मथुरा में विकास कार्यों को लेकर पार्षद ने दिया धरना, वार्ड 65 की लंबित फाइलों पर उठाए सवाल
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: नगर निगम मथुरा-वृंदावन में विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वार्ड संख्या 65 में अपेक्षित विकास कार्य न होने और कई प्रस्तावों की फाइलें लंबित रहने से नाराज पार्षद संतोष पाठक नगर निगम कार्यालय के बाहर सांकेतिक धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके वार्ड के साथ विकास कार्यों के मामले में भेदभाव किया जा रहा है।
पार्षद का कहना है कि सड़क, नाली, सफाई और पेयजल से जुड़े कई जरूरी कार्यों की फाइलें लंबे समय से नगर निगम में लंबित हैं। इसके बावजूद इन पर अपेक्षित गति से कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली और लंबे समय से बोर्ड बैठक न होने को लेकर भी सवाल उठाए।
विकास कार्यों में देरी से नाराज पार्षद
वार्ड 65 के पार्षद संतोष पाठक के अनुसार, उनके क्षेत्र में कई बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों की समस्याओं को देखते हुए विकास कार्यों से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर नगर निगम में भेजे गए हैं।
हालांकि, पार्षद का आरोप है कि इन प्रस्तावों पर लंबे समय से कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। उनका कहना है कि कई फाइलें महीनों से लंबित पड़ी हैं और अधिकारियों से लगातार संपर्क के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
पार्षद ने कहा कि जनप्रतिनिधि के तौर पर जनता लगातार उनसे विकास कार्यों को लेकर सवाल करती है। ऐसे में यदि प्रस्ताव स्वीकृत नहीं होते और काम शुरू नहीं होता, तो जनता के बीच जवाब देना मुश्किल हो जाता है।
सड़क, नाली और पेयजल से जुड़े कार्यों का मुद्दा
पार्षद ने बताया कि वार्ड 65 में सड़क, नाली, सफाई और पेयजल से जुड़े कई कार्यों की जरूरत है। स्थानीय लोगों की शिकायतों के आधार पर इन समस्याओं को नगर निगम के सामने रखा गया है।
उनका आरोप है कि इन मुद्दों पर कार्रवाई की गति बेहद धीमी है। इसके कारण वार्ड के लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पार्षद का कहना है कि यदि विकास कार्यों से जुड़ी फाइलें समय पर आगे बढ़ें तो कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। इसलिए उन्होंने नगर निगम प्रशासन से लंबित प्रस्तावों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
दोहरे रवैये का लगाया आरोप
धरने पर बैठे पार्षद संतोष पाठक ने नगर निगम प्रशासन पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उनका कहना है कि कुछ वार्डों में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि वार्ड 65 के प्रस्तावों को कथित रूप से लंबित रखा गया है।
उन्होंने कहा कि सभी वार्डों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में विकास कार्यों की जरूरत है तो वहां की प्राथमिकता के आधार पर काम कराया जाना चाहिए।
पार्षद ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर प्रशासन को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि जनता को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।
नगर निगम बोर्ड बैठक न होने पर भी सवाल
पार्षद ने नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर एक और महत्वपूर्ण सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से नगर निगम की बोर्ड बैठक नहीं हुई है।
उनके अनुसार, बोर्ड बैठक में पार्षदों द्वारा क्षेत्र की समस्याओं और विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव रखे जाते हैं। यदि बैठक समय पर नहीं होती है, तो कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय नहीं हो पाता।
पार्षद का कहना है कि बोर्ड बैठक के माध्यम से पार्षदों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। इसलिए बैठक नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए।
उमस भरी गर्मी में दिया सांकेतिक धरना
विकास कार्यों में देरी के विरोध में पार्षद संतोष पाठक उमस भरी गर्मी के बीच नगर निगम कार्यालय के बाहर सांकेतिक धरने पर बैठे। धरने की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने भी मौके पर पहुंचकर अपना समर्थन जताया।
