मेरठ में मकान के नीचे गुप्त तहखाने में चल रही थी नकली चांदी के वर्क की फैक्ट्री, FSDA ने मारा छापा

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रिपोर्ट – मनीष पराशर

मेरठ। दीपावली के त्योहारी सीजन में मिठाइयों की बढ़ती मांग के बीच मिलावटखोरों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मेरठ के परतापुर क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की टीम ने पुलिस बल के साथ एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। यहां मकान के नीचे बने गुप्त सुरंगनुमा तहखाने में एल्यूमिनियम फॉयल से नकली चांदी का वर्क तैयार किया जा रहा था। इस नकली वर्क को असली चांदी बताकर मिठाइयों पर इस्तेमाल करने की तैयारी थी।

कार्रवाई के दौरान टीम को मौके से नकली वर्क बनाने में इस्तेमाल होने वाली 6 से 7 बड़ी मशीनें, तैयार माल और भारी मात्रा में कच्चा माल मिला है। इसके अलावा जांच के लिए करीब 12 संदिग्ध नमूने भी एकत्र किए गए हैं। त्योहारी सीजन से पहले हुई इस कार्रवाई से मिलावटखोरी के कारोबार में शामिल लोगों में हड़कंप मच गया है।

सामान्य मकान के नीचे मिला गुप्त तहखाना

जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग को मुखबिर के माध्यम से परतापुर क्षेत्र के एक मकान में नकली चांदी का वर्क तैयार किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए विभाग की टीम ने पुलिस बल के साथ संदिग्ध मकान पर छापेमारी की।

बाहर से देखने पर मकान सामान्य आवास जैसा दिखाई दे रहा था। इसके सामने की ओर केवल दो कमरे नजर आ रहे थे। हालांकि, जब अधिकारियों ने मकान के अंदर बारीकी से जांच शुरू की तो उन्हें एक गुप्त दरवाजा मिला। मौके पर मौजूद गुलिस्तां नाम की महिला की मौजूदगी में जब इस दरवाजे को खोलकर देखा गया तो नीचे जाने के लिए संकरी सीढ़ियां मिलीं।

इन सीढ़ियों के रास्ते टीम एक सुरंगनुमा तहखाने में पहुंची। वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। तहखाने में नकली चांदी का वर्क तैयार करने का पूरा इंतजाम किया गया था।

एल्यूमिनियम फॉयल से तैयार हो रहा था नकली वर्क

जांच के दौरान तहखाने में 6 से 7 बड़ी मशीनें लगी मिलीं। इन मशीनों की मदद से एल्यूमिनियम फॉयल को पीटकर बेहद पतली परतों में बदला जा रहा था। इसके बाद इन परतों को चांदी के वर्क की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी थी।

खाद्य सुरक्षा विभाग को मौके से तैयार नकली वर्क के साथ कच्चा माल और मशीनें भी बरामद हुई हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस नकली वर्क को बाजार में असली चांदी का वर्क बताकर मिठाई कारोबारियों तक पहुंचाया जाना था। हालांकि, इसकी वास्तविक सप्लाई और बिक्री का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है नकली वर्क

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवि शर्मा ने बताया कि एल्यूमिनियम फॉयल का इस्तेमाल निर्धारित मानकों के अनुसार खाद्य पदार्थों की पैकिंग में किया जाता है। लेकिन इसे चांदी के वर्क के विकल्प के रूप में मिठाइयों पर इस्तेमाल करना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला है।

उन्होंने बताया कि इस तरह के नकली वर्क का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, जैसे लीवर, किडनी और आंतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और शुद्धता की जांच बेहद जरूरी है।

जांच के लिए भेजे गए 12 नमूने, आरोपियों की तलाश जारी

छापेमारी के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने तैयार माल और कच्चे माल से करीब 12 संदिग्ध नमूने एकत्र किए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए मुख्य प्रयोगशाला भेज दिया गया है। अब प्रयोगशाला की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, कार्रवाई के दौरान मौके पर गुलिस्तां नाम की महिला मौजूद मिली, जबकि फैक्ट्री से जुड़े अन्य मुख्य आरोपी मौके से फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें उनकी तलाश में जुटी हैं।

इसके साथ ही जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस फैक्ट्री में तैयार नकली चांदी का वर्क मेरठ और आसपास के किन बाजारों तथा मिठाई की दुकानों तक पहुंचाया गया है। यदि इसकी सप्लाई हुई है तो संबंधित कारोबारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

त्योहारों पर खाद्य पदार्थों की शुद्धता पर उठे सवाल

दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। मेरठ में सामने आया यह मामला खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और उपभोक्ताओं की सतर्कता, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

फिलहाल विभाग की कार्रवाई के बाद जांच रिपोर्ट और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।