रूस के मिसाइल हमले में देवरिया के अभिषेक निषाद की मौत, कर्ज लेकर बेटे का सपना पूरा कर रहे थे पिता
Digital UP News Desk
देवरिया: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमेल गांव के रहने वाले 22 वर्षीय अभिषेक निषाद की यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह पर हुए रूसी हमले में मृत्यु हो गई। परिवार के अनुसार, 19 जुलाई को हुई इस घटना की सूचना मिलने के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। अभिषेक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर मर्चेंट नेवी के क्षेत्र में करियर बनाने निकला था।
यह खबर सामने आने के बाद गांव के लोग लगातार परिवार के घर पहुंच रहे हैं और उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। परिवार के सदस्यों के लिए इस दुखद घटना को स्वीकार करना बेहद कठिन हो रहा है।
मां को बेटे के लौटने का इंतजार
अभिषेक की मां अनीता देवी बेटे की याद में लगातार भावुक हैं। घर पहुंचने वाले परिचितों और ग्रामीणों से वह बार-बार अपने बेटे को याद करती हैं। परिवार के अन्य सदस्य और पड़ोसी उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
पिता कौशल निषाद भी गहरे दुख में हैं। वह परिवार को संभालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बेटे के निधन का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई देता है। परिवार के लिए यह केवल एक व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि वर्षों के सपनों के टूटने जैसा है।
बहनों के लिए सबसे बड़ा सहारा था भाई
अभिषेक की दो बहनें हैं। बड़ी बहन साधना और छोटी बहन अराधना अपने भाई के बेहद करीब थीं। परिवार के अनुसार, भाई के निधन की खबर के बाद दोनों गहरे सदमे में हैं।
छोटी बहन अराधना ने बताया कि अभिषेक परिवार का सबसे बड़ा सहारा था। वह अपने भाई के साथ बिताए गए पलों को याद कर रही हैं और कहती हैं कि परिवार के लिए यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकती।
किसान परिवार से था अभिषेक
गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमेल गांव में रहने वाले कौशल निषाद खेती-किसानी करते हैं। वह स्थानीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के बूथ अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। परिवार में पत्नी अनीता देवी, बेटियां साधना और अराधना तथा बेटा अभिषेक थे।
परिवार सीमित आय के बावजूद अपने बच्चों की शिक्षा और भविष्य को लेकर हमेशा गंभीर रहा। दोनों बेटियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। बड़ी बेटी स्नातकोत्तर (एमए) और छोटी बेटी स्नातक (बीए) की पढ़ाई कर रही है।
मर्चेंट नेवी में करियर बनाने का सपना
अभिषेक ने वर्ष 2022 में राम प्रकाश माल इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उसने मर्चेंट नेवी में करियर बनाने का लक्ष्य तय किया। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद उसके माता-पिता ने उसके सपनों को पूरा करने का निर्णय लिया।
मर्चेंट नेवी में प्रशिक्षण और आगे की प्रक्रिया के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता थी। इसके बावजूद परिवार ने पीछे हटने के बजाय बेटे के भविष्य को प्राथमिकता दी।
बेटे की पढ़ाई के लिए लिया कर्ज
अभिषेक की पढ़ाई और प्रशिक्षण का खर्च जुटाने के लिए पिता कौशल निषाद ने लगभग साढ़े पांच लाख रुपये का कर्ज लिया। इसके बाद उन्होंने बेटे को लखनऊ के एक प्रशिक्षण संस्थान में भेजा, जहां उसने मर्चेंट नेवी से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया।
परिवार को विश्वास था कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अभिषेक को विदेश में बेहतर अवसर मिलेंगे और इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यही उम्मीद पूरे परिवार के लिए प्रेरणा बनी हुई थी।
परिवार ने भविष्य के लिए देखे थे कई सपने
अभिषेक को लेकर परिवार की कई योजनाएं थीं। माता-पिता चाहते थे कि बेटा अपने करियर में आगे बढ़े और बहनों की पढ़ाई तथा परिवार की जिम्मेदारियों में सहयोग करे। परिवार को विश्वास था कि उसकी मेहनत एक दिन बेहतर परिणाम लेकर आएगी।
हालांकि, ओडेसा बंदरगाह पर हुई घटना ने इन सभी उम्मीदों को अचानक बदल दिया। अब परिवार के सामने बेटे की यादें ही सबसे बड़ी धरोहर बनकर रह गई हैं।
गांव में शोक का माहौल
अभिषेक के निधन की सूचना मिलते ही करमेल गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीण, रिश्तेदार और स्थानीय लोग लगातार परिवार के घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि अभिषेक मेहनती, विनम्र और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित युवक था। उसकी सफलता को लेकर पूरे गांव में उम्मीद थी। इसलिए उसके निधन की खबर ने सभी को गहरा दुख पहुंचाया है।
विदेश में काम करने वाले युवाओं की चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय युवाओं के सामने कई तरह की चुनौतियां होती हैं। कई बार वे ऐसे क्षेत्रों में कार्यरत होते हैं जहां सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां अचानक बदल सकती हैं।
ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों, नियोक्ताओं और सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय तथा समय पर सूचना उपलब्ध होना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता और मार्गदर्शन मिल सकता है।
सरकार और प्रशासन से परिवार की अपेक्षाएं
परिवार और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित सरकारी एजेंसियां आवश्यक औपचारिकताओं में सहयोग करेंगी। साथ ही, परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि अभिषेक ने कठिन परिस्थितियों में अपने भविष्य के लिए मेहनत की थी। इसलिए उसके परिवार को हर संभव सहयोग मिलना चाहिए।

