आजमगढ़ में 84 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा, 20 राज्यों से जुड़े मामले में 3 आरोपी गिरफ्तार

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रिपोर्ट- पितेश्वर कुमार

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के माध्यम से करीब 84 करोड़ रुपये के संदिग्ध साइबर फ्रॉड का पता चला है। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित बैंक खाते से 20 राज्यों में दर्ज साइबर शिकायतों का संबंध मिला है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 5 मोबाइल फोन, 2 एटीएम कार्ड और 3,860 रुपये नकद बरामद किए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला अभी जांच के अधीन है और बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली तथा इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।

शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि गिरोह कथित रूप से ऑनलाइन ट्रेडिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाता था।

प्रतिबिंब पोर्टल पर शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई जांच

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, प्रतिबिंब पोर्टल पर प्राप्त शिकायत के आधार पर संबंधित बैंक खाते की गतिविधियों का तकनीकी विश्लेषण किया गया।

जांच के दौरान NIHASA MANPOWER SERVICES PVT. LTD. नामक कंपनी के बैंक खाते पर संदेह गहराया। पुलिस के मुताबिक, इस खाते से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 20 राज्यों से कुल 73 शिकायतें दर्ज मिलीं। इसके बाद खाते के वित्तीय लेन-देन और उससे जुड़े व्यक्तियों की विस्तृत जांच की गई।

बैंक खाते से करोड़ों रुपये का लेन-देन

पुलिस जांच के अनुसार, संबंधित बैंक खाते में 14 नवंबर 2025 से 18 नवंबर 2025 के बीच मात्र कुछ दिनों में 4 करोड़ 85 लाख 21 हजार 110 रुपये का लेन-देन दर्ज किया गया।

इसके अलावा प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि इसी खाते के माध्यम से कुल 83 करोड़ 94 लाख 17 हजार 664 रुपये का संदिग्ध वित्तीय लेन-देन हुआ।

पुलिस का कहना है कि इन लेन-देन का संबंध कथित साइबर धोखाधड़ी से होने की आशंका के आधार पर जांच की जा रही है। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही सामने आएंगे।

ऑनलाइन ट्रेडिंग और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कथित ठगी

जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह कथित तौर पर लोगों को ऑनलाइन ट्रेडिंग में अधिक लाभ का लालच देकर या डिजिटल अरेस्ट जैसे फर्जी तरीकों का सहारा लेकर अपने जाल में फंसाता था।

पुलिस का कहना है कि पीड़ितों से विभिन्न बहानों के जरिए बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर कराई जाती थी। हालांकि, पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के निवेश, ऑनलाइन ट्रेडिंग या सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल और संदेशों की सत्यता की जांच किए बिना कोई वित्तीय लेन-देन न करें।

ऐसे काम करता था कथित नेटवर्क

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, प्रशांत सिंह उर्फ लकी, निवासी पुष्पनगर, दीदारगंज ने कथित रूप से कमीशन के आधार पर बैंक खाता उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा था।

इसके बाद आनंद राव और सुनील, जो संबंधित कंपनी के निदेशक बताए गए हैं, ने कथित रूप से अपनी कंपनी का बैंक खाता उपलब्ध कराया। जांच में यह भी सामने आया कि खाते की जानकारी बाद में मोनू सिंह नामक व्यक्ति तक पहुंचाई गई।

पुलिस के अनुसार, खाते में आने वाली धनराशि से संबंधित कमीशन पहले से तय प्रतिशत के आधार पर आपस में बांटा जाता था। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

तीन आरोपियों की गिरफ्तारी

साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इस मामले में दर्ज मुकदमे के आधार पर कार्रवाई करते हुए 15 जुलाई 2026 की रात लगभग 8:05 बजे तीन आरोपियों को हिरासत में लिया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में—

  • आनंद राव, पुत्र दिनेश कुमार, निवासी कौरा गहनी, थाना दीदारगंज
  • सुनील, पुत्र सीताराम, निवासी सिसवारा नरवे, थाना ठेकमा
  • प्रशांत सिंह उर्फ लकी, पुत्र कृष्ण कुमार सिंह, निवासी पुष्पनगर, थाना दीदारगंज शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि इन आरोपियों के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

क्या-क्या हुआ बरामद?

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण वस्तुएं बरामद की हैं। इनमें—

  • 5 मोबाइल फोन
  • 2 एटीएम कार्ड
  • 3,860 रुपये नकद शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, जिससे पूरे नेटवर्क, बैंक खातों और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में और जानकारी मिल सके।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस के अनुसार, उपनिरीक्षक रजत सिंह की तहरीर के आधार पर साइबर क्राइम थाना में मु.अ.सं. 35/2026 दर्ज किया गया है।

मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 319(2) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

साइबर अपराध से बचने के लिए क्या करें?

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा निवेश पर असामान्य लाभ का दावा किए जाने पर सतर्क रहें। इसके अलावा यदि कोई खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी बताकर धनराशि जमा करने का दबाव बनाए, तो उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।

इसी प्रकार बैंक खाता, ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का संदेह हो, तो तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से सूचना दें।

जांच अभी जारी

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। यदि जांच में अन्य व्यक्तियों या राज्यों में सक्रिय सहयोगियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

आजमगढ़ साइबर क्राइम थाना पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई एक बड़े अंतर्राज्यीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के खुलासे के रूप में देखी जा रही है। प्रारंभिक जांच में लगभग 84 करोड़ रुपये के संदिग्ध साइबर फ्रॉड, 20 राज्यों से जुड़ी 73 शिकायतों और तीन आरोपियों की गिरफ्तारी का मामला सामने आया है। फिलहाल पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है।

वहीं नागरिकों से अपील की गई है कि वे ऑनलाइन निवेश, डिजिटल अरेस्ट या किसी भी संदिग्ध वित्तीय प्रस्ताव के प्रति सतर्क रहें और किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।

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