बस्ती में दरोगा पर 50 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप, वीडियो वायरल होने से पुलिस महकमे में हड़कंप

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DigitalUPNews

बस्ती। जिले में एक दरोगा पर 50 हजार रुपये रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगा है। मामले से जुड़ा कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक बस्ती को शिकायती पत्र सौंपकर आरोपी दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन विवाद से जुड़े एक मुकदमे की विवेचना के दौरान उससे रिश्वत की मांग की गई और पैसे नहीं देने पर उसे परेशान किया गया।

मामले में शिकायतकर्ता की पहचान अब्दुल हन्नान के रूप में हुई है। उन्होंने अपनी शिकायत में विवेचक सुरेंद्र यादव पर 50 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। पीड़ित के मुताबिक, जमीन विवाद से संबंधित मुकदमे में उसने जरूरी साक्ष्य और दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। इसके बावजूद विवेचना के दौरान उससे लगातार पैसों की मांग की जाती रही।

पांच महीने तक रिश्वत के लिए परेशान करने का आरोप

अब्दुल हन्नान का आरोप है कि विवेचक सुरेंद्र यादव पिछले करीब पांच महीने से उन्हें रिश्वत के लिए परेशान कर रहे थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस दौरान कई बार पैसों की मांग की गई। इतना ही नहीं, जब उन्होंने रिश्वत देने से इनकार किया तो उन्हें कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई।

पीड़ित का कहना है कि दरोगा ने विवेचना रोकने और उन्हें जेल भेजने की धमकी भी दी। इससे वह मानसिक दबाव में आ गए थे। उनका आरोप है कि पुलिस अधिकारी होने के कारण आरोपी ने अपने पद का प्रभाव दिखाकर उन्हें लगातार परेशान किया।

50 हजार रुपये लेते हुए वीडियो वायरल होने का दावा

इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू कथित वीडियो है। शिकायतकर्ता अब्दुल हन्नान का दावा है कि उनके पास ऐसा वीडियो मौजूद है, जिसमें दरोगा सुरेंद्र यादव रुपये लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने की चर्चा के बाद पुलिस विभाग में मामला सुर्खियों में आ गया है।

हालांकि, वीडियो की वास्तविकता, उसकी प्रमाणिकता और उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में वीडियो की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि आरोप और वीडियो में किए गए दावे सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।

एसपी से लगाई न्याय और सुरक्षा की गुहार

पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक बस्ती को शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोपी दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने और कथित तौर पर ली गई 50 हजार रुपये की रकम वापस दिलाने की मांग भी उठाई है।

इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि रिश्वत देने से इनकार करने के बाद उन्हें लगातार परेशान किया गया। इसलिए उन्हें आशंका है कि शिकायत करने के बाद उनके ऊपर दबाव बनाया जा सकता है।

AHTU में तैनाती की भी सामने आई जानकारी

शिकायत में नामजद दरोगा सुरेंद्र यादव के वर्तमान में एएचटीयू (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) में तैनात होने की जानकारी भी सामने आई है। इस कारण मामला और अधिक चर्चा में है। पुलिस विभाग में तैनात किसी कर्मचारी पर रिश्वत लेने का आरोप लगना विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।

वहीं, मामले में दरोगा सुरेंद्र यादव का पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। आरोपों के संबंध में सवाल पूछे जाने पर वह कथित तौर पर झल्ला गए और फोन काट दिया। फिलहाल उनका विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है।

जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि वायरल वीडियो और पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत के बाद पुलिस विभाग क्या कदम उठाता है। क्या कथित वीडियो की तकनीकी जांच कराई जाएगी? क्या शिकायतकर्ता के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी और क्या आरोपी दरोगा के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी?

फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और पुलिस विभाग की ओर से कार्रवाई संबंधी जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। शिकायतकर्ता को न्याय दिलाने के साथ-साथ पुलिस विभाग की छवि और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए मामले की पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है।

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