धनतेरस पर पतारा के ग्रामीणों को मिला तोहफा, डेढ़ करोड़ की तालाब की जमीन होगी कब्जामुक्त
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कानपुर नगर: धनतेरस के अवसर पर घाटमपुर तहसील के ग्राम पतारा के ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। गांव के ऐतिहासिक तालाब की करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को निजी भूमिधरी के रूप में दर्ज किए जाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर कराई गई जांच में राजस्व अभिलेखों में अनियमित प्रविष्टियों का खुलासा हुआ। इसके बाद उप जिलाधिकारी घाटमपुर के न्यायालय ने सुनवाई करते हुए तालाब की 0.5480 हेक्टेयर भूमि पर दर्ज सभी निजी भूमिधरी प्रविष्टियों को निरस्त करने का आदेश दिया है। अब यह जमीन दोबारा तालाब के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज की जाएगी।
इस कार्रवाई से न केवल ग्रामीणों को सार्वजनिक संपत्ति वापस मिलने का रास्ता साफ हुआ है, बल्कि जल संरक्षण और गांव के पारंपरिक सामाजिक आयोजनों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमि सुरक्षित हो सकेगी।
जन चौपाल में ग्रामीणों ने उठाई थी तालाब की जमीन पर कब्जे की शिकायत
ग्राम पतारा में आयोजित जन चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के समक्ष तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे और प्लाटिंग किए जाने की शिकायत रखी थी। ग्रामीणों के अनुसार, गाटा संख्या 2009 की भूमि पर पहले ऐतिहासिक तालाब हुआ करता था। इस तालाब का उपयोग गांव के लोग जल संबंधी आवश्यकताओं के साथ-साथ सामाजिक और पारंपरिक आयोजनों के लिए भी करते थे।
हालांकि, कुछ व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से इस सार्वजनिक भूमि पर अवैध प्लाटिंग कर तालाब का मूल स्वरूप बदलने का प्रयास किया जा रहा था। ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद राजस्व विभाग ने पुराने खसरा-खतौनी, बंदोबस्त और चकबंदी अभिलेखों का परीक्षण किया। जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित भूमि मूल रूप से तालाब के नाम दर्ज थी, लेकिन बाद में राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से अनियमित और छलसाधित प्रविष्टियों के आधार पर इसे निजी संक्रमणीय भूमिधरी के रूप में दर्ज कर दिया गया था।
आठ खातेदारों की प्रविष्टियां निरस्त, तालाब के रूप में दर्ज होगी जमीन
मामले में प्रशासन ने नियमानुसार संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी किए और उन्हें अपना पक्ष रखने तथा आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया। इसके अतिरिक्त समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना भी प्रकाशित कराई गई, ताकि संबंधित पक्षों को न्यायिक कार्यवाही की जानकारी मिल सके।
सभी पक्षों की दलीलों और पुराने राजस्व अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद सक्षम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 38(5) के तहत आदेश पारित किया।
आदेश के अनुसार, गाटा संख्या 2009 की 0.5480 हेक्टेयर भूमि पर दर्ज आठ खातेदारों की निजी संक्रमणीय भूमिधरी प्रविष्टियां निरस्त कर दी गई हैं। इनमें प्रदीप कुमार वर्मा, राजेश कुशवाहा, प्रशान्त मेहरोत्रा, पारस मेहरोत्रा, मीरा देवी, अर्चना देवी, ललित सोनी और रानी देवी के नाम शामिल हैं।
न्यायालय ने भूमि को पुनः श्रेणी 6-1 (अकृषिक भूमि-जलमग्न भूमि) में तालाब के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही, राजस्व अभिलेखों में आवश्यक संशोधन और अमलदरामद की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तहसीलदार घाटमपुर को निर्देशित किया गया है।
सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ होगी एफआईआर
उप जिलाधिकारी घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर सरकारी और ग्रामसभा की जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने तथा सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत ग्राम पतारा में करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की तालाब भूमि को पुनः तालाब के रूप में दर्ज कराने का न्यायिक आदेश पारित हुआ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर अवैध कब्जा करने अथवा राजस्व अभिलेखों में अनियमित प्रविष्टियां कराने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन सार्वजनिक भूमि के संरक्षण को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम कर रहा है।
तालाब का होगा सौंदर्यीकरण, जल संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
प्रशासन की ओर से तालाब की जमीन को अभिलेखों में वापस दर्ज कराने के साथ-साथ इसके पुनरुद्धार की भी तैयारी की जा रही है। एसडीएम के अनुसार, तालाब के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए जल्द ही कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इस योजना में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर में सुधार जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और तालाब को गांव के सार्वजनिक उपयोग के योग्य बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, धनतेरस के अवसर पर पतारा गांव के ग्रामीणों के लिए यह कार्रवाई बड़ी राहत लेकर आई है। करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की सार्वजनिक तालाब भूमि को दोबारा उसके मूल स्वरूप में दर्ज कराने का आदेश प्रशासन की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे गांव की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ भविष्य में जल संकट से निपटने के प्रयासों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

