फर्रुखाबाद में नाबालिग किशोरी के अपहरण-दुष्कर्म मामले में दो दोषियों को 7 साल की सजा – पढ़िए पूरी खबर

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रिपोर्ट – हर्ष वर्मा 

फर्रुखाबाद: नाबालिग किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के करीब सात वर्ष पुराने मामले में विशेष न्यायालय ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश रेखा शर्मा ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी लल्लूराम उर्फ पंकज और धर्मपाल को दोषी माना। अदालत ने दोनों दोषियों पर कुल 80 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

यह मामला फर्रुखाबाद के मऊदरवाजा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, करीब सात वर्ष पहले एक महिला ने अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने के संबंध में पुलिस को तहरीर दी थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपहरण सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। बाद में विवेचना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में आरोपियों की भूमिका की जांच की गई।

खेत की ओर गई थी 17 वर्षीय किशोरी

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, घटना 5 सितंबर 2017 की शाम की है। मऊदरवाजा थाना क्षेत्र निवासी महिला की 17 वर्षीय बेटी घर से खेत की ओर गई थी। आरोप है कि इसी दौरान गांव के ही कुछ लोगों ने उसे मोटरसाइकिल पर बैठाकर अपने साथ ले गए। परिजनों के अनुसार, किशोरी के शोर मचाने के बावजूद आरोपी उसे लेकर वहां से चले गए।

किशोरी के घर वापस नहीं लौटने पर परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की। परिजनों ने आसपास के इलाकों और संभावित स्थानों पर खोजबीन की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की।

जांच के दौरान सामने आई आरोपियों की भूमिका

मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की। साथ ही, पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपियों की भूमिका का परीक्षण किया। जांच के दौरान कुछ नामों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें मुकदमे से बाहर कर दिया गया।

वहीं, विवेचना के दौरान धर्मपाल का नाम भी मामले में सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।

अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश रेखा शर्मा की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता तेज सिंह राजपूत ने दलीलें पेश कीं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के साथ ही मामले में प्रस्तुत गवाहों और साक्ष्यों का अवलोकन किया।

इसके बाद अदालत ने लल्लूराम उर्फ पंकज और धर्मपाल को नाबालिग किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया। न्यायालय ने दोनों दोषियों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त दोनों पर कुल 80 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इस तरह प्रत्येक दोषी पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

लंबे समय बाद आया न्यायालय का फैसला

यह मामला वर्ष 2017 का है और करीब सात वर्ष तक कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। इस दौरान जांच, आरोपपत्र, गवाहों के बयान और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी। अंततः अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी माना।

कानूनी मामलों में अदालत का फैसला प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर होता है। इसी क्रम में इस मामले में भी न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का परीक्षण करने के बाद दोषसिद्धि का निर्णय सुनाया।

पॉक्सो कानून के तहत मामलों में न्यायिक प्रक्रिया

नाबालिगों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों की सुनवाई पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत की जाती है। ऐसे मामलों में पीड़ित नाबालिग की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया जाता। कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करना और ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

फर्रुखाबाद के इस मामले में भी नाबालिग किशोरी से जुड़े तथ्यों को ध्यान में रखते हुए विशेष न्यायालय में सुनवाई हुई। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। इसके बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।

पुलिस जांच और अभियोजन की भूमिका अहम

इस मामले में पुलिस विवेचना के दौरान आरोपियों की भूमिका की जांच की गई। जिन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले, उनके नाम मामले से हटाए गए, जबकि विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर धर्मपाल को आरोपी बनाया गया। इसके बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में मामले से जुड़े साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रस्तुत सामग्री का परीक्षण किया। इसके परिणामस्वरूप लल्लूराम उर्फ पंकज और धर्मपाल को दोषी माना गया।

अदालत के फैसले के बाद कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी

अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार जारी रहेगी। न्यायालय ने दोनों दोषियों को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही जुर्माने की राशि भी निर्धारित की गई है।

यह फैसला ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका को रेखांकित करता है। हालांकि किसी भी आपराधिक मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायालय द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और कानून के आधार पर ही तय किया जाता है।

फर्रुखाबाद के मऊदरवाजा थाना क्षेत्र से जुड़े इस मामले में सात वर्ष बाद अदालत का फैसला सामने आया है। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सात-सात वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने यह निर्णय दिया।

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