‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से ब्रज में लौटेगी कदंब की छांव, देशी वृक्षों के संरक्षण का लिया संकल्प
रिपोर्ट – योगेश भरद्वाज
मथुरा: ब्रज की सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने की दिशा में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।
गुरुवार को मथुरा के अहिल्यागंज बांगर वन भूमि में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र और मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप ने देशी प्रजातियों के वृक्ष लगाकर पर्यावरण संरक्षण तथा हरित ब्रज के निर्माण का संदेश दिया।
इस अवसर पर अधिकारियों ने केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहने, बल्कि उनके संरक्षण और नियमित देखभाल की जिम्मेदारी निभाने का भी आह्वान किया। उनका कहना था कि यदि समाज पौधारोपण के साथ संरक्षण की संस्कृति अपनाएगा, तभी पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य वास्तविक रूप से सफल हो सकेगा।
ब्रज की पहचान रहे देशी वृक्षों को फिर मिलेगा स्थान
ब्रज क्षेत्र सदियों से कदंब, पाकड़, बरगद और गूलर जैसे देशी वृक्षों के लिए जाना जाता रहा है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इन वृक्षों का पर्यावरणीय महत्व भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, बदलती जीवनशैली, शहरीकरण और विकास कार्यों के कारण इन पारंपरिक वृक्षों की संख्या लगातार घटती गई।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए अब प्रशासन और ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने इन देशी प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्स्थापना का अभियान तेज कर दिया है। इसका उद्देश्य केवल हरित क्षेत्र बढ़ाना ही नहीं, बल्कि ब्रज की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करना है।
कदंब और पाकड़ के पौधों से दिया संरक्षण का संदेश
पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने कदंब का पौधा लगाया, जबकि मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप ने पाकड़ का पौधा रोपित किया।
उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन प्रदान करने वाले प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की अमूल्य धरोहर भी हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अधिक से अधिक फलदार और छायादार देशी प्रजातियों के पौधे लगाने चाहिए।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देशी वृक्ष स्थानीय जलवायु के अनुकूल होते हैं। परिणामस्वरूप इनकी जीवित रहने की संभावना अधिक रहती है और ये जैव विविधता को भी बेहतर ढंग से संरक्षित करते हैं।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान बन रहा जन-आंदोलन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से चलाया जा रहा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान अब जनभागीदारी के कारण व्यापक स्वरूप ले रहा है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी मां के सम्मान में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए। इसके साथ ही उस पौधे की नियमित देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी स्वयं निभाए। अधिकारियों के अनुसार केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें विकसित करके वृक्ष बनाना ही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी।
पर्यावरण संरक्षण के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
ब्रज क्षेत्र की पहचान केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की प्राकृतिक वनस्पति भी इसकी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कदंब, बरगद, पाकड़ और गूलर जैसे वृक्ष न केवल पर्यावरण को संतुलित रखते हैं, बल्कि अनेक पक्षियों, जीव-जंतुओं और स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यही कारण है कि इस अभियान के माध्यम से ऐसे वृक्षों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो ब्रज की पारंपरिक पहचान से जुड़े हुए हैं।
वन विभाग ने भी निभाई सक्रिय भूमिका
इस अवसर पर वन विभाग और ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अधिकारियों ने भी सक्रिय रूप से पौधारोपण किया।
प्रभागीय वनाधिकारी वेंकट श्रीकर पटेल ने गूलर का पौधा लगाया, जबकि परिषद की ईको रेस्टोरेशन यूनिट के प्रभारी मुकेश शर्मा ने बरगद का पौधारोपण किया।
अधिकारियों ने कहा कि हरित क्षेत्र का विस्तार केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने का प्रभावी माध्यम
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और घटते हरित क्षेत्र का सीधा प्रभाव पर्यावरण और मानव जीवन पर पड़ रहा है।
ऐसे में बड़े पैमाने पर पौधारोपण और विशेष रूप से देशी प्रजातियों के वृक्षों का संरक्षण इस चुनौती से निपटने का प्रभावी उपाय माना जा रहा है।
इसके अलावा वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध बनाने में मदद करते हैं। वहीं उनकी जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकती हैं तथा भूजल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
जनभागीदारी से मिलेगा अभियान को नया विस्तार
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में ब्रज क्षेत्र का हरित आवरण काफी बढ़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालयों, कॉलेजों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों को इस अभियान से जोड़कर इसे व्यापक जन-आंदोलन बनाया जा सकता है।
इसके साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे पौधारोपण के बाद नियमित रूप से पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करें, ताकि लगाए गए पौधे स्वस्थ वृक्ष बन सकें।
पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि विकास कार्यों के साथ हरित क्षेत्र का भी विस्तार किया जाए, तो पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
इसी सोच के तहत प्रशासन देशी वृक्षों के संरक्षण और पौधारोपण को बढ़ावा दे रहा है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिल सके।
मथुरा में आयोजित ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान केवल पौधारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि ब्रज की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कदंब, पाकड़, बरगद और गूलर जैसे देशी वृक्षों के संरक्षण पर दिया गया विशेष जोर इस अभियान को अन्य वृक्षारोपण कार्यक्रमों से अलग पहचान देता है।
यदि प्रशासन, वन विभाग और आम नागरिक मिलकर पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाते हैं, तो आने वाले वर्षों में ब्रज क्षेत्र एक बार फिर अपनी हरियाली और प्राकृतिक पहचान को मजबूत कर सकेगा। यही इस अभियान का मूल उद्देश्य भी है।

