यूपी में बाल श्रम उन्मूलन अभियान तेज, संयुक्त टीम ने 3 बच्चों को कराया मुक्त, 15 दुकानदारों को दी गई वार्निंग
रिपोर्ट- विवेक पाल
हमीरपुर: उत्तर प्रदेश में बाल श्रम मुक्त प्रदेश के लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रशासन ने विशेष अभियान को और तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाल श्रम उन्मूलन के संकल्प के अनुरूप प्रदेशभर में विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमें लगातार निरीक्षण और जागरूकता अभियान चला रही हैं।
इसी क्रम में जनपद मुख्यालय में महिला सुरक्षा प्रकोष्ठ, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), चाइल्ड लाइन और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने बाजार क्षेत्र के विभिन्न प्रतिष्ठानों पर अभियान चलाकर तीन बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया। साथ ही, 15 दुकानदारों को भविष्य में बच्चों से काम न कराने की सख्त चेतावनी दी गई।
यह अभियान केवल कानून का पालन सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य से जोड़ना भी है। अधिकारियों का कहना है कि बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
10 जुलाई से 24 जुलाई तक चल रहा है विशेष अभियान
अपर पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर महिला सुरक्षा प्रकोष्ठ द्वारा 10 जुलाई से 24 जुलाई 2026 तक विशेष बाल श्रम उन्मूलन अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान में पुलिस, श्रम विभाग, चाइल्ड लाइन, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और अन्य संबंधित विभाग संयुक्त रूप से भाग ले रहे हैं।
अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान करना है, जो दुकानों, होटलों, कार्यशालाओं, ढाबों, प्रतिष्ठानों या अन्य व्यावसायिक स्थानों पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही, बाल श्रम कराने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
संयुक्त टीम ने बाजार क्षेत्र में की छापेमारी
अभियान के तहत जनपद मुख्यालय के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में संयुक्त टीम ने कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान तीन बच्चे कार्य करते हुए मिले। अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए उन्हें वहां से मुक्त कराया और उनके संरक्षण एवं पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की।
इसके अतिरिक्त टीम ने कई दुकानदारों से पूछताछ की तथा श्रम कानूनों की जानकारी भी दी। निरीक्षण के दौरान लगभग 15 दुकानदारों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई कि भविष्य में किसी भी बच्चे से काम कराना कानून का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसी स्थिति में उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बाल श्रम कानून के प्रति किया गया जागरूक
कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासन ने जागरूकता अभियान भी चलाया। अधिकारियों ने दुकानदारों, व्यापारियों और आम नागरिकों को बताया कि बाल श्रम केवल सामाजिक समस्या ही नहीं, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है।
लोगों को समझाया गया कि बच्चों का स्थान विद्यालय है, न कि कार्यस्थल। यदि बच्चे शिक्षा प्राप्त करेंगे, तभी वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकेंगे और समाज के विकास में सकारात्मक योगदान दे पाएंगे।
इसके अलावा, अभिभावकों से भी अपील की गई कि वे आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बच्चों की पढ़ाई जारी रखने का प्रयास करें और उन्हें श्रम में न लगाएं।
बाल श्रम क्यों है गंभीर सामाजिक चुनौती?
बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास को प्रभावित करता है। कम उम्र में कार्य करने से बच्चों की शिक्षा बाधित होती है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा से वंचित बच्चे भविष्य में बेहतर रोजगार और जीवन के अवसरों से भी दूर रह जाते हैं। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार ऐसे अभियान चलाकर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
अभियान में शामिल अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रतिष्ठान पर यदि बाल श्रम कराया जाता हुआ पाया गया, तो संबंधित संचालक के खिलाफ लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि निरीक्षण अभियान आगे भी नियमित रूप से जारी रहेगा। साथ ही, जिन बच्चों को श्रम से मुक्त कराया गया है, उन्हें संबंधित विभागों की सहायता से शिक्षा और आवश्यक संरक्षण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
विभिन्न विभागों का समन्वय बना अभियान की ताकत
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता विभिन्न विभागों का समन्वय है। महिला सुरक्षा प्रकोष्ठ, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, चाइल्ड लाइन और श्रम विभाग ने मिलकर संयुक्त कार्रवाई की, जिससे अभियान अधिक प्रभावी साबित हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब कानून लागू कराने वाली एजेंसियां, सामाजिक संस्थाएं और प्रशासन मिलकर कार्य करते हैं, तब बाल श्रम जैसी सामाजिक समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाता है।
समाज की भी है महत्वपूर्ण भूमिका
बाल श्रम उन्मूलन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। समाज, व्यापारियों, अभिभावकों और आम नागरिकों की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।
यदि किसी व्यक्ति को किसी दुकान, होटल, फैक्ट्री या अन्य स्थान पर कोई बच्चा काम करता हुआ दिखाई देता है, तो वह संबंधित विभाग या स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना देकर अभियान में सहयोग कर सकता है।
साथ ही, नागरिकों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे ऐसे प्रतिष्ठानों को प्रोत्साहित न करें, जहां बच्चों से काम कराया जाता हो।
शिक्षा से जुड़ेगा भविष्य
अधिकारियों ने अभियान के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार है। बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संबंधित विभाग आवश्यक प्रक्रिया अपनाते हैं।
शिक्षा न केवल बच्चों के व्यक्तिगत विकास का माध्यम है, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति का भी आधार है। इसलिए बाल श्रम उन्मूलन और शिक्षा को बढ़ावा देना एक-दूसरे के पूरक हैं।
जागरूकता अभियान का मिला सकारात्मक संदेश
बाजार क्षेत्र में चलाए गए जागरूकता अभियान को व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने भी गंभीरता से लिया। कई दुकानदारों ने भविष्य में बाल श्रम न कराने का आश्वासन दिया और कानूनों का पालन करने की बात कही।
अधिकारियों का मानना है कि केवल दंडात्मक कार्रवाई से ही नहीं, बल्कि जन-जागरूकता के माध्यम से भी बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बच्चों के अधिकारों की रक्षा
उत्तर प्रदेश में चल रहा बाल श्रम उन्मूलन अभियान बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जनपद मुख्यालय में संयुक्त टीम द्वारा तीन बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराना और 15 दुकानदारों को चेतावनी देना इस अभियान की प्रभावी कार्रवाई को दर्शाता है।

