बिजनौर में मछली पकड़ने के जाल में फंसा विशाल मगरमच्छ, वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर गंगा नदी में छोड़ा
रिपोर्ट – तबिश मिर्जा
बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के नांगल सोती क्षेत्र में सोमवार सुबह एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने स्थानीय ग्रामीणों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। ग्राम रायपुर खास उर्फ कोट सराय के समीप स्थित एक तालाब में मछली पकड़ने के दौरान जाल में एक विशाल मगरमच्छ फंस गया।
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंच गए। हालांकि, ग्रामीणों ने सतर्कता बरतते हुए तुरंत सामाजिक वानिकी विभाग को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सफलतापूर्वक मगरमच्छ का रेस्क्यू किया और उसे उसके प्राकृतिक आवास गंगा नदी में सुरक्षित छोड़ दिया।
वन विभाग की इस त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने सराहना की। साथ ही अधिकारियों ने बरसात के मौसम में जलाशयों के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील भी की।
सुबह मछली पकड़ने के दौरान सामने आई अप्रत्याशित घटना
जानकारी के अनुसार, ग्राम कोट सराय निवासी मोहम्मद याकूब सोमवार सुबह लगभग 10 बजे अपने तालाब में मछली पकड़ने के लिए जाल डाल रहे थे। यह तालाब कोट सराय के निकट मंडेयो गांव के खादर क्षेत्र में स्थित है। जैसे ही उन्होंने जाल फैलाया, उसमें किसी भारी जीव के फंसने का एहसास हुआ।
शुरुआत में उन्हें लगा कि जाल में बड़ी मछली फंस गई है, लेकिन कुछ ही देर बाद पता चला कि जाल में एक विशाल मगरमच्छ है। इसके बाद उन्होंने तुरंत सावधानी बरतते हुए दूरी बनाई और आसपास के लोगों को सूचना दी।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे ग्रामीण
घटना की जानकारी तेजी से पूरे गांव में फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण तालाब के पास पहुंच गए। हालांकि, किसी ने भी मगरमच्छ के पास जाने या उसे निकालने का प्रयास नहीं किया। ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए वन विभाग को सूचना देना उचित समझा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में गंगा और उससे जुड़े जल क्षेत्रों का जलस्तर बढ़ने के कारण जलीय जीव कभी-कभी तालाबों और अन्य जलाशयों तक पहुंच जाते हैं। इसलिए उन्होंने किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने के बजाय अधिकारियों की मदद ली।
वन विभाग ने तुरंत शुरू किया रेस्क्यू अभियान
सूचना मिलने के बाद सामाजिक वानिकी विभाग की टीम बिना देरी किए मौके पर पहुंची। वन दरोगा विकास कुमार के नेतृत्व में रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया।
रेस्क्यू टीम में अनुज शुक्ला, धूम सिंह, मोहम्मद उमर, बबलू और रमेश सिंह सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे। टीम ने पहले पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया और फिर ग्रामीणों के सहयोग से सुरक्षित तरीके से मगरमच्छ को नियंत्रित करने की योजना बनाई।
वन विभाग के कर्मचारियों ने आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाते हुए मगरमच्छ को रस्सियों की सहायता से सुरक्षित बांधा, ताकि उसे बिना किसी नुकसान के स्थानांतरित किया जा सके। पूरी प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि न तो किसी व्यक्ति को कोई खतरा हो और न ही वन्यजीव को किसी प्रकार की क्षति पहुंचे।
ट्रैक्टर-ट्रॉली से गंगा नदी तक पहुंचाया गया
रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद मगरमच्छ को सावधानीपूर्वक ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखा गया। इसके बाद वन विभाग की टीम उसे खादर क्षेत्र में स्थित गंगा नदी तक लेकर गई।
गंगा नदी पहुंचने के बाद मगरमच्छ को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में वापस छोड़ना पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
ग्रामीणों ने दिखाई जिम्मेदारी
इस पूरी घटना में स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। मोहम्मद याकूब, तस्लीम अहमद और जुनैद अहमद सहित कई ग्रामीणों ने समय रहते वन विभाग को सूचना दी और रेस्क्यू अभियान के दौरान सहयोग भी किया।
वन विभाग का कहना है कि यदि लोग स्वयं मगरमच्छ को पकड़ने या हटाने का प्रयास करते, तो अनावश्यक जोखिम उत्पन्न हो सकता था। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित और उचित कदम होता है।
बरसात के मौसम में बढ़ जाती है ऐसी घटनाओं की संभावना
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मानसून के दौरान नदियों, नालों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ जैसे जलीय जीव अपने प्राकृतिक क्षेत्र से निकलकर आसपास के तालाबों, खेतों या अन्य जल स्रोतों तक पहुंच सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक स्वाभाविक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसलिए ऐसे मौसम में जलाशयों के आसपास कार्य करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतना आवश्यक होता है।
वन विभाग की महत्वपूर्ण अपील
वन दरोगा विकास कुमार ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी तालाब, नदी या खेत के आसपास मगरमच्छ या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई दे, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। सबसे पहले सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
उन्होंने यह भी कहा कि वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने या स्वयं पकड़ने का प्रयास न करें। प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम ऐसे मामलों में सुरक्षित तरीके से कार्रवाई करती है।
वन्यजीव संरक्षण में जनसहभागिता जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होती है। समय पर सूचना देना, अफवाहों से बचना और प्रशासन का सहयोग करना वन्यजीवों तथा लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
बिजनौर की यह घटना भी इस बात का उदाहरण है कि प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बेहतर समन्वय से किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है।
बिजनौर के नांगल सोती क्षेत्र में मछली पकड़ने के दौरान जाल में फंसे विशाल मगरमच्छ का सुरक्षित रेस्क्यू वन विभाग की सतर्कता और ग्रामीणों की समझदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
समय पर सूचना मिलने से वन विभाग ने बिना किसी अप्रिय घटना के मगरमच्छ को सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास गंगा नदी में छोड़ दिया। साथ ही अधिकारियों ने मानसून के दौरान जलाशयों के आसपास सावधानी बरतने और किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की है। यह घटना पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और जनसहभागिता के महत्व को भी रेखांकित करती है।

