मथुरा के मुड़ेसी श्मशान घाट में जलभराव से अंतिम संस्कार प्रभावित, ग्रामीणों ने मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

मथुरा: लगातार हो रही बारिश के बीच मथुरा नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 11 स्थित गांव मुड़ेसी के श्मशान घाट में जलभराव की समस्या एक बार फिर सामने आई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि श्मशान घाट में पानी भर जाने और आवश्यक मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण अंतिम संस्कार की प्रक्रिया प्रभावित हुई। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से श्मशान घाट में स्थायी सुविधाएं विकसित करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि प्रत्येक वर्ष बरसात के मौसम में श्मशान घाट में जलभराव होने से अंतिम संस्कार के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया।

बीमारी के कारण हुई व्यक्ति की मृत्यु

स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव मुड़ेसी निवासी अमर सिंह का बुधवार को बीमारी के कारण निधन हो गया। इसके बाद परिजन उन्हें गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए लेकर पहुंचे। हालांकि, वहां पहुंचने पर उन्होंने देखा कि श्मशान घाट का बड़ा हिस्सा बारिश के पानी से भरा हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार, श्मशान घाट तक जाने वाले मार्ग और अंतिम संस्कार स्थल पर जलभराव होने के कारण आवश्यक व्यवस्थाएं प्रभावित थीं। ऐसी स्थिति में परिजनों और स्थानीय लोगों ने उपलब्ध संसाधनों की सहायता से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की।

जलभराव और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से बढ़ी परेशानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि श्मशान घाट में घुटनों तक पानी जमा था। इसके अलावा रास्ते पर कीचड़ होने के कारण आवागमन भी कठिन हो गया था। ग्रामीणों के अनुसार, वहां न तो स्थायी टीनशेड की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त ऊंचाई वाला पक्का चबूतरा उपलब्ध है।

परिजनों और ग्रामीणों ने बारिश से बचाव के लिए अस्थायी रूप से तिरपाल का उपयोग किया, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि श्मशान घाट में पहले से आवश्यक सुविधाएं होतीं तो इस प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता।

ग्रामीणों ने दोहराई पुरानी मांग

गांव के निवासी पिंटू सिंह ने बताया कि बरसात के मौसम में हर वर्ष श्मशान घाट में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर इस संबंध में कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को जानकारी दी गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण लंबे समय से श्मशान घाट में जल निकासी व्यवस्था, पक्का मार्ग और टीनशेड के निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान लोगों को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

परिजनों ने जताई चिंता

मृतक के परिजनों ने भी श्मशान घाट की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि ऐसे समय में परिवार पहले से ही भावनात्मक कठिन दौर से गुजर रहा होता है और यदि मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध न हों, तो स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने संबंधित विभागों से अनुरोध किया कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों, इसके लिए आवश्यक विकास कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराए जाएं।

वर्षों से अधूरी हैं मूलभूत सुविधाएं

ग्रामीणों के अनुसार, मुड़ेसी श्मशान घाट में लंबे समय से आधारभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। उनका कहना है कि यहां अभी तक पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था, चारदीवारी, स्थायी शेड और पक्का मार्ग उपलब्ध नहीं है।

बरसात के दौरान जलभराव के कारण न केवल अंतिम संस्कार प्रभावित होता है, बल्कि श्मशान घाट तक पहुंचना भी कठिन हो जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते आवश्यक निर्माण कार्य कराए जाएं तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

नगर निगम के विकास कार्यों पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम द्वारा विभिन्न विकास योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, लेकिन गांव के इस सार्वजनिक स्थल पर आवश्यक सुविधाओं का अभाव चिंता का विषय है। उनका मानना है कि श्मशान घाट जैसी सार्वजनिक सुविधा को भी प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने कहा कि अंतिम संस्कार स्थल पर बेहतर व्यवस्था होना सामाजिक और मानवीय दृष्टि से भी आवश्यक है। इसलिए संबंधित विभागों को इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।

विशेषज्ञों की राय: सार्वजनिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं जरूरी

शहरी विकास और स्थानीय निकायों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि श्मशान घाट, कब्रिस्तान और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर जल निकासी, पक्का मार्ग, प्रकाश व्यवस्था और शेड जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होना आवश्यक है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून से पहले ऐसे स्थानों का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत और रखरखाव कार्य पूरे कर लिए जाने चाहिए, ताकि बरसात के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और नगर निगम से निम्नलिखित मांगें की हैं—

  • श्मशान घाट से जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
  • बारिश के पानी की निकासी के लिए प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था बनाई जाए।
  • श्मशान घाट तक पक्का मार्ग तैयार किया जाए।
  • अंतिम संस्कार स्थल पर स्थायी टीनशेड और पक्का चबूतरा बनाया जाए।
  • नियमित साफ-सफाई और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि इन सुविधाओं के विकसित होने से भविष्य में लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

नगर निगम या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। यदि भविष्य में प्रशासन की ओर से कोई बयान या विकास कार्यों की घोषणा की जाती है, तो उसे समाचार में अद्यतन किया जाएगा।

मथुरा के वार्ड 11 स्थित मुड़ेसी श्मशान घाट में जलभराव की समस्या ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता को उजागर किया है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान हर वर्ष ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे अंतिम संस्कार जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम और प्रशासन से जल निकासी, पक्का मार्ग, टीनशेड तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो।

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