर रिपोर्ट तैयार की गई, तो इससे योजना के उद्देश्य पर असर पड़ सकता है।

वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पात्रता का निर्धारण निर्धारित नियमों और जांच के आधार पर किया जाता है। यदि जांच प्रक्रिया में कोई अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परिवार की वास्तविक आवासीय स्थिति क्या है और आवेदन के दौरान किस आधार पर उसे अपात्र माना गया।

गरीब परिवारों तक योजना का लाभ पहुंचाना चुनौती

प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। इसके लिए पात्रता के आधार पर लाभार्थियों का चयन किया जाता है।

हालांकि, किसी भी सरकारी योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि पात्र लोगों की पहचान सही तरीके से हो और उन्हें समय पर लाभ मिले।

यदि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की गलती होती है, तो पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित हो सकता है। वहीं, अपात्र व्यक्ति को लाभ मिलने की संभावना भी बनी रहती है। इसलिए आवास योजना में पारदर्शी और मौके पर आधारित जांच बेहद जरूरी है।

परिवार ने दोबारा जांच की मांग की

धर्मेंद्र और उनकी पत्नी राधा ने प्रशासन से मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर उनके मकान की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें।

परिवार के अनुसार, उनका मकान काफी पुराना और जर्जर है। ऐसे में वे आवास योजना के लाभ के लिए पात्रता की दोबारा जांच चाहते हैं।

यदि दोबारा जांच में परिवार पात्र पाया जाता है, तो उसे नियमानुसार योजना का लाभ मिल सकता है। वहीं, यदि पहले की जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

अब जांच के परिणाम पर टिकी नजर

कानपुर के बिधनू विकासखंड के दलेलपुर गांव का यह मामला आवास योजना की जांच प्रक्रिया और पात्र लाभार्थियों के चयन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है।

एक ओर परिवार का दावा है कि वह जर्जर मकान में रह रहा है और उसके आवेदन को गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर निरस्त किया गया। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि सचिव की जांच में परिवार अपात्र पाया गया था।

अब इस मामले में आगे की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि आवास योजना के आवेदन की जांच किस आधार पर की गई थी और क्या प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई।

फिलहाल, परिवार को उम्मीद है कि उसकी शिकायत पर निष्पक्ष जांच होगी और यदि वह नियमों के अनुसार पात्र पाया जाता है, तो उसे आवास योजना का लाभ दिया जाएगा।

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