कुछ स्थानीय लोगों ने वार्ड की समस्याओं को लेकर अपनी शिकायतें भी सामने रखीं। उनका कहना है कि क्षेत्र की कई सड़कें और अन्य बुनियादी सुविधाएं लंबे समय से सुधार की प्रतीक्षा कर रही हैं।
धरने के दौरान स्थानीय लोगों ने नगर निगम प्रशासन से वार्ड की समस्याओं पर जल्द कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय लोगों ने भी बताईं समस्याएं
स्थानीय निवासी मुकेश गुप्ता के अनुसार, उनके मोहल्ले की सड़क लंबे समय से खराब स्थिति में है। उनका कहना है कि सड़क की समस्या के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी होती है।
उन्होंने कहा कि पार्षद द्वारा समस्याओं को लेकर आवाज उठाना अच्छी बात है। अब नगर निगम प्रशासन को भी इन शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क, नाली, सफाई और पेयजल जैसी सुविधाएं सीधे आम जनता के दैनिक जीवन से जुड़ी हैं। इसलिए इनसे संबंधित समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
अधिकारियों ने वार्ता का दिया आश्वासन
पार्षद के धरने की जानकारी मिलने के बाद नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने पार्षद से बातचीत की और समस्याओं पर विचार करने का आश्वासन दिया।
नगर निगम प्रशासन की ओर से कहा गया कि विकास कार्यों से संबंधित फाइलें निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाई जाती हैं। बजट और तकनीकी स्वीकृति सहित आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद कार्य शुरू किए जाएंगे।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी वार्ड के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।
नगर निगम प्रशासन ने रखा अपना पक्ष
नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सभी विकास कार्यों की फाइलें नियमानुसार प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा कि बजट उपलब्धता और तकनीकी स्वीकृति के बाद संबंधित कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।
अधिकारी के अनुसार, विकास कार्यों की स्वीकृति कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी होती है। इसलिए फाइलों को आवश्यक जांच और स्वीकृति के बाद ही अंतिम रूप दिया जाता है।
नगर निगम प्रशासन ने भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है।
राजनीतिक गतिविधियां भी हुईं तेज
पार्षद के सांकेतिक धरने के बाद नगर निगम की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। वार्ड 65 के मुद्दे को लेकर अन्य पार्षदों की प्रतिक्रिया भी सामने आने की संभावना है।
विपक्षी पार्षदों की ओर से भी नगर निगम की कार्यप्रणाली और बोर्ड बैठक को लेकर सवाल उठाए जाने की चर्चा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा नगर निगम की राजनीति में और प्रमुखता से उठ सकता है।
अब लंबित फाइलों पर कार्रवाई का इंतजार
सांकेतिक धरने के बाद अब स्थानीय लोगों और पार्षद की नजर नगर निगम प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। वार्ड 65 से जुड़े विकास प्रस्तावों पर कब तक निर्णय लिया जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा।
इसके साथ ही, नगर निगम बोर्ड की अगली बैठक कब आयोजित होती है और उसमें वार्डों से जुड़े विकास प्रस्तावों पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर भी सभी की नजर बनी हुई है।
कुल मिलाकर, मथुरा वार्ड 65 में विकास कार्यों को लेकर पार्षद का धरना नगर निगम की कार्यप्रणाली और लंबित विकास प्रस्तावों पर चर्चा का कारण बन गया है। पार्षद संतोष पाठक ने सड़क, नाली, सफाई और पेयजल से जुड़े कार्यों में देरी का मुद्दा उठाया है।
वहीं, नगर निगम प्रशासन का कहना है कि विकास कार्यों की फाइलें प्रक्रिया में हैं और आवश्यक बजट तथा तकनीकी स्वीकृति के बाद कार्य शुरू किए जाएंगे। अब देखना होगा कि पार्षद के सांकेतिक धरने के बाद वार्ड 65 की लंबित फाइलों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और बोर्ड बैठक को लेकर नगर निगम प्रशासन क्या निर्णय लेता है।

