कानपुर में कथित फर्जी मल्टी-लेवल मार्केटिंग गिरोह का भंडाफोड़, नौकरी का झांसा देकर ठगी के आरोप में छह गिरफ्तार
रिपोर्ट – सर्वेश सोनू शर्मा
कानपुर: कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने बेरोजगार युवाओं को नौकरी का लालच देकर कथित रूप से ठगी करने वाले एक फर्जी मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।
पुलिस के अनुसार, हनुमंत विहार थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि यह समूह विभिन्न राज्यों के युवाओं को आकर्षक वेतन वाली नौकरी का वादा कर कानपुर बुलाता था और उनसे पंजीकरण तथा जॉइनिंग के नाम पर धनराशि वसूलता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और उन्हें न्यायालय में पेश कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
नौकरी का लालच देकर युवाओं को बुलाने का आरोप
पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, आरोपी “विन मेकर आयुर्वेदा प्राइवेट लिमिटेड” के नाम का उपयोग करते हुए बेरोजगार युवाओं को ₹20,000 से ₹25,000 प्रतिमाह वेतन वाली नौकरी का प्रस्ताव देते थे। इस प्रस्ताव के आधार पर उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के युवाओं को कानपुर बुलाया जाता था।
जांच में पुलिस का कहना है कि युवाओं को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उन्हें एक प्रतिष्ठित कंपनी में स्थायी रोजगार मिलेगा। इसी भरोसे के कारण कई लोग कंपनी से जुड़ने के लिए तैयार हो जाते थे।
पंजीकरण और जॉइनिंग के नाम पर धन वसूली
पुलिस के अनुसार, कानपुर पहुंचने के बाद युवाओं से ₹15,000 से ₹30,000 तक की राशि पंजीकरण, प्रशिक्षण और जॉइनिंग प्रक्रिया के नाम पर जमा कराई जाती थी।
इसके बदले उन्हें एक सामान्य किट उपलब्ध कराई जाती थी। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद उन्हें वास्तविक रोजगार देने के बजाय नए लोगों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था। यदि कोई व्यक्ति अधिक सदस्य जोड़ता था, तो उसे कथित रूप से अतिरिक्त आय का लालच भी दिया जाता था।
पिरामिड नेटवर्क के माध्यम से बढ़ाया जा रहा था दायरा
प्रारंभिक जांच में पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क कथित रूप से पिरामिड मॉडल पर संचालित किया जा रहा था। इसमें नए सदस्य जोड़ने पर आर्थिक लाभ का दावा किया जाता था।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मॉडल में वास्तविक आय उत्पाद या सेवा की बिक्री से नहीं, बल्कि लगातार नए सदस्यों की भर्ती से उत्पन्न होती है। यदि ऐसा पाया जाता है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, इस मामले में अंतिम तथ्य पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
संयुक्त कार्रवाई में छह आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, हनुमंत विहार थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण वस्तुएं भी बरामद करने का दावा किया है, जिनमें—
- 6 मोबाइल फोन
- 1 सीपीयू
- ₹3,600 नकद
- कथित गतिविधियों से जुड़े दस्तावेज
शामिल हैं। इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है।
डिजिटल साक्ष्यों की भी होगी जांच
पुलिस ने बरामद मोबाइल फोन और कंप्यूटर को जांच के दायरे में लिया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि नेटवर्क कितने समय से संचालित हो रहा था और इससे कितने लोग प्रभावित हुए हो सकते हैं।
यदि जांच में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
बेरोजगार युवाओं को सतर्क रहने की सलाह
पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी के नाम पर किसी भी संस्था को बड़ी धनराशि देने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें।
विशेष रूप से ऐसे प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह दी गई है जिनमें बिना स्पष्ट कार्य विवरण के पहले पंजीकरण शुल्क, प्रशिक्षण शुल्क या जॉइनिंग शुल्क जमा कराने की मांग की जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कंपनी का पंजीकरण, कार्यालय, आधिकारिक वेबसाइट और नियुक्ति प्रक्रिया की पुष्टि करने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।
पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित नेटवर्क का संचालन किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें कितने लोग शामिल थे।
यदि नए तथ्य सामने आते हैं, तो मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है| फिलहाल पुलिस जांच जारी है और गिरफ्तार व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मामले के सभी तथ्यों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

