बांदा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की मांग: जनगणना कार्य करने वाले शिक्षकों को मिले मानदेय और अर्जित अवकाश

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रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा 

बांदा: राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, बांदा ने जनगणना एवं मकान गणना-2026 में योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं के लंबित मानदेय के भुगतान तथा ग्रीष्मावकाश के दौरान किए गए कार्य के बदले अर्जित (Earned Leave) / उपार्जित अवकाश प्रदान किए जाने की मांग उठाई है। महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिला अध्यक्ष पंकज सिंह के नेतृत्व में जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए शासन के संबंधित आदेशों के अनुरूप शीघ्र कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

महासंघ का कहना है कि शिक्षकों ने राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य को पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ संपन्न किया। इसके बावजूद अब तक प्रथम चरण का मानदेय नहीं मिलना तथा अवकाश संबंधी आदेशों पर अमल न होना शिक्षकों के बीच असंतोष का कारण बन रहा है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस विषय पर सकारात्मक पहल करेगा और नियमों के अनुसार शिक्षकों को उनका अधिकार दिलाएगा।

जनगणना कार्य को बताया राष्ट्रीय दायित्व

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने कहा कि “जनगणना/मकान गणना-2026” देश के विकास और भविष्य की योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इस कार्य में जिले के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ भागीदारी निभाई।

उन्होंने बताया कि ग्रीष्मावकाश के दौरान भी शिक्षकों ने बिना किसी हिचकिचाहट के घर-घर जाकर सर्वेक्षण का कार्य किया। परिणामस्वरूप जनपद ने इस अभियान में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनके अनुसार यह उपलब्धि शिक्षकों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का प्रमाण है।

मानदेय भुगतान में हो शीघ्र कार्रवाई

महासंघ ने अपने ज्ञापन में कहा कि शासन द्वारा जनगणना कार्य के लिए मानदेय भुगतान का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद अभी तक प्रथम चरण के मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है।

पंकज सिंह ने कहा कि जब जनगणना कार्य कराया जा रहा था, तब शिक्षकों से समयबद्ध और गंभीरता के साथ कार्य पूरा कराने पर विशेष जोर दिया गया था। ऐसे में अब मानदेय भुगतान में भी उसी प्रकार की तत्परता दिखाई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय पर भुगतान होने से शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और भविष्य में भी वे राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में पूरी निष्ठा के साथ योगदान देने के लिए प्रेरित होंगे।

ग्रीष्मावकाश में किया गया कार्य

महासंघ ने यह भी बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों ने भीषण गर्मी के दौरान जनगणना कार्य किया। सामान्यतः इसी अवधि में विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश रहता है और शिक्षक विश्राम करते हैं। हालांकि इस वर्ष अधिकांश शिक्षकों का अवकाश जनगणना कार्य में व्यतीत हो गया।

संगठन का कहना है कि अन्य कई विभागों के कर्मचारियों को अर्जित अवकाश (EL) की सुविधा उपलब्ध होती है, जबकि बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए ग्रीष्मावकाश ही विश्राम का प्रमुख अवसर होता है। इसलिए यदि उसी अवधि में शासन के निर्देश पर कार्य कराया गया है, तो उसके बदले अर्जित या उपार्जित अवकाश प्रदान किया जाना चाहिए।

शासनादेश का दिया हवाला

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने अपने ज्ञापन में महानिदेशक बेसिक शिक्षा के शासनादेश संख्या महा० नि०/एमoआईoएसo 6049/2024-25, दिनांक 30 सितंबर 2024 का उल्लेख किया है।

संगठन के अनुसार इस शासनादेश के बिंदु-4 में स्पष्ट व्यवस्था की गई है कि यदि बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी ग्रीष्मावकाश या शीतावकाश के दौरान शासन अथवा राज्य स्तर के सक्षम अधिकारी के आदेश पर कार्य करते हैं, तो उन्हें उसके बदले अर्जित/उपार्जित अवकाश दिया जाएगा।

महासंघ का कहना है कि जनगणना कार्य पूरी तरह शासन के निर्देश पर कराया गया। इसलिए इस आदेश के अनुसार शिक्षकों को नियमानुसार अर्जित अथवा उपार्जित अवकाश मिलना चाहिए।

माध्यमिक और बेसिक शिक्षकों के बीच समान व्यवस्था की मांग

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जनगणना कार्य में लगे माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए उपार्जित अवकाश दिए जाने की संस्तुति की जा चुकी है। वहीं दूसरी ओर बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के संबंध में अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है।

महासंघ ने मांग की कि दोनों विभागों के शिक्षकों के साथ समान व्यवहार किया जाए और सभी पात्र शिक्षकों को एक समान नियमों के तहत लाभ उपलब्ध कराया जाए। संगठन का मानना है कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को समान सुविधा मिलनी चाहिए।

जिला प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन

महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नियमों के अनुरूप और समयबद्ध तरीके से किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन शासन स्तर पर इस विषय को प्रभावी ढंग से उठाएगा ताकि लंबित मानदेय और अवकाश संबंधी प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके।

संगठन ने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो इससे शिक्षकों में विश्वास बढ़ेगा और भविष्य में प्रशासनिक कार्यों में उनकी भागीदारी और अधिक प्रभावी होगी।

प्रतिनिधिमंडल में रहे कई पदाधिकारी

जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपने के दौरान राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें जिला अध्यक्ष पंकज सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विश्वनाथ प्रताप सिंह, संयुक्त महामंत्री विनोद कुमार शिवहरे, कोषाध्यक्ष मनोज सिंह तथा ऑडिटर राजेंद्र कुमार द्विवेदी प्रमुख रूप से शामिल रहे।

सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि संगठन शिक्षकों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा तथा शासन और प्रशासन से संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान कराने की दिशा में कार्य करेगा।

शिक्षकों की भूमिका को मिला सम्मान

जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शिक्षकों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। विद्यालयों में शिक्षण कार्य के साथ-साथ चुनाव, जनगणना, सामाजिक जागरूकता अभियान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रहती है।

ऐसे में यदि उनके द्वारा अतिरिक्त समय और अवकाश के दौरान किए गए कार्य का उचित सम्मान तथा नियमानुसार भुगतान और अवकाश उपलब्ध कराया जाता है, तो इससे सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, बांदा द्वारा उठाई गई मांग केवल मानदेय भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन शिक्षकों के अधिकारों से भी जुड़ी है जिन्होंने ग्रीष्मावकाश में शासन के निर्देश पर जनगणना कार्य को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संगठन ने शासनादेश के अनुरूप लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान और अर्जित/उपार्जित अवकाश प्रदान किए जाने की मांग की है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और शासन इस मांग पर कितनी शीघ्रता से निर्णय लेते हैं तथा शिक्षकों को उनके वैधानिक अधिकार कब तक उपलब्ध कराए जाते हैं।

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