कानपुर में ‘भूजल सप्ताह’ की हुई शुरुआत, 590 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण अभियान और ईशन नदी पुनर्जीवन पर जोर

a3ce3aa8-ba85-4df0-b036-ce77c93163c4

रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी

कानपुर: भूजल स्तर में लगातार आ रही गिरावट और जल संरक्षण की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए कानपुर में ‘भूजल सप्ताह’ की शुरुआत की गई है।

इस विशेष अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना, तालाबों और पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण करना तथा ईशन नदी के पुनर्जीवन की दिशा में सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

अभियान के तहत जिले की 590 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण चौपालों का आयोजन किया जा रहा है, जबकि स्कूलों में भी विद्यार्थियों को जल बचाने का संदेश देने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

प्रशासन का मानना है कि यदि समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, तो भूजल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।

यही कारण है कि इस अभियान में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ग्राम पंचायतें, छात्र-छात्राएं, स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय नागरिक भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

मकनपुर में श्रमदान से अभियान का हुआ शुभारंभ

‘भूजल सप्ताह’ की शुरुआत बिल्हौर तहसील के मकनपुर गांव से हुई, जहां प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और ग्रामीणों ने स्वयं कुदाल उठाकर श्रमदान किया और तालाबों तथा जल स्रोतों के संरक्षण के महत्व पर जोर दिया।

इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर जल बचाने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल संसाधन सुरक्षित किए जा सकते हैं।

590 ग्राम पंचायतों में शुरू हुई जल संरक्षण चौपाल

अभियान के अंतर्गत जिले की 590 ग्राम पंचायतों में विशेष जल संरक्षण चौपाल आयोजित की जा रही हैं। इन चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, तालाबों के संरक्षण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग के बारे में जानकारी दी जा रही है।

इसके साथ ही लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि छोटे-छोटे प्रयास, जैसे वर्षा के पानी को संरक्षित करना, तालाबों की नियमित सफाई और जल स्रोतों का संरक्षण, भविष्य में जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

ईशन नदी के पुनर्जीवन पर विशेष जोर

इस अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य ईशन नदी के पुनर्जीवन के लिए जनसहभागिता बढ़ाना भी है। प्रशासन का मानना है कि यदि नदी और उससे जुड़े जल स्रोतों का संरक्षण किया जाए, तो क्षेत्र के भूजल स्तर में सकारात्मक सुधार संभव है।

इसीलिए अभियान के दौरान नदी संरक्षण, जल निकायों की सफाई और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों, तालाबों और प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर रहेगा विशेष फोकस

भूजल संरक्षण अभियान के तहत प्रशासन ने शहर की बहुमंजिला इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थिति की भी समीक्षा करने का निर्णय लिया है। जिन इमारतों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था नहीं है, उनका सर्वे कराया जाएगा।

सर्वे के आधार पर ऐसे भवनों में नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल का प्रभावी उपयोग भूजल स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

इसके अलावा लोगों को भी अपने घरों, संस्थानों और व्यावसायिक परिसरों में वर्षा जल संचयन प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

स्कूलों में प्रतियोगिताओं के माध्यम से बढ़ेगी जागरूकता

जल संरक्षण के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए जिले के स्कूलों में चित्रकला, निबंध और अन्य जागरूकता प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य बच्चों में जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

शिक्षकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यार्थियों को जल संरक्षण के वैज्ञानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दें। इससे बच्चों के माध्यम से यह संदेश परिवारों और समाज तक भी पहुंचेगा।

उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिलेगा सम्मान

अभियान के समापन अवसर पर 22 जुलाई को जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले बच्चों, ग्राम प्रधानों और संबंधित अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि इस सम्मान का उद्देश्य समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और जल संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना है। इससे अन्य ग्राम पंचायतों और संस्थानों को भी प्रेरणा मिलेगी।

क्यों जरूरी है भूजल संरक्षण?

विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती आबादी, अनियंत्रित भूजल दोहन और बदलते जलवायु परिस्थितियों के कारण देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।

ऐसे में वर्षा जल संचयन, तालाबों का संरक्षण, नदियों का पुनर्जीवन और जल का संतुलित उपयोग ही दीर्घकालिक समाधान माने जाते हैं। यही कारण है कि सरकार और प्रशासन अब जनभागीदारी आधारित अभियानों पर विशेष जोर दे रहे हैं।

जनभागीदारी से ही सफल होगा अभियान

प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानें, बल्कि इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाएं। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, खेत, विद्यालय और कार्यस्थल पर पानी की बचत और वर्षा जल संचयन के उपाय अपनाए, तो भूजल स्तर में सुधार लाने में बड़ी सफलता मिल सकती है।

साथ ही ग्राम पंचायतों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों से भी जल संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया गया है।

कानपुर में शुरू हुआ ‘भूजल सप्ताह’ जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 590 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण चौपाल, ईशन नदी के पुनर्जीवन, तालाबों के संरक्षण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा, और स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशासन लोगों को पानी की हर बूंद बचाने का संदेश दे रहा है।

यदि प्रशासन, ग्राम पंचायतों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की साझी भागीदारी बनी रहती है, तो यह अभियान भविष्य में भूजल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में सकारात्मक परिणाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

You may have missed