श्रावस्ती में पेट्रोल पंप पर कम ईंधन देने के आरोप का वीडियो वायरल, जांच की मांग तेज, जानिए क्या है पूरा मामला
रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला
श्रावस्ती: उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जनपद में स्थित इकौना बाईपास के एक पेट्रोल पंप को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने उपभोक्ताओं के बीच चर्चा छेड़ दी है।
वीडियो में दावा किया जा रहा है कि 100 रुपये का पेट्रोल भरवाने पर निर्धारित मात्रा से कम ईंधन दिया गया। हालांकि, इस दावे की अभी तक किसी सक्षम सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के बीच पेट्रोल की मात्रा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसके साथ ही उपभोक्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ वीडियो
बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए वीडियो में पेट्रोल भरवाने के बाद ईंधन की मात्रा पर संदेह व्यक्त किया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद कई उपभोक्ताओं ने भी अपनी चिंताएं जाहिर कीं और प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने की अपील की।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वायरल वीडियो अपने आप में किसी आरोप का अंतिम प्रमाण नहीं होता। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट करती है।
उपभोक्ताओं ने की निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि पेट्रोल की मात्रा में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि जांच में आरोप गलत साबित होते हैं, तो इससे संबंधित सभी पक्षों के सामने वास्तविक तथ्य भी स्पष्ट हो जाएंगे।
लोगों ने विशेष रूप से विधिक माप विज्ञान विभाग से मशीनों की जांच कराने और निर्धारित मानकों के अनुसार माप की पुष्टि करने की मांग की है।
विधिक माप विज्ञान विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण
पेट्रोल पंपों पर ईंधन की मात्रा और माप की जांच का दायित्व विधिक माप विज्ञान विभाग के पास होता है। विभाग समय-समय पर पेट्रोल एवं डीजल वितरण मशीनों का निरीक्षण करता है ताकि उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जा सके।
यदि किसी शिकायत के आधार पर जांच की जाती है, तो विभाग मशीनों की तकनीकी जांच, माप परीक्षण तथा सील की स्थिति का परीक्षण करता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
प्रसाशन से पारदर्शी कार्रवाई की मांग
वायरल वीडियो के बाद स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
लोगों का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर पारदर्शिता बनाए रखना उपभोक्ताओं के हित में आवश्यक है। नियमित निरीक्षण और समय-समय पर माप परीक्षण से इस प्रकार की शिकायतों पर रोक लगाई जा सकती है।
जांच होने तक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो कई बार अधूरी जानकारी के साथ भी साझा किए जाते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार करना आवश्यक है।
यदि जांच में कोई तकनीकी कमी या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो इससे पेट्रोल पंप संचालक का पक्ष भी स्पष्ट हो जाएगा।
उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए
यदि किसी उपभोक्ता को पेट्रोल या डीजल की मात्रा पर संदेह हो, तो वह संबंधित पेट्रोल पंप पर उपलब्ध 5 लीटर माप कैन से ईंधन की जांच कराने का अनुरोध कर सकता है।
इसके अतिरिक्त उपभोक्ता विधिक माप विज्ञान विभाग, जिला प्रशासन या संबंधित तेल कंपनी के शिकायत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
तेल कंपनियां भी रखती हैं निगरानी
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां समय-समय पर अपने डीलरों और पेट्रोल पंपों का निरीक्षण करती हैं। यदि किसी पंप पर अनियमितता की पुष्टि होती है, तो कंपनी अपने नियमों के अनुसार कार्रवाई करती है।
श्रावस्ती के इकौना बाईपास स्थित पेट्रोल पंप को लेकर वायरल हुए वीडियो ने उपभोक्ताओं के बीच चर्चा और चिंता दोनों बढ़ा दी है। फिलहाल यह मामला आरोप और वायरल वीडियो तक सीमित है तथा इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभागों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। उपभोक्ताओं ने प्रशासन और विधिक माप विज्ञान विभाग से निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, जबकि आरोप गलत पाए जाने पर स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।

